Karka Sankranti: सनातन धर्म में संक्रांति का पर्व बड़ा ही विशेष माना जाता है. ये पर्व सूर्य देव को समर्पित किया गया है. संक्रांति सूर्य देव के गोचर से जुड़ा हुआ पर्व है. जब भी सूर्य देव एक राशि से दूसरी राशि में गोचर करते हैं. यानी उनका राशि परिवर्तन होता है, तो संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, अभी सूर्य देव बुध की राशि मिथुन में गोचर कर हैं, जब वो कर्क राशि में जाएंगे तो कर्क संक्रांति मनाई जाएगी.
कर्क संक्रांति के दिन भगवान सूर्य की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन पावन नदी में स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य अवश्य चढ़ाना चाहिए. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन सूर्य पूजन से आरोग्यता और सफलता का वरदान प्राप्त होता है. सूर्य देव के आशीर्वाद से सारे काम पूरे हो जाते हैं. द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल कर्क संक्रांति का पर्व 16 जुलाई को मनाया जाएगा. आइए इसके पुण्य और महा पुण्य काल का समय जानते हैं.
सूर्य के कर्क राशि में गोचर का समय ( Karka Sankranti 2026 Surya Gochar Time)कर्क राशि में 16 जुलाई को रात 11 बजकर 44 मिनट पर सूर्य देव गोचर कर जाएंगे. कर्क राशि में प्रवेश करते ही कर्क संक्रांति मनाई जाएगी. अगले एक माह तक सूर्य देव इसी राशि में रहेंगे.
कर्क संक्रांति पुण्य और महा पुण्य काल का समय ( Karka Sankranti 2026 Punya And Maha Punya Kaal Time)इस तरह से कर्क संक्रांति के दिन पुण्य का समय 06 घंटे 53 मिनट मिनट रहेगा और महा पुण्य काल का समय 02 घंटे 18 मिनट तक रहेगा.
कर्क संक्रांति का महत्व ( Karka Sankranti Significance)शास्त्रों के अनुसार कर्क संक्रांति के दिन उत्तरायण काल का अंत होता है और दक्षिणायन काल की शुरुआत हो जाती है. उत्तरायण और दक्षिणायन का समय छह-छह महीने रहता है. कर्क संक्रांति से शुरू हुआ दक्षिणायन का काल मंकर संक्रांति तक रहता है. सूर्य देव के कर्क से धनु के गोचर का समय दक्षिणायन काल का माना जाता है.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.