सपा के पूर्व विधायक दीप नारायण के ठिकानों पर रेड, आय से अधिक संपत्ति मामले में ED का एक्शन
TV9 Bharatvarsh July 08, 2026 02:43 PM

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बुधवार (8 जुलाई) को उत्तर प्रदेश के झांसी और लखनऊ में समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव और उनके सहयोगियों के कई ठिकानों पर छापेमारी की. यह कार्रवाई धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) से जुड़े मामले में चल रही जांच के तहत की गई. इस दौरान दौरान कई दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संपत्तियों से जुड़े रिकॉर्ड जब्त किए गए.

जानकारी के मुताबिक ED ने पूर्व विधायक, उनके परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़े कारोबार तथा अन्य संबंधित लोगों के आवासीय और व्यावसायिक परिसरों में तलाशी अभियान चलाया. ED की इस कार्रवाई का मकसद अपराध से अर्जित संपत्तियों, वित्तीय लेनदेन, लाभकारी स्वामित्व और अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों के संबंध में सबूत जुटाना है.

किस आधार पर हुई कार्रवाई

अधिकारियों के मुताबिक यह जांच ED द्वारा दर्ज की गई एनफोर्समेंट केस इंफॉर्मेशन रिपोर्ट (ECIR) पर आधारित है. यह रिपोर्ट पूर्व विधायक के पास आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) होने के आरोपों से जुड़ी उत्तर प्रदेश विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट की FIR के आधार पर दर्ज की गई थी.आरोप है कि पूर्व विधायक ने अपनी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति अर्जित की. इसी आधार पर ED ने धनशोधन निवारण अधिनियम (PMLA), 2002 के तहत जांच शुरू की.

अहम दस्तावेज जब्त

छापेमारी के दौरान अधिकारियों ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और चल-अचल संपत्तियों के रिकॉर्ड खंगाले. इसके साथ ही वित्तीय लेनदेन से जुड़े कागजात भी जब्त किए गए हैं. ED का कहना है कि इन दस्तावेजों की जांच से अपराध से कमाई गई रकम का पता लगाया जाएगा और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल लोगों की पहचान की जाएगी.

23 से ज्यादा आपराधिक मुकदमे दर्ज

शुरुआती जांच में सामने आया है कि दीप नारायण ने रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन और अन्य कारोबार में लगी कंपनियों और LLP के नेटवर्क के जरिए अपराध से कमाई गई रकम बनाई और उसे सफेद किया. दीप नारायण झांसी की गरौठा सीट से पूर्व विधायक रह चुके हैं. उन पर पहले से 23 से ज्यादा आपराधिक मुकदमे भी दर्ज हैं.

ED के अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती जांच में धोखाधड़ी, जालसाजी, जबरन वसूली, हत्या का प्रयास, डकैती आदि सहित लगभग 60 अपराध सामने आए हैं, जो भारतीय दंड संहिता, यूपी गैंगस्टर्स एक्ट, गुंडा एक्ट आदि के तहत दर्ज किए गए हैं. उन्होंने बताया कि धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) 2002 के प्रावधानों के तहत आगे की जांच जारी है. ED अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अवैध कमाई कहां-कहां लगाई गई और इसमें कौन-कौन लोग शामिल हैं.

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