
तिरुवनंतपुरम, 27 जून . केरल Government ने कम अल्कोहल वाले पेयों पर कर में कटौती के अपने विवादास्पद प्रस्ताव को लेकर बढ़ते विरोध के बावजूद कदम पीछे नहीं खींचे हैं. Government ने इस प्रावधान को मसौदा वित्त विधेयक (फाइनेंस बिल) में शामिल कर दिया है, जिससे आगामी विधानसभा सत्र में इस मुद्दे पर तीखी Political टकराव की संभावना बढ़ गई है.
Saturday को आधिकारिक रूप से प्रकाशित मसौदा वित्त विधेयक को 1 जुलाई को विधानसभा में पेश किया जाएगा. विधेयक में कम अल्कोहल वाले मादक पेयों पर कर कम करने का प्रस्ताव है. हालांकि, Government ने स्पष्ट किया है कि विधेयक पारित होने का अर्थ यह नहीं होगा कि नए कम अल्कोहल वाले पेयों की बिक्री स्वतः शुरू हो जाएगी.
सरकारी अधिकारियों के अनुसार, किसी भी नए उत्पाद को बाजार में उतारने से पहले आबकारी विभाग (एक्साइज) की अलग से मंजूरी लेना अनिवार्य होगा.
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आगे बढ़ाया गया है जब सत्तारूढ़ गठबंधन यूडीएफ के प्रमुख सहयोगी इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल) ने इसका खुलकर विरोध किया है. गठबंधन के भीतर मतभेद बने रहने के बीच Chief Minister वी.डी. सतीशन आने वाले दिनों में सहयोगी दलों के साथ बैठक कर सहमति बनाने का प्रयास करेंगे.
सरकारी सूत्रों का कहना है कि वित्त विधेयक में शामिल प्रावधानों के अलावा फिलहाल कर व्यवस्था में किसी अन्य बदलाव की योजना नहीं है.
कांग्रेस नेताओं, जिनमें आबकारी मंत्री टी. सिद्दीक भी शामिल हैं, का कहना है कि पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर फिलहाल विवाद सुलझ गया है. हालांकि, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केपीसीसी अध्यक्ष वी.एम. सुधीरन अब भी इस फैसले के सबसे मुखर आलोचक बने हुए हैं.
सुधीरन ने Government से मांग की है कि कर रियायत संबंधी प्रस्ताव वापस लिया जाए और विधानसभा में विधेयक पेश करने से पहले संबंधित प्रावधान हटा दिए जाएं. उनका कहना है कि यह कदम शराब की उपलब्धता सीमित करने की कांग्रेस की लंबे समय से चली आ रही नीति के विपरीत है.
Government के इस प्रस्ताव की विपक्षी दलों, धार्मिक संगठनों और शराबबंदी समर्थक समूहों ने भी आलोचना की है. उनका आरोप है कि कम अल्कोहल वाले पेयों पर टैक्स घटाने से राज्य की शराब सेवन को हतोत्साहित करने की घोषित नीति कमजोर होगी.
हालांकि, Government का कहना है कि यह कदम केवल कर ढांचे को तर्कसंगत बनाने के लिए उठाया गया है और इससे राज्य की शराब नीति में कोई बदलाव नहीं माना जाना चाहिए.
वित्त विधेयक पर विधानसभा में होने वाली चर्चा के साथ यह मुद्दा अब राज्य की राजनीति का बड़ा विवाद बन गया है. इससे यूडीएफ के भीतर मतभेद और गहराने की आशंका है, वहीं विपक्ष को Government को घेरने का नया Political मुद्दा मिल गया है.
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डीएससी