Mahakaleshwar Ujjain: दक्षिण की ओर क्यों स्थित है महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग? जानें क्या है इसका रहस्य
TV9 Bharatvarsh June 27, 2026 10:42 AM

Ujjain Mahakal Temple: भारत में एक ऐसा शहर है, जहां स्वयं मृत्यु के देवता महाकाल विराजते हैं. इस शहर का नाम है उज्जैन. उज्जैन मध्य प्रदेश राज्य का एक जिला है. यहां महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर है. इसको भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. महाकाल उज्जैन के राजा माने जाते हैं. उज्जैन में दक्षिणमुखी महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग से लेकर भस्म आरती तक कण कण में शिव जी वास करते हैं.

इस मंदिर के कई ऐसे रहस्य हैं, जो लोगों को हैरान कर देते हैं. भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से ये एकमात्र ज्योतिर्लिंग है, जोकि दक्षिणमुखी है, लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों है? अगर नहीं तो आइए इस दक्षिणमुखी ज्योतिर्लिंग का रहस्य जानते हैं.

एक ब्रह्मांडीय घोषणा

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग भारत का एकमात्र ऐसा ज्योतिर्लिंग है जिसका मुख दक्षिण की ओर है. इस ज्योतिर्लिंग का दक्षिणमुखी होना मात्र एक प्रतीकात्मक संकेत भर नहीं है, बल्कि इसको एक ब्रह्मांडीय घोषणा माना जाता है. यह व्यक्ति को समय, मृत्यु, भय और पुनर्जन्म की गहन आध्यात्मिक संरचना के बारे में बहुत कुछ बताता है.

यहां काल को लेनी पड़ती है महाकाल से अनुमति

इसमें एक ऐसी शक्ति निहित है, जिसे भक्त केवल देख ही नहीं सकते, बल्कि दर्शन के बाद अपनी सांसों, अपनी भावनाओं में महसूस करते हैं. ऐसी पौराणिक मान्यता है कि इस क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले स्वयं ‘काल’ (मृत्यु) को भी भगवान शिव यानी महाकाल से अनुमति लेनी पड़ती है. दक्षिण की ओर मुख होने के कारण यहां महादेव मृत्यु के भय और अकाल मृत्यु को टालने वाले (मोक्ष प्रदाता) के रूप में पूजे जाते हैं.

अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है

महाकाल से जुड़ी एक कहानी के अनुसार, एक बार चंद्रसेन नामक राजा ने उज्जैन पर शासन किया था. वो भगवान शिव का बहुत बड़ा भक्त था. भगवान यहां अपने महाकाल रूप में प्रकट हुए और राजा के शत्रुओं का नाश किया. फिर भक्तों के अनुरोध पर शिव यहीं निवास करने लगे और यहां के राजा कहलाने लगे. महाकाल मंदिर का उल्लेख कई प्राचीन काव्य ग्रंथों में मिलता है. मान्यता है कि महाकाल के दर्शन से अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है.

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