प्रेमी को हुई 14 साल की जेल, पर प्रेमिका ने नहीं छोड़ा साथ… रिहा होने तक किया इंतजार, दिल खुश कर देगी ये रियल लव स्टोरी
TV9 Bharatvarsh July 05, 2026 11:43 AM

Manikanth Parappana Agrahara Jail: कहते हैं कि गुस्सा इंसान का सबसे बड़ा दुश्मन होता है. पल भर का क्रोध हंसती-खेलती जिंदगी को किस तरह तबाह कर सकता है, मणिकांत इसका जीवंत उदाहरण हैं. एक आकस्मिक हत्या के मामले में अपनी जवानी के 14 बहुमूल्य साल जेल की कालकोठरी में बिताने के बाद मणिकांत आज जमानत पर रिहा हुए हैं. जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने जो आपबीती साझा की, वह न सिर्फ उनके जीवन के संघर्ष को बयां करती है, बल्कि यह भी दिखाती है कि कैसे एक युवती के अटूट प्यार और वफादारी ने उन्हें जेल के भीतर भी टूटने नहीं दिया.

मणिकांत की यह कहानी जितनी अपराध और सुधार की है, उससे कहीं ज्यादा एक प्रेमिका के अनमोल और निस्वार्थ प्रेम की है. मणिकांत जब एक हत्या के मामले में आरोपी बनकर जेल की सलाखों के पीछे पहुंचे, तो हर किसी ने मान लिया था कि अब उनका जीवन समाप्त हो चुका है. जेल जाने से पहले वह एक युवती से बेहद प्यार करते थे.

आम तौर पर ऐसे मामलों में लोग दूरियां बना लेते हैं, लेकिन उस युवती ने ऐसा नहीं किया. अपने प्रेमी पर हत्या का दाग लगने और 14 साल की लंबी सजा मिलने के बावजूद, उसने मणिकांत का हाथ नहीं छोड़ा. वह सालों तक समाज के तानों को सहते हुए सिर्फ मणिकांत की रिहाई का इंतजार करती रही.

2017 में पैरोल पर आए, तो मंदिर में रचाई शादी; अब 7 साल का है बेटा

लड़की के इस निश्छल और अटूट प्यार का मणिकांत ने भी पूरा सम्मान किया. साल 2017 में जब मणिकांत को कुछ समय के लिए जेल से पैरोल (Parole) मिली, तो उन्होंने बिना कोई समय गंवाए अपने घर के मंदिर में उसी युवती के साथ सात फेरे लिए और उसे अपनी पत्नी बनाया. आज इस दंपति का एक 7 साल का बेटा है, जो फिलहाल पहली कक्षा (1st Standard) में पढ़ाई कर रहा है. मणिकांत का कहना है कि उनकी पत्नी के विश्वास ने ही उन्हें जेल की प्रताड़ना के बीच भी जिंदा रखा.

जेल की बेकरी में किया 10 साल काम: ‘वहां मैंने सब कुछ खो दिया’

परप्पना अग्रहारा जेल के अपने अनुभवों को याद करते हुए मणिकांत भावुक हो गए. उन्होंने बताया कि कारावास ने उनकी पूरी सोच और व्यक्तित्व को बदल कर रख दिया. मणिकांत ने कहा, “मुझे कानून की कोई खास जानकारी नहीं थी. गुस्से के एक आत्मघाती पल में मुझसे वह गलती हो गई, जिसकी कीमत मुझे 14 साल जेल में रहकर चुकानी पड़ी.” जेल में खुद को सकारात्मक रखने के लिए मणिकांत ने वहां की बेकरी में काम करना शुरू किया. उन्होंने लगभग 10 साल तक जेल की बेकरी में अपनी सेवाएं दीं.

ये भी पढ़ें: केतन अग्रवाल के परिवार पर फिर टूटा दुखों का पहाड़, अब दादा का निधन पोते की मौत से सदमे में थे

उन्होंने दर्द बयां करते हुए कहा कि जेल में रहने के दौरान उन्हें समझ आया कि माता-पिता और पूरे परिवार के बिना जीना कितना बड़ा नरक है. वहां उन्होंने अपना सब कुछ खो दिया था.

मणिकांत की आज की युवा पीढ़ी को बड़ी सलाह

जेल से रिहा होने के बाद मणिकांत ने आज के युवाओं को एक बेहद महत्वपूर्ण संदेश दिया है. बोले- कभी भी क्रोध के वश में आकर कोई कदम मत उठाओ. गुस्से में डूबे हाथ को कभी सलाह नहीं देनी चाहिए, क्योंकि उस वक्त इंसान अंधा हो जाता है. जिंदगी में हर चीज को सिर्फ प्रेम और शांति से ही जीता जा सकता है. अगर आप गुस्से में बह गए, तो आपको सिर्फ कारावास की सजा भुगतनी पड़ेगी. आप अपना कीमती समय, अपनी जवानी और अपने माता-पिता का अनमोल प्यार हमेशा के लिए खो देंगे.” मणिकांत ने अंत में बेहद भावुक होकर कहा कि अब वह अपने अतीत को पीछे छोड़कर, अपनी वफादार पत्नी और बेटे के साथ एक बेहद शांत, गरिमापूर्ण और नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रहे हैं.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.