1500 एकड़ में 24 घंटे चलेगा डेटा, नहीं रुकेगा इंटरनेट…यहां तैयार हो रहा है भारत का पहला डेटा सेंटर शहर
TV9 Bharatvarsh June 26, 2026 03:43 PM

भारत में पहली बार सिर्फ डेटा सेंटर के लिए एक पूरा शहर बसाने की तैयारी हो रही है. हैदराबाद से करीब 55 किलोमीटर दूर अलोर गांव में प्रस्तावित यह डेटा सेंटर सिटी करीब 1500 एकड़ में विकसित की जाएगी. इसका मकसद ऐसी जगह तैयार करना है जहां डेटा सेंटर कंपनियों को बिजली, पानी, हाई स्पीड फाइबर नेटवर्क और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर एक ही परिसर में मिल सके. आज एआई, क्लाउड कंप्यूटिंग और डिजिटल सेवाओं की बढ़ती मांग के कारण दुनिया भर में बड़े डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं. ऐसे में यह प्रोजेक्ट भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है. इसकी खास बात यह होगी कि यहां कूलिंग के लिए ताजे पानी की बजाय साफ किया गया गंदा पानी इस्तेमाल करने की योजना है. चलिए जानते हैं देश के पहले डेटा सेंटर शहर के बारे में…

ये भी जानें
  • हैदराबाद के पास 1500 एकड़ में भारत का पहला डेटा सेंटर शहर विकसित हो रहा है.
  • यहां बिजली, पानी, फाइबर नेटवर्क और बैकअप इंफ्रास्ट्रक्चर पहले से तैयार रहेगा.
  • डेटा सेंटर की कूलिंग के लिए 530 एमएलडी तक साफ किया गया गंदा पानी इस्तेमाल होगा.
  • एआई और क्लाउड कंप्यूटिंग की बढ़ती मांग को देखते हुए इस शहर को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से डिजाइन किया जा रहा है.
डेटा सेंटर शहर आखिर होता क्या है?

डेटा सेंटर सिटी किसी सामान्य आईटी पार्क की तरह नहीं होती. यह ऐसा विशेष क्षेत्र होता है जहां डेटा सेंटर बनाने वाली कंपनियों की हर जरूरत को पहले से ध्यान में रखकर पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाता है. यहां सिर्फ सर्वर रखने वाली इमारतें नहीं होंगी, बल्कि बिजली सब स्टेशन, हाई स्पीड फाइबर नेटवर्क, कूलिंग सिस्टम, बैकअप पावर, सुरक्षा व्यवस्था, चौड़ी सड़कें और जरूरी यूटिलिटी नेटवर्क भी एक साथ विकसित किए जाएंगे. इससे कंपनियों को अलग-अलग जगह बिजली, पानी या इंटरनेट का इंतजाम नहीं करना पड़ेगा और वे कम समय में अपने डेटा सेंटर शुरू कर सकेंगी.

1500 एकड़ की जरूरत आखिर क्यों?

डेटा सेंटर सिर्फ कंप्यूटर रखने की इमारत नहीं होते. इनमें हजारों सर्वर लगातार चलते हैं और उन्हें ठंडा रखने के लिए बड़े कूलिंग सिस्टम, बिजली सब स्टेशन, ट्रांसफार्मर, पानी की टंकियां, बैकअप सिस्टम और नेटवर्क उपकरणों की जरूरत होती है. इसी वजह से इतने बड़े क्षेत्र की जरूरत पड़ती है. प्रस्तावित डेटा सेंटर सिटी में भविष्य की मांग को देखते हुए बड़े पैमाने पर विस्तार की भी योजना रखी गई है, ताकि नई कंपनियों को भी जगह मिल सके. इसी सोच के साथ करीब 1500 एकड़ जमीन चिन्हित की गई है.

बिजली, पानी और इंटरनेट… यही है इस शहर की सबसे बड़ी ताकत

डेटा सेंटर बिना रुके 24 घंटे चलते हैं. ऐसे में सबसे बड़ी चुनौती लगातार बिजली और कूलिंग की होती है. इसी जरूरत को ध्यान में रखते हुए इस परियोजना में कंपनियों को ओपन एक्सेस के जरिए बिजली उपलब्ध कराने पर विचार किया जा रहा है. वहीं कूलिंग के लिए ताजे पानी की बजाय शहर के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में साफ किए गए गंदे पानी का इस्तेमाल किया जाएगा. हैदराबाद मेट्रोपोलिटन वाटर सप्लाई एंड सीवरेज बोर्ड के 41 एसटीपी से निकलने वाले करीब 530 एमएलडी साफ किए गए पानी को दो अलग पाइपलाइन के जरिए डेटा सेंटर और औद्योगिक क्षेत्रों तक पहुंचाने की योजना है. इससे पीने के पानी पर दबाव कम होगा और बड़े पैमाने पर पानी का दोबारा इस्तेमाल भी हो सकेगा.

एआई के दौर में क्यों बढ़ रहे डेटा सेंटर शहर?

कुछ साल पहले तक डेटा सेंटर मुख्य रूप से वेबसाइट और क्लाउड सर्विस चलाने के लिए इस्तेमाल होते थे, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है. जेनेरेटिव एआई, मशीन लर्निंग और बड़े भाषा मॉडल जैसी तकनीकों के कारण डेटा प्रोसेसिंग की जरूरत कई गुना बढ़ गई है. पहले जहां एक सर्वर रैक 5 से 15 किलोवाट बिजली लेता था, वहीं अब जीपीयू आधारित एआई सिस्टम 30 से 120 किलोवाट तक बिजली की मांग कर रहे हैं. ऐसे सिस्टम को ठंडा रखने के लिए आधुनिक कूलिंग तकनीक की भी जरूरत पड़ती है. यही कारण है कि अब केवल डेटा सेंटर नहीं बल्कि पूरा डेटा सेंटर इकोसिस्टम विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है.

हैदराबाद क्यों बन रहा है नया डेटा सेंटर हब?

हैदराबाद पहले से ही अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, कंट्रोलएस, कैपिटलैंड, एसटीटी ग्लोबल, एनटीटी डेटा, सिफी और टिलमैन ग्लोबल होल्डिंग्स जैसी कंपनियों के डेटा सेंटर का केंद्र है. अधिकारियों के मुताबिक अभी 150 से 200 मेगावाट क्षमता वाले डेटा सेंटर चल रहे हैं. जबकि करीब 5 गीगावाट क्षमता वाले प्रोजेक्ट पाइपलाइन में हैं. इसके अलावा तेलंगाना में 11 गीगावाट से ज्यादा क्षमता वाले प्रस्तावित डेटा सेंटर प्रोजेक्ट्स के लिए एमओयू साइन किए जा चुके हैं. यही वजह है कि इस शहर को भविष्य की मांग को ध्यान में रखकर डिजाइन किया जा रहा है.

भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़?

भारत में डिजिटल सेवाओं का तेजी से विस्तार हो रहा है. ऑनलाइन भुगतान, क्लाउड कंप्यूटिंग, ओटीटी, ई कॉमर्स और एआई सेवाओं के बढ़ने से डेटा की मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में बड़े डेटा सेंटर देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रीढ़ बनते जा रहे हैं. प्रस्तावित डेटा सेंटर सिटी का उद्देश्य सिर्फ सर्वर लगाने की जगह देना नहीं है, बल्कि ऐसा डिजिटल इकोसिस्टम तैयार करना है जहां कंपनियों को एक ही जगह बिजली, पानी, नेटवर्क और विस्तार की सुविधा मिल सके. अगर यह मॉडल सफल रहता है तो भविष्य में दूसरे राज्य भी इसी तरह के डेटा सेंटर शहर विकसित कर सकते हैं.

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