भारत सरकार ने कच्चे तेल की आयात घटाने और पुरे देश में बढ़ते प्रदुषण को कम करने के लिए पेट्रोल-डीजल का प्रयोग धीरे-धीरे कम कर दिया है. अब हर पंप पर पेट्रोल में एथेनॉल को मिक्स करके दिया जा रहा है. जबकि भविष्य में एथेनॉल से ही गाड़ियां चलेंगी क्योंकि सरकार इसपर बहुत तेजी से काम कर रही है. लेकिन लोगों का मानना है E20 फ्यूल यूज्ड कार यानी पुरानी गाड़ियों के बाजार को खत्म कर देगी.
बता दें कि, 2023 से पहले बनी गाड़ियां E20 फ्यूल के हिसाब से डिज़ाइन नहीं हुई थी. तो चलिए समझते हैं बेहद आसान भाषा में कि क्या भविष्य में E20 फ्यूल से यूज्ड कारों पर क्या असर पड़ेगा और क्या सच में पुरानी कारों का बाजार ही खत्म हो जाएगा.
बता दें कि, E20 पेट्रोल के आने के बाद से पुरानी गाड़ियों के मालिकों के सामने जो सबसे बड़ी चुनौती आई है, वो है माइलेज की. हाल ही में एक में पता चला है कि साल 2023 से पहले की गाड़ियों में करीब 10 से 15 फीसदी तक माइलेज गिर गया है. क्योंकि इथेनॉल में नॉर्मल पेट्रोल के मुकाबले कम एनर्जी होती है.
इसके अलावा इथेनॉल हवा से नमी सोखता है जिससे पुरानी कारों के मेटल फ्यूल टैंक, पाइप और इंजेक्टर्स में जंग लगने का खतरा दोगुना हो गया है. इंजन के रबर पार्ट्स और सील भी जल्दी खराब हो रहे हैं जिससे लोगों का मेंटेनेंस का बजट हर साल 5 से 10 हजार रुपये तक बढ़ रहा है.
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E20 पेट्रोल फ्यूल आने से सबसे बड़ा झटका यूज्ड कार मार्केट में गाड़ियों की रीसेल वैल्यू को लगा है. जो लोग पुरानी पेट्रोल कार खरीदने की सोच रहे थे वे अब पीछे हैट रहे हैं. बता दें कि, बाजार में 2023 से पहले की लांच गाड़ियों में पेट्रोल गाड़ियों की डिमांड अब धीरे-धीरे कम हो गईं हैं.
जिसकी वजह से डीलर्स को उनके दाम कम करने पड़ रहे हैं. जबकि दूसरी तरफ 2023 के बाद की गाड़ियाँ जो कंपनी से ही E20 कम्पैटिबल होकर आई हैं उनकी रीसेल वैल्यू काफी मजबूत बनी हुई है और लोग उन्हें हाथों-हाथ खरीद भी रहे हैं.
E20 पेट्रोल के बढ़ते चलन के बाद अब सभी के दिमाग में यह सवाल जरूर चल रहा है क्या खत्म हो जाएगा पुरानी गाड़ियों का मार्केट. तो इसका जवाब है नहीं. क्योंकि, यह बाजार कभी खत्म नहीं होगा. भारत का यूज्ड कार मार्केट बहुत बड़ा है. शुरुआत में जो डर दिख रहा है वो धीरे-धीरे कम हो जाएगा क्योंकि लोकल मैकेनिक्स और कंपोनेंट मार्केट ने इसका तोड़ ढूंढना शुरू कर दिया है.
बाजार में अब ऐसे फ्यूल एडिटिव्स आने लगे हैं जिन्हें पेट्रोल में डालने से इथेनॉल का बुरा असर कम हो जाता है. साथ ही पुराने रबर पाइप्स को नए मटीरियल से बदला जा रहा है जिससे गाड़ियाँ इस फ्यूल को झेलने के लायक बन रही हैं.
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