UP के नोएडा-बिजनौर, उत्तराखंड और अब मध्य प्रदेश… कहां तक फैला 'ई-रिक्शा हैकिंग' का जाल?
TV9 Bharatvarsh July 03, 2026 05:43 PM

E-rickshaw hacking: देश के कई राज्यों में ई-रिक्शा ड्राइवरों के सामने एक नई और गंभीर समस्या उभरकर सामने आई है. उत्तर प्रदेश के नोएडा, ग्रेटर नोएडा और बिजनौर से शुरू हुई शिकायतें अब उत्तराखंड और मध्य प्रदेश तक पहुंच चुकी हैं. अलग-अलग राज्यों से सामने आ रहे मामलों में एक जैसी शिकायत है कि चलते-चलते ई-रिक्शा अचानक बंद हो जाते हैं. ड्राइवरों का आरोप है कि कुछ शरारती तत्व मोबाइल ऐप के जरिए ई-रिक्शा की लिथियम बैटरी के बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) से छेड़छाड़ कर वाहन को रिमोट तरीके से बंद कर देते हैं. इसके बाद वाहन चालू कराने के नाम पर उनसे पैसे वसूले जाते हैं.

नोएडा और ग्रेटर नोएडा में बड़ी संख्या में ई-रिक्शा चालक इस समस्या से परेशान हैं. ड्राइवरों का कहना है कि पूरी तरह ठीक वाहन बिना किसी तकनीकी खराबी के अचानक सड़क पर बंद हो जाता है. ग्रेटर नोएडा वेस्ट के चालक रादिल खान के अनुसार, दोपहर में उनका ई-रिक्शा अचानक बंद हो गया और काफी कोशिश के बाद भी चालू नहीं हुआ. वहीं चालक राहुल कुमार ने बताया कि सूरजपुर से भंगेल जाते समय हल्द्वानी मोड़ के पास उनका रिक्शा अचानक रुक गया. इससे यात्रियों को बीच रास्ते उतरना पड़ा.

बिजनौर में 100 से ज्यादा ई-रिक्शे हुए लॉक

उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में यह समस्या और गंभीर रूप ले चुकी है. नगीना, बिजनौर और किरतपुर क्षेत्र में पिछले कुछ दिनों के दौरान 100 से अधिक ई-रिक्शे अचानक बंद होने की शिकायतें सामने आई हैं. पीड़ित ड्राइवरों का आरोप है कि कुछ लोग एक मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी लॉक कर देते हैं. किरतपुर में तो आरोप है कि वाहन बंद करने के बाद वही लोग उसे दोबारा चालू करने के बदले 200-200 रुपये तक वसूल रहे हैं. इस संबंध में पुलिस को लिखित शिकायतें भी दी गई हैं.

उत्तराखंड में भी विरोध प्रदर्शन

उत्तराखंड के काशीपुर और रामनगर में भी ई-रिक्शा ड्राइवरों ने इसी तरह की शिकायतें दर्ज कराई हैं. उनका कहना है कि चलते समय अचानक मोटर और हेडलाइट बंद हो जाती है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है. रामनगर में करीब 300 ई-रिक्शा ड्राइवरों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए प्रशासन को ज्ञापन सौंपा और इस कथित साइबर ठगी पर रोक लगाने की मांग की.

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उज्जैन में हाईटेक ठगी का खुलासा

मध्य प्रदेश के उज्जैन में भी इसी तरह का मामला सामने आया है. यहां आरोप है कि कुछ युवक देर रात सुनसान इलाकों में मोबाइल ऐप से ई-रिक्शा बंद कर देते थे और फिर खुद तकनीकी जानकार बनकर पहुंचते थे. कुछ ही मिनटों में वाहन चालू करने के नाम पर 200 से 300 रुपये वसूल लिए जाते थे. शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने क्राइम ब्रांच और स्थानीय थाना पुलिस की संयुक्त टीम गठित की है. इस मामले में एक 18 वर्षीय संदिग्ध को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है.

क्या है BAT-BMS ऐप?

तकनीकी विशेषज्ञों और सोशल मीडिया पर वायरल दावों के मुताबिक, इस पूरे मामले में ‘BAT-BMS’ नाम के मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया जा रहा है. कई सस्ते ई-रिक्शों में लगी चीन निर्मित स्मार्ट लिथियम बैटरियों में ब्लूटूथ आधारित बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) होता है. आरोप है कि यदि इस सिस्टम में पर्याप्त सुरक्षा नहीं है तो आसपास मौजूद व्यक्ति मोबाइल ऐप के जरिए बैटरी से कनेक्ट होकर उसकी पावर सप्लाई बंद कर सकता है. हालांकि, तकनीकी विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि हर बैटरी को इस तरह नियंत्रित करना संभव नहीं होता और यह संबंधित बैटरी के सुरक्षा फीचर्स पर निर्भर करता है. इसलिए सभी मामलों में एक ही तकनीक इस्तेमाल होने की पुष्टि अभी नहीं हुई है.

ड्राइवरों में बढ़ी चिंता

लगातार सामने आ रही घटनाओं ने ई-रिक्शा ड्राइवरों की चिंता बढ़ा दी है. कई संगठनों ने प्रशासन, साइबर सेल और परिवहन विभाग से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने, बैटरी निर्माताओं की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और इस तरह की कथित डिजिटल ठगी करने वाले गिरोहों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है.

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