दिल्ली की रोहिणी कोर्ट ने जेल में बंद गैंगस्टर संदीप उर्फ़ काला जठेड़ी को मानवीय आधार पर राहत देते हुए बुधवार (1 जुलाई) को 4 घंटे की कस्टडी पैरोल मंजूर की है. कोर्ट ने उसे अपनी पत्नी और नवजात जुड़वां बच्चों से मिलने के लिए 4 घंटे की कस्टडी पैरोल दी है.
काला जठेड़ी पुलिस की कड़ी सुरक्षा में अपनी पत्नी अनुराधा चौधरी और नवजात जुड़वा बेटियों से मुलाकात कर सकेगा.
जानकारी के मुताबिक काला जठेड़ी की पत्नी अनुराधा चौधरी ने मंगलवार (30 जून) को जुड़वा बेटियों को जन्म दिया है. काला जठेड़ी ने अपनी पत्नी और बच्चों से मिलने के लिए इजाजत मांगी थी. वो इस समय तिहाड़ जेल में बंद है. काला जठेड़ी को बुधवार (1 जुलाई) को गुरुग्राम ले जाया जाएगा, जहां उसकी पत्नी एक अस्पताल में भर्ती है.
पत्नी ने दिया जुड़वा बच्चियों को जन्मकाला जठेड़ी की तरफ से वकील रोहित कुमार दलाल ने पैरोल याचिका दायर की थी. याचिका में बताया गया कि आरोपी की पत्नी ने गर्भावस्था IVF प्रक्रिया के माध्यम से हुई थी, जिसकी अनुमति पहले ही सक्षम अदालत द्वारा दी जा चुकी थी. साथ ही यह भी बताया गया कि हाल ही में महिला को मेडिकल इमरजेंसी के चलते सिजेरियन डिलीवरी करानी पड़ी, जिसके बाद उसने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया.
डॉक्टरों की देखरेख में मां और नवजातप्रसव के दौरान अनुराधा चौधरी की तबीयत बिगड़ गई थी. मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों से तत्काल सत्यापन रिपोर्ट मांगी. रिपोर्ट में पुष्टि हुई कि आरोपी की पत्नी ने जुड़वां बच्चों को जन्म दिया है और वो अभी मेडिकल निगरानी में है, जबकि दोनों नवजात भी डॉक्टरों की देखरेख में हैं.
कोर्ट ने दिया 4 घंटे का समयइन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए कोर्ट ने मानवीय आधार पर आदेश दिया कि संदीप उर्फ काला जठेरी को 1 जुलाई 2026 को चार घंटे के लिए कस्टडी में रखते हुए पत्नी और डॉक्टरों से मिलने की अनुमति दी जाए. यह मुलाकात कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच कराई जाएगी. कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि यह निर्णय मानवीय आधार पर लिया गया है, जिसमें पारिवारिक संबंधों और मानवीय गरिमा को महत्व दिया गया है. हालांकि यह राहत सीमित समय के लिए है और आरोपी पूरी तरह पुलिस कस्टडी में रहेगा.
वकील रोहित कुमार दलाल ने कोर्ट में दलील दी कि यह एक असाधारण मामला है, जहां विवाह, IVF प्रक्रिया और बच्चे का जन्म तीनों ही न्यायिक निगरानी में हुए हैं. ऐसे में यह पैरोल उसी मानवीय दृष्टिकोण की निरंतरता है.कोर्ट ने साफ किया कि यह राहत पूरी तरह मानवीय आधार पर दी गई है. इसका उसके खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले या कोर्ट में विचाराधीन सुनवाई पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा.