सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के करूर भगदड़ मामले में राज्य के मंत्रियों की बयानबाजी पर रोक लगाने की मांग ठुकरा दी है. विपक्षी पार्टी डीएमके ने मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय के पीड़ित परिवारों से मिलने पर भी रोक की मांग की थी, लेकिन कोर्ट ने सख्त रुख दिखाते हुए कहा कि वह किसी मुख्यमंत्री की गतिविधियों को तय नहीं करेगा.
मुख्यमंत्री विजय 41 लोगों की मौत वाले इस हादसे के पीड़ितों को 10-10 लाख रुपए मुआवजा और सरकारी नौकरी देने के लिए करूर जाने वाले हैं. डीएमके ने इसी का विरोध किया था. जस्टिस के वी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की अवकाशकालीन बेंच ने सुनवाई के दौरान यह भी साफ किया कि इस मामले की एफआईआर में विजय आरोपी नहीं हैं.
यह भी पढ़ें : Tamil Nadu Politics: AIADMK को लगा तगड़ा झटका, के पलानीस्वामी के भाई KBS ने छोड़ी पार्टी, कहा- '30 सालों तक...'
जांच प्रभावित होने का आरोप
डीएमके ने याचिका दाखिल कर कहा था कि 27 सितंबर, 2025 को हुए इस हादसे की गंभीरता को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपी थी. जांच की निगरानी के लिए अपने पूर्व जज जस्टिस अजय रस्तोगी की अध्यक्षता में कमिटी भी बनाई थी, लेकिन सत्ता में आने के बाद टीवीके अपनी रैली में हुए हादसे की जांच को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है. राज्य के मंत्री तरह-तरह के बयान दे रहे हैं.
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
डीएमके के लिए पेश वरिष्ठ वकील रंजीत कुमार कीं दलीलों से जज सहमत नज़र नहीं आए. जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, 'आप क्या चाहते हैं? हम आपके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी के बोलने पर रोक लगा दें? कोर्ट को राजनीतिक लड़ाई का मंच न बनाएं. अगर उनके नेता बयान दे रहे हैं, तो आप भी उसके जवाब में बयान दे सकते हैं. यह लड़ाई कोर्ट के बाहर लड़ी जानी चाहिए.'