AI के दुरुपयोग पर लगेगा लगाम, आएगा सख्त कानून… सरकार कर रही है विचार
TV9 Bharatvarsh July 06, 2026 05:42 PM

सोशल मीडिया और साइबर क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के गलत इस्तेमाल पर लगाम लगाने के लिए केंद्र सरकार नया कानून लाने की तैयारी में है. सरकार का मानना है कि मौजूदा कानून AI के दुरुपयोग रोकने के लिए सक्षम नहीं है और इसके लिए एक नया कानून जरूरी है.

सूचना एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (IT) के सचिव एस.कृष्णन के मुताबिक मौजूदा कानून डीपफेक और लेबलिंग से निपटने में सक्षम हैं, लेकिन तमाम नई चुनौतियां सामने आ रही हैं. इनमें एआई की प्राथमिक भूमिका है जिसके लिए नया कानून बनाए जाने पर विचार चल रहा है. IT सचिव के मुताबिक AI के नियमन के लिए नया कानून बनाए जाने पर इसलिए विचार शुरु हुआ, क्योंकि मौजूदा कानून रोजाना सामने आ रही नई चुनौतियों से निपटने में सक्षम नहीं है. फिलहाल विशेषज्ञों से इस पर विचार विमर्श चल रहा है.

AI से निपटने के लिए नया कानून जरूरी

AI मामलों के जानकार और विशेषज्ञ संदीप बुदकी के मुताबिक AI से निपटने के लिए नया कानून जरूरी है. अगर इसमें देरी की गई तो भारत में लोगों को विभिन्न स्तरों पर परेशानी का सामना करना पड़ेगा. बुदकी के मुताबिक मौजूदा कानूनी ढांचा इसलिए अधूरा साबित हो रहा है, क्योंकि पारंपरिक कानून इंसानी व्यवहार को ध्यान में रखकर बनाए गए थे, ना कि स्वायत्त मशीनों यानी AI के मद्देनजर. उन्होंने कहा कि कई पहलुओं पर सटीक कानून जरूरी है.

जवाबदेही और उत्तरदायित्व

‘ब्लैक बॉक्स’ समस्या- AI एल्गोरिदम किसी निर्णय तक कैसे पहुंचे, इसे कोडर्स के लिए भी समझ पाना मुश्किल होता है. ऐसे में दुर्घटना होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी AI डेवलपर की, यूजर की या खुद AI की. यह कानून में स्पष्ट नहीं है या तय नहीं है.

स्वायत्त निर्णय- यदि कोई AI-संचालित मेडिकल रोबोट गलत सर्जरी कर दे या सेल्फ-ड्राइविंग कार दुर्घटना कर दे, तो मौजूदा आपराधिक कानून (जैसे भारतीय न्याय संहिता) किसी मशीन को ‘सजा’ नहीं दे सकते.

बौद्धिक संपदा अधिकार और कॉपीराइट

मशीनी रचनाकार- दुनिया भर के कॉपीराइट कानून केवल इंसानी रचनाकारों को मान्यता देते हैं. AI द्वारा स्वायत्त रूप से बनाई गई पेंटिंग, संगीत या कोड का मालिक कौन होगा इस पर कानून मौन है.

डेटा की चोरी- AI मॉडल को प्रशिक्षित करने के लिए इंटरनेट से करोड़ों कॉपीराइट सामग्री (लेख, तस्वीरें) बिना अनुमति के स्क्रैप की जा रही हैं. मौजूदा कानून उचित उपयोग और उल्लंघन के बीच स्पष्ट अंतर नहीं कर पा रहे हैं.

कानूनी और अदालती धोखाधड़ी

फर्जी कानूनी संदर्भ- हाल ही में अदालतों में वकीलों द्वारा AI (जैसे ChatGPT) से तैयार किए गए ऐसे कानूनी फैसलों के उदाहरण पेश किए गए जो वास्तव में कभी हुए ही नहीं थे.

न्यायपालिका का रुख- भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा है कि बिना सत्यापन के AI-जनित नकली फैसलों का उपयोग करना पेशेवर कदाचार माना जाएगा और AI का उपयोग केवल सहायता के लिए हो सकता है, निर्णय लेने के लिए नहीं.

डीपफेक और भ्रामक जानकारियां

पहचान की चोरी- किसी व्यक्ति की आवाज या चेहरे का क्लोन बनाकर वित्तीय धोखाधड़ी या छवि खराब करने वाले डीपफेक वीडियो बनाना AI से बेहद आसान हो गया है.

धीमी कानूनी प्रक्रिया- AI एक्ट और मानहानि के कानून मौजूद हैं, लेकिन डीपफेक इतनी तेजी से फैलते हैं कि जब तक कानूनी कार्रवाई शुरू होती है, तब तक सामाजिक या राजनीतिक नुकसान हो चुका होता है.

एल्गोरिथमिक पूर्वाग्रह और भेदभाव– AI मॉडल पुराने डेटा पर सीखता है, जिसमें नस्लीय, लैंगिक या सामाजिक पूर्वाग्रह हो सकते हैं. जब बैंक ऋण देने या कंपनियां नौकरी पर रखने के लिए एआई स्क्रीनिंग टूल का उपयोग करती हैं, तो AI छिपे हुए तरीकों से भेदभाव करता है. पारंपरिक मानवाधिकार और समानता के कानून इस डिजिटल भेदभाव को पकड़ने में असमर्थ हैं.

गोपनीयता और सामूहिक निगरानी

फेशियल रिकग्निशन (चेहरा पहचानने वाली तकनीक) के जरिए सरकारों और निजी कंपनियों द्वारा सामूहिक निगरानी की जा रही है.

भारत का डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (डीएपी) एक्ट 2023 व्यक्तिगत डेटा को तो सुरक्षित करता है, लेकिन यह AI द्वारा डेटा को प्रोसेस करके निकाले जाने वाले निष्कर्षों और AI प्रोफाइलिंग को पूरी तरह से नियंत्रित नहीं करता है.

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