ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर में पहले हिंदू मंदिर का सपना टूटा, चर्च और मुस्लिम समूह को मिली जमीन
TV9 Bharatvarsh July 04, 2026 02:43 PM

ब्रिटेन के कैम्ब्रिजशायर में पहला हिंदू मंदिर बनाने की योजना को बड़ा झटका लगा है. यहां के साउथ कैम्ब्रिजशायर डिस्ट्रिक्ट काउंसिल ने मंदिर के लिए मांगी गई जमीन हिंदू संगठन को देने के बजाय चर्च के नेतृत्व वाले एक प्रोजेक्ट को देने का फैसला किया है. यह जमीन 999 साल की लीज पर दी जाएगी. इस प्रोजेक्ट में चर्च के साथ-साथ स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए नमाज की जगह और एक शिक्षा केंद्र भी बनाया जाएगा.

नॉर्थस्टो शहर के स्थानीय लोगों ने हिंदू समाज नॉर्थस्टो (HSN) नाम से एक चैरिटी बनाई थी. इस संगठन ने उस जमीन पर हिंदू मंदिर के साथ एक इंटरफेथ और वेलनेस सेंटर बनाने का प्रस्ताव दिया था. लेकिन काउंसिल ने प्रस्तावों की जांच के बाद HSN को 65% अंक दिए, जबकि नॉर्थस्टो चर्च नेटवर्क (NCN) को 81% अंक मिले. इसी आधार पर जमीन NCN को दे दी गई. NCN की योजना में स्थानीय मुस्लिम समुदाय के लिए एक स्थायी इस्लामिक प्रार्थना कक्ष और शिक्षा केंद्र भी शामिल है. नॉर्थस्टो मुस्लिम समुदाय का कहना है कि शहर में 200 से ज्यादा मुस्लिम रहते हैं और उन्हें पांचों वक्त की नमाज के लिए स्थायी जगह की जरूरत है.

स्थानीय हिंदू समुदाय काफी निराश

इस फैसले से स्थानीय हिंदू समुदाय काफी निराश है. HSN की अध्यक्ष अपर्णा निगम-सक्सेना ने कहा कि उन्हें इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल हैं. उनका कहना है कि संगठन को वित्तीय रिकॉर्ड कम होने के कारण कम अंक दिए गए, लेकिन पहले यह नहीं बताया गया था कि यह मूल्यांकन का इतना अहम हिस्सा होगा. उन्होंने कहा कि अगर पहले से साफ दिशा-निर्देश मिलते, तो वे सभी जरूरी दस्तावेज और आर्किटेक्ट की रिपोर्ट तैयार कर सकते थे. HSN अब इस फैसले के खिलाफ अपील करने पर विचार कर रहा है.

कैम्ब्रिजशायर में कई चर्च और मस्जिदें हैं, लेकिन एक भी हिंदू मंदिर नहीं है. यहां रहने वाले हिंदू परिवारों को पूजा करने के लिए बर्मिंघम या लंदन के वेम्बली तक करीब दो घंटे का सफर करना पड़ता है. स्थायी मंदिर नहीं होने के कारण गणेश उत्सव, महाशिवरात्रि और हवन जैसे धार्मिक कार्यक्रम ठीक से नहीं हो पाते. कई बार पूजा की मूर्तियों को बैग या गैराज में रखना पड़ता है, जिससे उनके खराब होने का खतरा रहता है.

संस्कृति से दूर हो रही नई पीढ़ी

नॉर्थस्टो में रहने वाली 16 साल की एयवा ने कहा कि उन्होंने कभी पूरी रात चलने वाली महाशिवरात्रि या हवन जैसे धार्मिक कार्यक्रमों में हिस्सा नहीं लिया. उनका कहना है कि भारत में रहने वाले उनके रिश्तेदार अपने त्योहार पूरे उत्साह से मनाते हैं, लेकिन ब्रिटेन में रहने वाली नई पीढ़ी धीरे-धीरे अपनी संस्कृति और धार्मिक परंपराओं से दूर होती जा रही है.

वहीं, काउंसिल की सदस्य डॉ. लिसा रेडरप ने फैसले का बचाव किया. उन्होंने कहा कि सभी आवेदनों का मूल्यांकन पहले से तय नियमों और समान मानदंडों के आधार पर किया गया. उनके अनुसार, हर संगठन को अपने प्रोजेक्ट की जरूरत, वित्तीय तैयारी और धार्मिक आवश्यकताओं की पूरी जानकारी देना जरूरी था, और उसी आधार पर अंतिम फैसला लिया गया.

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