हर साल 50 लाख से ज्यादा कार बना रहा भारत, दुनिया में पहली पसंद, अमेरिका भी छूट गया पीछे
TV9 Bharatvarsh July 04, 2026 12:43 PM

मारुति सुजुकी ने हाल ही में ₹35,000 करोड़ की लागत से बने खरखोदा प्लांट का उद्घाटन किया है. हरियाणा में बने इस प्लांट की सालाना क्षमता 10 लाख कार बनाने की है और जब यह पूरी क्षमता के साथ काम करेगा तब यह दुनिया के सबसे बड़े वाहन बनाने वाले प्लांट में से एक होगा. मारुति ने इस प्लांट से कंपनी के सालाना 40 लाख यूनिट बनाने के लक्ष्य को हासिल करने में बड़ी मदद मिलने की उम्मीद है.

दुनियाभर में ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरिंग का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. कई विकसित देशों में कारों की मांग कम हो रही है, उत्पादन लागत बढ़ रही है, सप्लाई चेन में दिक्कतें आ रही हैं और प्रदूषण से जुड़े नियम पहले से ज्यादा सख्त हो गए हैं. इन वजहों से बड़ी ऑटोमोबाइल कंपनियां अब यह तय कर रही हैं कि भविष्य में उन्हें अपनी गाड़ियां कहां और कैसे बनानी चाहिए. इस बदलते दौर में भारत दुनिया के उन चुनिंदा बड़े बाजारों में शामिल हो गया है, जहां लगातार मांग बढ़ रही है और बड़े स्तर पर वाहन बनाने की क्षमता भी मौजूद है.

कार मैन्युफैक्चरिंग हब बना इंडिया

आज भारत वाहनों की बिक्री के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा बाजार और वाहन उत्पादन के मामले में चौथा सबसे बड़ा देश है. मजेदार बात ये है कि भारत में पैसेंजर वाहनों यानी कार निर्माण के मामले में चीन और जापान के बाद तीसरे नंबर पर है. OICA के 2025 के आंकड़ों के अनुसार, चीन ने करीब 3.03 करोड़ कारों का उत्पादन किया. इसके बाद जापान 72 लाख कारों के साथ दूसरे स्थान पर रहा. वहीं भारत ने 54 लाख यात्री कारों का उत्पादन कर तीसरा स्थान हासिल किया.

अमेरिका और जर्मनी को छोड़ा पीछे

कई दशकों तक जापान, जर्मनी, अमेरिका, फ्रांस और स्पेन जैसे देश कारों के उत्पादन में सबसे आगे रहे, लेकिन 2025 के OICA के आंकड़े बताते हैं कि अब तस्वीर बदल चुकी है. चीन दुनिया में सबसे ज्यादा यात्री कारें बनाने वाला देश बन गया है, जबकि भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा पैसेंजर कार मैन्युफैक्चरिंग हब बनकर उभरा है. भारत की उपलब्धि भी काफी महत्वपूर्ण रही है. आंकड़ों के अनुसार, 2019 से 2025 के बीच भारत में यात्री कारों का उत्पादन करीब 48% बढ़ा, जिससे भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते बड़े कार निर्माण बाजारों में शामिल हो गया है. यह रफ्तार चीन से भी ज्यादा है.

भारत में हर साल बनती हैं इतनी कारें

भारत की इस तेज रफ्तार के पीछे कई बड़े कारण हैं. देश में पैसेंजर वाहनों की मांग लगातार बढ़ रही है, खासकर SUV की लोकप्रियता में तेजी आई है. इसके अलावा भारतीय ऑटो कंपनियों ने अपनी मैन्युफैक्चरिंग क्वालिटी में सुधार किया है और विदेशों में वाहनों का निर्यात भी लगातार बढ़ा है. SIAM के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत में पैसेंजर वाहनों (कार, SUV और वैन) की घरेलू बिक्री सालाना आधार पर 7.9% बढ़कर 46,43,439 यूनिट हो गई. वहीं, पैसेंजर वाहनों का निर्यात भी 17.5% की मजबूत बढ़ोतरी के साथ 9,05,200 यूनिट पर पहुंच गया.

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