चंपत और मिश्रा का इस्तीफा 'वित्तीय गबन' की स्वीकारोक्ति, न्यायालय की निगरानी में हो जांच: कांग्रेस
Navjivan Hindi July 07, 2026 02:43 AM

कांग्रेस ने सोमवार को राम मंदिर ट्रस्ट के चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार करने को वित्तीय गबन की स्वीकारोक्ति करार दिया और आरोप लगाया कि केवल कुछ लोगों के हटने से मामला खत्म नहीं हो जाता। कांग्रेस ने कहा कि पूरे ट्रस्ट को भंग कर इस प्रकरण की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में जांच कराई जानी चाहिए।

कांग्रेस के मीडिया एवं प्रचार विभाग के प्रमुख पवन खेड़ा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, "चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे मंजूर‌ करके राम मंदिर ट्रस्ट ने पूरी तरह यह स्वीकार कर लिया है कि पिछले एक महीने से देश को हिला देने वाली 'चंदा चोरी' की रिपोर्टें वाकई सत्य हैं। यह स्वागत योग्य खबर है कि प्रभु राम के पावन मंदिर से वे लोग हटाए जा रहे हैं जो वर्षों तक इसे लूटते रहे। लेकिन यह पर्याप्त नहीं है।

पवन खेड़ा ने कहा कि हास्यास्पद बात यह है कि यह घोषणा ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष द्वारा की गई - वही व्यक्ति जिस पर इसके वित्त की निगरानी, पारदर्शिता सुनिश्चित करने और इसकी संपत्तियों की रक्षा करने का दायित्व होता है। वह अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकता, और न ही ट्रस्ट का कोई अन्य सदस्य इस दायित्व से किनारा कर सकता है, जिनकी देखरेख में इतना बड़ा रैकेट वर्षों तक फलता-फूलता रहा।"

पवन खेड़ा ने आगे कहा, "मूर्खता यहीं समाप्त नहीं होती। आरएसएस के पूर्वी उत्तर प्रदेश प्रभारी कृष्णमोहन को राम मंदिर ट्रस्ट का महासचिव नियुक्त कर दिया गया है, जबकि खुद उन पर इस घोटाले को दबाने में भूमिका के आरोप हैं। उन्हें बड़े दायित्व से पुरस्कृत करने के बजाय ट्रस्ट से बाहर का रास्ता दिखाया जाना चाहिए था। देश टुकड़ों-टुकड़ों में इस्तीफे नहीं चाहता। उसे ट्रस्ट को पूरी तरह भंग करके उसका पुनर्गठन चाहिए।‌ देश ट्रस्ट के हर सदस्य के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में‌ एक स्वतंत्र जांच चाहता है।

कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि जवाबदेही सिर्फ ट्रस्ट पर समाप्त नहीं होनी चाहिए। प्रधानमंत्री तक भी जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए, जिन्होंने ट्रस्ट का गठन किया और उसके कई सदस्यों की नियुक्ति की। योगी आदित्यनाथ सरकार तक, जिसने वर्षों तक इस लूट और डकैती को प्रभावी जांच के बिना चलते रहने दिया और उस आरएसएस-वीएचपी माफिया की भी जिम्मेदारी तय किए जाने की जरूरत है, जिसने दशकों से करोड़ों भारतीयों की कीमत पर खुद को मालामाल करने के लिए भगवान राम के नाम का दोहन किया है।"

इससे पहले आज दान चोरी के मामले के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की हुई एक बैठक के दौरान महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिये गए। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने बताया कि तीन घंटे से अधिक समय तक चली बैठक में अंतरिम व्यवस्था के तौर पर सदस्य कृष्ण मोहन को महासचिव की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपने का भी निर्णय लिया गया।

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