केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय में शुरू होगा AI और डेटा साइंस का बीटेक कोर्स
TV9 Bharatvarsh June 29, 2026 06:43 PM

केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने तकनीक और भारतीय परंपरा को जोड़ते हुए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा साइंस में बी.टेक कार्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है. यह कोर्स एजुकेशनल सेशन 2026-27 से नासिक परिसर में शुरू होगा. इसका उद्देश्य छात्रों को नई तकनीकों में दक्ष बनाने के साथ-साथ भारतीय भाषाओं, प्राचीन ग्रंथों और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए एआई का उपयोग सिखाना है. इस पहल से युवाओं को भविष्य के रोजगार के अवसरों के साथ भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ने का मौका भी मिलेगा.

इस प्रोग्राम को अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद (AICTE) की मंजूरी भी मिल चुकी है. यह किसी संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए गए शुरुआती इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों में शामिल है.

एआई की मदद से सुरक्षित होंगे प्राचीन ग्रंथ

भारत में संस्कृत और अन्य प्राचीन भाषाओं की लाखों पांडुलिपियां मौजूद हैं, जिनमें से कई अभी तक डिजिटल रूप में उपलब्ध नहीं हैं. नए कोर्स में छात्रों को यह सिखाया जाएगा कि एआई की मदद से पुराने दस्तावेजों को पढ़ना, उनको ट्रांसलेट करना, डिजिटल संग्रह तैयार करना और महत्वपूर्ण जानकारी को सुरक्षित रखना कैसे संभव है. इससे भारत की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है.

इन विषयों की होगी पढ़ाई

इस बी.टेक कार्यक्रम में कुल 66 सीटें होंगी, जिनमें 60 नियमित और 6 अतिरिक्त सीटें शामिल हैं. छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, पायथन प्रोग्रामिंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, डीप लर्निंग और सांख्यिकी जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे. इसके अलावा नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (NLP), स्पीच रिकग्निशन, संवादात्मक एआई, कम्प्यूटेशनल भाषाविज्ञान और प्राचीन पांडुलिपियों के लिए ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (OCR) जैसी आधुनिक तकनीकों की भी ट्रेनिंग दी जाएगी.

भारतीय ज्ञान परंपरा और करियर दोनों पर फोकस

इस कोर्स में एआई को आयुर्वेद, योग, ज्योतिष, वास्तु और न्याय जैसे भारतीय ज्ञान क्षेत्रों से भी जोड़ा जाएगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इससे युवा आधुनिक टेक्निकल स्किल सीखने के साथ अपनी सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़े रहेंगे. तेजी से बढ़ते एआई सेक्टर में प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स की मांग को देखते हुए यह कोर्स छात्रों के लिए बेहतर करियर अवसरों के साथ-साथ भारतीय भाषाओं और प्राचीन ज्ञान के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.

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