बांसघाट श्मशान कैसे बदल रहा बिहार में अंतिम संस्कार की व्यवस्था? मिलती हैं ये सुविधाएं
TV9 Bharatvarsh June 30, 2026 03:43 AM

मृत्यु के बाद मनुष्य के पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार सुविधापूर्ण और गरिमा के साथ करने को लेकर बिहार सरकार ने खास पहल शुरू की गई है. राजधानी पटना में मौजूद बांसघाट स्थित श्मशान घाट में कई तरह की आधुनिक सुविधाओं को ईशा फउंडेशन के स्तर से विकसित किया गया है. बता दें कि सरकार ने ईशा आउटरीच को, जो ईशा की सामाजिक और पर्यावरण कल्याण शाखा है, पटना के बांसघाट श्मशान के संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी है.

यह फैसला तमिलनाडु सरकार के साथ साझेदारी में श्मशानों के प्रबंधन में ईशा आउटरीच के व्यापक अनुभव को देखते हुए लिया गया है. एशिया के सबसे बड़े श्मशानों में से एक, बांसघाट को सम्मानजनक, सुलभ और सुव्यवस्थित रूप से प्रबंधित अंतिम संस्कार सेवाएं प्रदान करने के लिए विकसित किया गया है, जो पारंपरिक अंतिम संस्कार की पवित्रता को भी बनाए रखता है.

बांसघाट श्मशान की प्रमुख विशेषताएं: बुनियादी ढांचा

4.5 एकड़ में फैला बांसघाट एशिया के सबसे बड़े श्मशानों में से एक है और पूर्वी भारत की सबसे आधुनिक अंतिम संस्कार सुविधाओं में शामिल है. इस श्मशान में एक साथ 18 अंतिम संस्कार किए जा सकते हैं और यह प्रतिदिन लगभग 50 अंतिम संस्कार करने में सक्षम है, जिससे परिवारों को कुशल और सम्मानजनक सेवा सुनिश्चित होती है.

क्या है सुविधाएं?

यह श्मशान एक स्वच्छ, शांतिपूर्ण और सुव्यवस्थित वातावरण में विद्युत तथा पारंपरिक लकड़ी आधारित दोनों प्रकार की अंतिम संस्कार सुविधाएं प्रदान करता है. हर संभव प्रयास किया गया है ताकि परिवारों को इस कठिन समय में सुलभ, पारदर्शी और संवेदनशील सहायता मिल सके.

शुल्क संरचना

विद्युत अंतिम संस्कार का शुल्क ₹3,500 निर्धारित किया गया है, जो नगर निगम समझौते के तहत अनुमत न्यूनतम शुल्क है और इसमें बिजली तथा रखरखाव की लागत शामिल है. लकड़ी आधारित अंतिम संस्कार के लिए सेवा शुल्क ₹3,500 है, जबकि लकड़ी की लागत परिवार को अलग से वहन करनी होगी.

गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों के लिए निःशुल्क सेवाएं

सेवा की भावना को बनाए रखते हुए, ईशा आउटरीच बांसघाट श्मशान में अंत्योदय अन्न योजना (AAY) कार्डधारकों को निःशुल्क अंतिम संस्कार सेवाएं प्रदान करता है. इससे यह सुनिश्चित होता है कि आर्थिक कठिनाई किसी के सम्मानजनक अंतिम विदाई के मार्ग में बाधा न बने.

पर्यावरण संबंधी उपाय

मौजूदा विद्युत भट्टियों का संचालन जारी रखते हुए, ईशा आउटरीच लकड़ी आधारित भट्टियों को एलपीजी आधारित भट्टियों में परिवर्तित करेगा. इस बदलाव से लकड़ी की खपत और वायु प्रदूषण में कमी आएगी और साथ ही पारंपरिक अंतिम संस्कार की पवित्रता भी बनी रहेगी.

ईशा आउटरीच का अनुभव

15 से अधिक वर्षों से ईशा आउटरीच तमिलनाडु सरकार के साथ साझेदारी में राज्य के श्मशानों का संचालन और रखरखाव करता आ रहा है. वर्तमान में यह 33 श्मशानों का प्रबंधन करता है और अब तक 1.25 लाख से अधिक अंतिम संस्कार संपन्न करा चुका है. पारदर्शी, पेशेवर और सेवाभावी सुविधाओं के माध्यम से, जो मृत्यु में भी गरिमा सुनिश्चित करने के लिए समर्पित हैं.

ईशा आउटरीच तमिलनाडु में अपने अधीन सभी श्मशानों में गरीबी रेखा से नीचे परिवारों को निःशुल्क अंतिम संस्कार सेवाएं प्रदान कर रहा है. यही सेवा अब पटना के बांसघाट श्मशान तक भी विस्तारित की गई है, जो यह दर्शाता है कि हर व्यक्ति को, चाहे उसकी आर्थिक स्थिति कैसी भी हो, सम्मानजनक अंतिम यात्रा मिले.

बिहार में विस्तार

बांसघाट श्मशान के अलावा, बिहार सरकार ने बेगूसराय (सिमरिया), भागलपुर, गया और सहरसा में भी श्मशान स्थल ईशा आउटरीच को सौंपे हैं, जबकि छपरा में स्थल आवंटन की प्रक्रिया अभी जारी है. फिलहाल ईशा आउटरीच ने केवल बांसघाट श्मशान का परिचालन दायित्व संभाला है. इन सभी श्मशानों का स्वामित्व बिहार सरकार के पास ही बना रहेगा.

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