
Bhopal , 6 जुलाई . Madhya Pradesh के मत्स्य पालन को दुनिया में नई पहचान मिल रही है. इसी क्रम में कुवैत की कंपनी का राज्य की एक कंपनी के साथ Chief Minister मोहन यादव की उपस्थिति में सात हजार 430 करोड़ रुपए के निवेश और बाय बैक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए.
सीएम यादव ने कहा है कि अन्नदाता की समृद्धि के लिए राज्य Government प्रतिबद्ध है. इसी उद्देश्य से किसान कल्याण वर्ष में प्रदेश में पशुपालन, मत्स्य पालन जैसी आय बढ़ाने वाली गतिविधियों को प्रोत्साहित या बढ़ावा दिया जा रहा है. प्रदेश में तालाबों और जलाशयों के बेहतर प्रबंधन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है.
उन्होंंने कहा कि अन्नदाता की समृद्धि के लिए कृषि के साथ-साथ मत्स्य पालन क्षेत्र में भी अपार संभावनाएं विकसित हो रही हैं. प्रदेश के मछुआरा समुदाय के लोग मछली पालन जरिए ही अपनी आजीविका चलाते हैं. इन सबकी बेहतरी के लिए मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के अंतर्गत गतिविधियों को अंतर्राष्ट्रीय विस्तार दिया जा रहा है.
Chief Minister मोहन यादव की उपस्थिति में कुवैत की अग्रणी मत्स्य कंपनी जबेदी अल कुवैत फिशरीज कंपनी और कामदार्स केयर इंदौर के बीच, प्रदेश में 7 हजार 430 करोड़ रुपए के निवेश और बाय बैक एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर हुए. यह एग्रीमेंट मध्यप्रदेश एकीकृत मत्स्योद्योग नीति 2026 के अंतर्गत हुआ है.
Chief Minister निवास स्थित समत्व भवन में एग्रीमेंट पर हुए हस्ताक्षर के बाद सीएम यादव ने कहा कि Madhya Pradesh में मत्स्य पालन विकास के लिए पर्याप्त जलसंरचनाओं के भंडार हैं. इससे देश की खाद्य आवश्यकताओं की पूर्ति करने के साथ-साथ निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा. कृषि और खाद्यान्न के विकास को लेकर Madhya Pradesh में अपार संभावनाएं हैं. कुवैत हमारा मित्र देश है, प्रदेश में विदेशी निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने के लिए राज्य Government पूर्ण समर्पण के साथ तेजी से कार्य कर रही है, अब इसके सुखद परिणाम भी लगातार सामने आ रहे हैं. भविष्य में Madhya Pradesh मत्स्य पालन के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाएगा.
एग्रीमेंट के दौरान जानकारी दी गई कि Madhya Pradesh एकीकृत मत्स्य उद्योग नीति-2026 के अंतर्गत राज्य में आधुनिक निर्यातोन्मुखी एवं मूल्य संवर्धन मत्स्य उद्योग के विकास के लिए निजी एवं विदेशी निवेश आकर्षित करने का प्रावधान है. अनुबंध के अंतर्गत 7 हजार 430 करोड़ रुपए के अनुमानित निवेश से इंदिरा सागर, बरगी, बाणसागर और बारना जलाशय में केज कल्चर सहित बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज आधारित इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जाएगा.
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एसएनपी/डीकेपी