Yogini Ekadashi Vrat: 10 जुलाई को रखें योगिनी एकादशी का व्रत, पारण में न करें ये गलतियां
TV9 Bharatvarsh July 08, 2026 10:42 AM

Yogini Ekadashi Benefits: सनातन परंपरा में एकादशी का अपना विशेष महत्व है. इस बीच आषाढ़ के कृष्ण पक्ष में पड़ने वाली योगिनी एकादशी विशेष मानी गई है. कहा गया है कि इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और पुण्य मिलता है. पुराणों में भी बताया गया है कि उपवास, पूजा, जप और दान जैसे धार्मिक कार्य करने से व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त होता है. वहीं, इस व्रत को लेकर कहा गया है कि जो भी भक्त ये व्रत धारण करेगा उसे हजारों ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर फल प्राप्त होगा.

द्रिक पंचांग के मुताबिक, योगिनी एकादशी 10 जुलाई को सुबह 08 बजकर 16 मिनट पर शुरू हो रही है. इसका समापन 11 जुलाई को सुबह 5 बजकर 22 मिनट पर होगा. 11 जुलाई को सूर्योदय 5 बजकर 31 मिनट पर होगा, ऐसे में 10 जुलाई को ही एकादशी का व्रत रखने को योग है, जो भी भक्त एकादशी का उपवास रख रहा है वह सुबह 8 बजकर 16 मिनट के बाद पूजा-पाठ कर सकेगा.

योगिनी एकादशी का फल

द्रिक पंचांग में बताया गया है कि योगिनी एकादशी का व्रत करने से सारे पाप मिट जाते हैं. जीवन में समृद्धि और सुख मिलता है. ये व्रत करने से स्वर्गलोक में जगह मिलती है. इस व्रत के बारे में कहा गया है कि योगिनी एकादशी तीनों लोकों में प्रसिद्ध है. यह माना जाता है कि ये व्रत करना 88 हजार ब्राह्मणों को भोजन कराने के बराबर है. ये एकादशी निर्जला एकादशी के बाद और देवशयनी एकादशी से पहले आती है.

एकादशी व्रत पारण के दिन क्या न करें गलतियां?
  • 11 जुलाई को सूर्योदय से पहले एकादशी का पारण बिल्कुल न करें. सुबह 5 बजकर 31 मिनट के बाद पारण किया जा सकता है.
  • एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने के बाद नहीं करना चाहिए, ऐसे में समापन से पहले पारण करना जरूरी होता है.
  • द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है.
  • एकादशी के व्रत का पारण तुलसी के बिना भी नहीं करना चाहिए. कहा गया है कि भगवान विष्णु की पूजा करने बाद व्रत रखने वाले लोग अगर तुलसी का पत्ता ग्रहण करते हैं तो वह सबसे उत्तम होता है.
  • एकादशी का व्रत रखने के बाद पारण करते समय बहुत ज्यादा भोजन करने से बचें. इस दौरान फलाहार या फिर दूध, जूस जैसी चीजें ली जा सकती हैं
  • एकादशी के व्रत में चावल ग्रहण करना वर्जित है. वहीं, द्वादशी के दिन भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए. जो लोग व्रत का पारण करते हैं वे चावल का दान कर सकते हैं, लेकिन खुद उसे ग्रहण नहीं कर सकते हैं.

ये भी पढ़ें:क्या मंदिर के बाहर से चप्पल-जूते चोरी होना शुभ है या अशुभ? जानिए किन बातों का रखें ध्यान

Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

© Copyright @2026 LIDEA. All Rights Reserved.