Badrinath Temple: बदरीनाथ मंदिर में 2 जुलाई को दान-पात्रों की गिनती के दौरान कथित हेराफेरी और चोरी के आरोपों की जांच अब तेज हो गई है. बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) सोहन सिंह रांगड़ द्वारा गठित चार सदस्यीय विभागीय जांच समिति अगले दो दिनों में बदरीनाथ पहुंचकर जांच शुरू करेगी. जांच पूरी होने के बाद समिति अपनी रिपोर्ट सीईओ को सौंपेगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. सीईओ ने बताया कि जांच समिति में विधि अधिकारी, वित्त नियंत्रक, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी (केदारनाथ) को शामिल किया गया है.
कर्मचारियों से मांगा गया स्पष्टीकरणमामला सामने आने के बाद सीईओ ने दान गिनती में शामिल अध्यक्ष के सरकारी पीए समेत अन्य कर्मचारियों से लिखित स्पष्टीकरण मांगा था. इसकी समय-सीमा सोमवार देर रात समाप्त हो रही है. अधिकारियों का कहना है कि यदि संबंधित कर्मचारी निर्धारित समय तक जवाब नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी.
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सीईओ सोहन सिंह रांगड़ ने स्पष्ट किया कि जांच समिति की रिपोर्ट में यदि किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका संदिग्ध पाई जाती है तो नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाएगी. जरूरत पड़ने पर आरोपी कर्मचारी या अधिकारी की आय और संपत्ति की भी जांच कराई जा सकती है.
कैसे होती है बदरीनाथ मंदिर में दान की गिनती?सीईओ ने बताया कि मंदिर के गर्भगृह के भीतर दो और बाहर तीन, कुल पांच दान-पात्र स्थापित हैं. इनके भरने पर मंदिर अधिकारी को सूचना दी जाती है. इसके बाद मंदिर अधिकारी और प्रभारी अधिकारी की मौजूदगी में दान-पात्रों को निर्धारित स्थान पर ले जाकर सीसीटीवी कैमरों की निगरानी में नकदी की गिनती की जाती है.
गिनती के दौरान अधिकारियों की निगरानी रहती है और अंत में बैंक कर्मचारियों को बुलाकर पूरी राशि उनके सुपुर्द की जाती है. बैंक से प्राप्त रसीद लेने के बाद प्रक्रिया पूरी होती है. इस पूरी व्यवस्था में इच्छुक श्रद्धालु भी दान की गणना में सहयोग करते हैं.
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पीए की नियुक्ति और जिम्मेदारियों पर उठे सवालविवाद के बाद अध्यक्ष के सरकारी पीए की नियुक्ति और पदोन्नति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. जानकारी के अनुसार, वर्ष 2014 में उनकी नियुक्ति इंटरनेट कोऑर्डिनेटर के एकल पद पर हुई थी. बाद में वर्ष 2018 में उन्हें वैयक्तिक सहायक (पीए) बना दिया गया, जबकि यह सीधी भर्ती का पद माना जाता है. वर्ष 2023 में सेवा नियमावली में संशोधन के बाद उनके लिए जनसंपर्क विशेष अधिकारी बनने का रास्ता भी खोला गया. सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अध्यक्ष के निजी सहायक होने के बावजूद उन्हें मंदिर के दान-पात्रों की नकदी गिनने जैसी संवेदनशील जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई.
मामले को लेकर बढ़ा जनाक्रोश, निष्पक्ष जांच की मांगदान गिनती में कथित हेराफेरी के आरोपों के बाद बदरीनाथ क्षेत्र में लोगों का आक्रोश लगातार बढ़ रहा है. ब्रह्मकपाल तीर्थ पुरोहित पंचायत समिति के अध्यक्ष उमेश सती ने मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग की है. उनका कहना है कि मंदिर समिति और दान व्यवस्था को लेकर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं, जिनकी भी जांच होनी चाहिए. वहीं कांग्रेस के पूर्व प्रवक्ता कमल रतूड़ी ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि केदारनाथ मंदिर में सोना चोरी के आरोपों के बाद अब बदरीनाथ में दान गिनती विवाद सामने आया है. उन्होंने पूरे मामले की एसआईटी जांच कराने की मांग की.
अध्यक्ष की शक्तियां फ्रीज करने और संपत्ति जांच की मांगकांग्रेस नेताओं दिगंबर बिष्ट और प्रकाश नेगी ने मांग की है कि जांच पूरी होने तक बीकेटीसी अध्यक्ष को इस प्रक्रिया से अलग रखा जाए, क्योंकि आरोप उनके सरकारी पीए पर लगे हैं. उधर उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) के नेता वृजमोहन सजवाण ने बीकेटीसी के सीईओ को ज्ञापन सौंपकर आरोपी निजी सचिव को तत्काल निलंबित करने, उच्चस्तरीय जांच कराने, दान-पात्रों और गणना स्थलों की सीसीटीवी फुटेज सार्वजनिक करने, वीआईपी दर्शन से प्राप्त आय का ब्यौरा जारी करने तथा मंदिर समिति के अधिकारियों की संपत्ति की जांच कर उसे सार्वजनिक करने की मांग की है.