श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र की बैठक के दौरान वरिष्ठ वकील के. परासरन ने कहा कि ट्रस्ट का संविधान यह कहता है कि यदि किसी व्यक्ति ने इस्तीफा दे दिया हो तो उसका इस्तीफा मंजूर किया जाना चाहिए. उसपर विचार का कोई सवाल पैदा नहीं होता. अगर ट्रस्ट का संविधान कुछ ऐसा कहता है तो सबसे बड़ा सवाल यह होता है कि 28 जून को गोविंद देव गिरी महाराज ने एक पत्र जारी कर कहा था कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने इस्तीफा दे दिया है. उसके बाद 28 जून से लेकर 6 जुलाई तक किस हैसियत से चंपत राय ट्रस्ट में बने रहे.
इसके साथ ही मर्यादा और नैतिकता की बात की जाती है, ऐसे में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोष से अगर किसी भी तरह के रकम की चोरी हुई है तो क्या कोषाध्यक्ष की कोई जिम्मेदारी नहीं बनती.
कैसे बचे कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी?श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी हैं. मंदिर में चढ़े दान की रकम से लगभग 80 लाख गबन हुआ, जिसकी रिकवरी हुई है. ऐसे में यह तो सार्वजनिक सच है कि चंदा की चोरी हो रही थी. इस सच का पता चलने के बावजूद कोषाध्यक्ष सुरक्षित कैसे हैं. केवल पुणे से रहकर ट्रस्ट के कोष का काम देखने से क्या वह बच सकते हैं.
सवाल ये है कि क्या कोषाध्यक्ष के तौर पर जिस तरह से अपने कार्यों का निर्वहन किया जाना चाहिए था वह किया गया? अगर गोविंद देव गिरी के बतौर कोषाध्यक्ष रहते हुए वित्तीय मामलों में अनिल मिश्रा की दखल अधिक थी तो उन्होंने पहले इसे क्यों नहीं सार्वजनिक किया.
गोपाल राव को क्यों हटाया?श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के विशेष आमंत्रित सदस्य के तौर पर गोपाल राव को ट्रस्ट की बैठक के बाद हटा दिया गया है. सवाल यह उठता है कि उनपर जिम्मेदारी मंदिर के व्यवस्था की थी. किन आरोपों के आधार पर उन्हें हटाया गया, यह अभी तक नहीं बताया गया है. गोपाल राव अपने पद पर रहते हुए किस चीज को प्रभावित कर सकते थे, जिसकी वजह से उन्हें हटाया गया?
चंपत राय ने चंदा चोरी की बात छुपाई