तेहरान में खामनेई की अंतिम विदाई: लाखों लोगों की भागीदारी और राजनीतिक संदेश
newzfatafat July 06, 2026 04:42 PM

ईरान की राजधानी तेहरान में शनिवार को पूर्व सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामनेई को अंतिम विदाई देने के लिए लाखों लोगों की भीड़ जुटी। ग्रैंड मुसल्ला से लेकर अंतिम यात्रा के मार्ग तक लोगों की भारी संख्या देखी गई। काले कपड़े पहने पुरुष, महिलाएं, बुजुर्ग और युवा सभी ने अंतिम दर्शन के लिए भाग लिया। शिया परंपरा के अनुसार शोक व्यक्त करते हुए लोग मातम मना रहे थे और लब्बैक या खामनेई, अमेरिकी मुर्दाबाद और इजराइल मुर्दाबाद जैसे नारे लगा रहे थे। पूरे तेहरान में राष्ट्रीय शोक का माहौल था। अंतिम यात्रा में आम नागरिकों के साथ-साथ ईरान के शीर्ष राजनीतिक, सैन्य और धार्मिक नेताओं के अलावा कई देशों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने सभी विदेशी प्रतिनिधियों और संवेदनाएं व्यक्त करने वाले देशों का धन्यवाद करते हुए कहा कि कठिन समय में ईरान के साथ खड़े रहने वाले मित्र देशों का समर्थन हमेशा याद रखा जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी जनता अपने नेताओं की शहादत को कभी नहीं भूलेगी और अपने देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय सम्मान की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेगी। 


अभूतपूर्व भीड़ और राजनीतिक संकेत

खामनेई की अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। हाल के समय में यह कयास लगाए जा रहे थे कि ईरान में सैन्य दबाव, आर्थिक प्रतिबंधों और आंतरिक असंतोष के चलते विद्रोह भड़क सकता है। लेकिन अंतिम यात्रा में दिखाई दी भीड़ ने एक अलग तस्वीर पेश की। कई विश्लेषक इसे खामनेई के समर्थकों और सत्ता प्रतिष्ठान के बीच एकजुटता का संकेत मानते हैं। ईरान और पश्चिमी देशों के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। अमेरिका और इजराइल पर आरोप लगते रहे हैं कि वे ईरान की सत्ता व्यवस्था को कमजोर करने का प्रयास कर रहे हैं। खामनेई की हत्या और उसके बाद अंतिम यात्रा में उमड़ी भीड़ ने घटनाक्रम को नया राजनीतिक आयाम दिया है। 


बाहरी दबाव का सामना करने की भावना

ईरान के भीतर अब यह भावना और मजबूत होती दिखाई दे रही है कि देश बाहरी दबाव का सामना एकजुट होकर करेगा। जानकार मानते हैं कि इस घटनाक्रम का असर क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है। ईरान के भीतर बदले की मांग तेज हो सकती है और सरकार पर जवाबी कार्रवाई का दबाव बन सकता है। हालांकि, भविष्य में ईरान क्या कदम उठाएगा यह उसके नए नेतृत्व और सुरक्षा रणनीति पर निर्भर करेगा। लेकिन यह निश्चित है कि खामनेई की मौत ने मध्य पूर्व की राजनीति को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। उनकी अंतिम यात्रा ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल धार्मिक या राजनीतिक अंतिम संस्कार नहीं था, बल्कि शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक संदेश का भी एक बड़ा मंच बन गया। लाखों लोगों की मौजूदगी ने यह संकेत दिया कि ईरान इस घटना को केवल एक नेता के रूप में नहीं बल्कि अपने राष्ट्रीय सम्मान और संप्रभुता से जुड़े मुद्दे के रूप में देख रहा है। 


अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों की भागीदारी

ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामनेई की अंतिम विदाई में दुनिया के कई देशों की अभूतपूर्व भागीदारी देखने को मिली। विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची ने बताया कि 70 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने तेहरान पहुंचकर खामनेई को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि यह केवल एक अंतिम संस्कार समारोह नहीं था, बल्कि ईरान और अन्य देशों के बीच रिश्तों का महत्वपूर्ण संदेश था। अरागची ने विशेष रूप से अरब देशों के प्रतिनिधियों का जिक्र करते हुए कहा कि उनके भाईचारे और सम्मान के लिए ईरान उनका आभारी है। 


समारोह में शामिल देशों की सूची

विदेश मंत्री ने कहा कि यह ऐतिहासिक अवसर हमारे आपसी संबंधों के इतिहास में हमेशा के लिए याद रखा जाएगा। समारोह में तुर्कमेनिस्तान, इराक, अर्मेनिया, ताजाकिस्तान, पाकिस्तान, कुर्दिस्तान क्षेत्र, अजरबैजान, बांग्लादेश, उज़्बेकिस्तान, बेलारूस, किरगिस्तान, निकारागुआ, कांगो, बुर्किनाफासो, मिस्र, ओमान, तुर्की, सऊदी अरब और रूस समेत कई देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसके अलावा भारत का प्रतिनिधिमंडल भी खामनेई के अंतिम संस्कार समारोह में शामिल हुआ। इन देशों की मौजूदगी को ईरान के साथ उनके कूटनीतिक संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग का संकेत माना जा रहा है। विशेष रूप से सऊदी अरब और अन्य अरब देशों की भागीदारी ने भी ध्यान खींचा। हाल के वर्षों में ईरान और कई अरब देशों के बीच संबंधों में सुधार देखने को मिला है। 


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