एबीपी न्यूज का इंवेस्टिगेटिव प्रोग्राम ‘स्पेशल टास्क’ अगले महीने 5 जुलाई, 2026 से अपने दूसरे सीजन के साथ लौट रहा है. नए सीजन की शुरुआत चार भागों वाली डॉक्यूमेंट्री ‘IC-814 हाईजैक: द सेवन डेज दैट स्टिल हॉन्ट इंडिया’ से होगी, जिसमें भारत के सबसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय सुरक्षा संकटों में से एक को दिखाया जाएगा.
यह डॉक्यूमेंट्री उन लोगों के अनुभवों पर आधारित होगी, जिन्होंने इस संकट को बेहद करीब से देखा और झेला था. इसमें आईसी-814 में मौजूद यात्रियों, क्रू सदस्यों, नेगोशिएटर्स और उस समय घटनाक्रम से जुडे वरिष्ठ अधिकारियों के बयान शामिल होंगे. अहम बात यह भी है कि इस शो को जगविंदर पटियाल होस्ट करेंगे.
फिर से बनाए जाएंगे वो 7 दिनों के संकट
इस सीरीज की शुरुआत 26 साल पहले क्रिसमस की पूर्व संध्या पर हुई उस घटना से होती है, जब इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट 179 यात्रियों और 11 क्रू सदस्यों को लेकर काठमांडू से दिल्ली के लिए रवाना हुई थी.
फ्लाइट के उड़ान भरने के करीब 40 मिनट बाद पांच हथियारबंद हाईजैकर्स ने विमान को अपने कंट्रोल में लिया था. इसके बाद अगले सात दिनों तक विमान में बैठे सभी लोगों को बंधक बनाकर रखा गया और देश राजनीतिक दबाव, मुश्किल बातचीत और कठिन फैसलों के दौर से होकर गुजरा.
चार एपिसोड की इस डॉक्यूमेंट्री में विमान की यात्रा को काठमांडू से अमृतसर, लाहौर, दुबई और आखिर में कंधार तक दिखाया गया है. वहीं, इस दौरान दर्शकों को कॉकपिट, पैसेंजर कैबिन, दिल्ली के कंट्रोल रूम और उन सरकारी बैठकों के भीतर ले जाया जाएगा, जहां उस मुश्किल घड़ी में कई अहम फैसले लिए गए थे.
संकट की कहानी प्रमुख लोगों की जुबानी
इस डॉक्यूमेंट्री में विमान के कैप्टन देवी शरण, केबिन क्रू के सदस्य, हाईजैक के बाद जीवित बचे यात्री, पूर्व रॉ चीफ एएस दुलत, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला, पंजाब के पूर्व डीजीपी सरबजीत सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, वार्ताकारों और संकट के दौरान नीति तैयार करने वाले लोगों के विशेष इंटरव्यू शामिल हैं.
निर्माताओं के मुताबिक, यह सीरीज किसी भी ड्रैमैटिक रीक्रियशन या अटकलों पर आधारित नहीं है, बल्कि इस पूरी घटना को असली चश्मदीदों और संबंधित लोगों की गवाही के आधार पर फिर से बनाया गया है.
उन सवालों पर एक नजर, जिन पर आज भी बहस जारी
ये डॉक्यूमेंट्री सिर्फ विमान IC-814 के हाईजैक होने की घटना की ही जानकारी नहीं देती है, बल्कि यह उन कई महत्वपूर्ण सवालों को भी फिर से उठाती है, जिन पर आज भी नीति-निर्माताओं, सुरक्षा एक्सपर्ट्स और आम लोगों के बीच चर्चा होती है.
इन सवालों में शामिल हैं-
यह डॉक्यूमेंट्री उन लोगों की व्यक्तिगत तकलीफ और अनुभवों को भी दर्शाती है, जो इस हाईजैक के दौरान बंदी बनाए गए थे. इसमें फ्लाइट के अंदर बैठे यात्रियों के डर, आठ दिनों तक चले मानसिक तनाव, भारत में अपने परिजनों की सुरक्षित वापसी का इंतजार कर रहे परिवारों की बैचेनी और लगभग 200 लोगों की जान बचाने के लिए क्रू सदस्यों की तरफ से किए गए असाधारण कोशिशों को भी विस्तार से दिखाया गय है.
डॉक्यूमेंट्री के मुताबिक, कंधार में हुई बातचीत के दौरान लिए गए फैसलों का असर सिर्फ बंधकों की रिहाई तक सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने आतंकवाद, बंधक (होस्टेज) नेगोशिएसंस, राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक फैसलों पर होने वाली बहस को भी लंबे समय तक प्रभावित किया.
आर्काइवल मेटेरियल, गहन रिसर्च, दुलर्भ इंटरव्यू और सिनेमैटिक स्टोरी टेलिंग, ‘IC-814 हाईजैक: द सेवन डेज दैट स्टिल हॉन्ट इंडिया’ न सिर्फ उस ऐतिहासिक प्लेन हाईजैक की घटना को फिर से सामने लाती है, बल्कि उन फैसलों की भी गहराई से पड़ताल करती है, जिसने इतने सालों के बाद भी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित सोच और नीतियों को प्रभावित किया है.
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