पहली बार गिरते सैटेलाइट को बचाएगा नासा, क्या सफल होगा ₹282 करोड़ का रेस्क्यू मिशन?
TV9 Bharatvarsh June 29, 2026 04:43 PM

22 साल से अंतरिक्ष में काम कर रही नासा की स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी खतरे में है. सौर तूफानों की वजह से इसकी कक्षा लगातार नीचे आ रही है. इसे बचाने के लिए नासा ने करीब 282 करोड़ रुपये का स्विफ्ट बूस्ट मिशन शुरू किया है. इसमें एक रोबोटिक स्पेसक्राफ्ट अंतरिक्ष में जाकर अपने तीन रोबोटिक हाथों से स्विफ्ट टेलिस्कोप को पकड़ेगा और उसे फिर से करीब 600 किमी की सुरक्षित कक्षा में पहुंचाएगा. अगर मिशन सफल रहा, तो यह अंतरिक्ष इतिहास का पहला ऐसा रोबोटिक रेस्क्यू ऑपरेशन होगा.

नासा इस रोबोटिक मिशन की लॉन्चिंग इसी हफ्ते यानी मंगलवार, 30 जून को करने वाला है. नासा ने स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी को बचाकर ऊंची और अधिक स्थिर कक्षा में स्थापित करने का जिम्मा कैटेलिस्ट स्पेस टेक्नोलॉजीज नाम की स्टार्टअप कंपनी को सौंपा है. आइए जानते हैं नासा इस पुराने सैटेलाइट को क्यों बचाना चाहता है. इस तकनीक से और कौन से नए रास्ते खुलेंगे…

स्विफ्ट टेलिस्कोप खतरे में क्यों है?

नासा ने मूल रूप से स्विफ्ट को 2004 में 250 मिलियन डॉलर की लागत से लॉन्च किया था और तब इसे सिर्फ दो साल के मिशन के लिए डिजाइन किया गया था. लॉन्च के समय इसे धरती से 600 किमी ऊपर की कक्षा में स्थापित किया गया था. लेकिन हाल ही में, तेज सोलर एक्टिविटी और सौर तूफानों के कारण यह सैटेलाइट तेजी से नीचे गिर रहा है. इस साल के अंत तक धरती पर वापस गिरकर जल सकता है. चूंकि इस स्पेसक्राफ्ट में कक्षा को बनाए रखने के लिए अपने कोई इंजन नहीं हैं, इसलिए नासा को इसे बचाने के लिए तुरंत कदम उठाना पड़ा.

लिंक करेगा स्विफ्ट का रेस्क्यू

इस मिशन को स्विफ्ट बूस्टनाम दिया गया है. कैटेलिस्ट स्पेस ने ‘लिंक’ नाम का एक ऑटोनॉमस स्पेसक्राफ्ट तैयार किया है.

  • आकार में यह एक छोटे किचन रेफ्रिजरेटर जितना है, जिसमें 40 फुट का सोलर विंगस्पैन (पंख) लगा है.
  • इसमें 3 मुख्य आयन इंजन और 3 रोबोटिक हाथ लगे हैं, जिनकी पहुंच 3 फीट से थोड़ी ज्यादा है.
  • हर हाथ में लेगो मिनी-फिगर के हाथों जैसी दो चिमटी लगी हैं, जो स्विफ्ट को पकड़ेंगी.

इस मिशन की लॉन्चिंग प्रशांत महासागर के मार्शल आइलैंड्स स्थित क्वाजालीन एटोल के रीगन मिसाइल टेस्ट साइट से होगी. इसे ले जाने का काम अंतिम एल-1011 स्टारगेजरकैरियर प्लेन करेगा, जिससे आखिरी बार पेगासस XL रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा. यह रॉकेट नॉर्थ्रॉप ग्रुमैन नाम की कंपनी ने बनाया है.

मिशन की चुनौतियां और टाइमलाइन

कैटेलिस्ट ने इस लिंक स्पेसक्राफ्ट को सिर्फ 9 महीने के रिकॉर्ड समय में तैयार किया है, क्योंकि नासा ने पिछले साल सितंबर (2025) में ही उन्हें इसके लिए चुना था.

  • ताजा अनुमानों के मुताबिक, 1.6-टन के स्विफ्ट टेलिस्कोप का अक्टूबर तक 300 किमी से नीचे जाने का खतरा है.
  • ]रेस्क्यू के काम करने के लिए स्विफ्ट का 300 किमी से ऊपर होना जरूरी है.
  • लॉन्च के बाद, लिंक को स्विफ्ट तक पहुंचने और उसे पकड़ने में लगभग एक महीने का समय लगेगा.
  • इसके बाद टेलिस्कोप की कक्षा को 360 किमी से बढ़ाकर वापस 600 किमी तक ले जाने में दो महीने और लगेंगे.
  • अगर सब कुछ योजना के मुताबिक हुआ, तो स्विफ्ट कम से कम पांच साल और काम करेगा.

बचाव की इस प्रक्रिया को आसान बनाने और गिरने की गति को धीमा करने के लिए, नासा ने फरवरी में ही इसके सभी डिवाइसेंज को बंद कर दिया था.

स्विफ्ट को बचाना क्यों जरूरी है?

स्विफ्ट कोई साधारण टेलिस्कोप नहीं है. नासा के एस्ट्रोफिजिक्स डिवीजन के निदेशक शॉन डोमागल-गोल्डमैन के मुताबिक, स्विफ्ट अंतरिक्ष का फर्स्ट रिस्पॉन्डर है, जो तेजी से घूमकर दूर के गामा-रे विस्फोटों को ट्रैक कर सकता है. ये विस्फोट कुछ ही सेकंड चलते हैं लेकिन हमारे सूर्य के पूरे जीवनकाल से ज्यादा ऊर्जा पैदा करते हैं. नासा की साइंस मिशन चीफ निकी फॉक्स का कहना है कि फिलहाल इसे रिप्लेस करने के लिए नासा के पास बजट नहीं है, इसलिए इसे खोना एक बड़ी क्षमता खोने जैसा होगा. 2018 में इसका नाम बदलकर ‘नील गेहर्ल्स स्विफ्ट ऑब्जर्वेटरी’ कर दिया गया था.

मिशन के सफल होने से क्या फायदा होगा?

जान कैटेलिस्ट स्पेस के सीईओ घोनही ली के मुताबिक, यह अंतरिक्ष में जाने वाला अपनी तरह का पहला अमेरिकी अंतरिक्ष रोबोट है. इससे पहले सिर्फ चीन ने 4 साल पहले एक सैटेलाइट को ग्रेवयार्ड कक्षा में धकेलने की सफल कोशिश की थी. नासा का 36 साल पुराना हबल स्पेस टेलिस्कोप भी सोलर तूफानों के कारण ऊंचाई खो रहा है. ली का मानना है कि उनका नया रोबोट हबल की लाइफ भी 2028 तक बढ़ा सकता है. कैटेलिस्ट भविष्य में इसे एक नए बिजनेस के तौर पर देख रहा है.

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