जालौन में महिला को जबरन उठाने की कोशिश, छेड़छाड़ और मारपीट के मामले में कोर्ट के आदेश पर तत्कालीन एसएचओ, दरोगा, भाजपा नेता समेत सात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) अभिषेक खरे के आदेश पर एट कोतवाली के तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक पंकज पांडेय, तत्कालीन उपनिरीक्षक अभिषेक पोरवाल, दो अज्ञात पुलिसकर्मियों, भाजपा नेता कार्तिक त्रिपाठी तथा उसके तीन अज्ञात साथियों के खिलाफ केस दर्ज किया गाय है.
ये केस एट थाने में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है. न्यायालय के आदेश के अनुपालन में एट थाने में एफआईआर दर्ज होने के बाद मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है.
न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के अनुसार, कोंच रोड, कस्बा एट निवासी एक महिला ने आरोप लगाया है कि 26 फरवरी 2026 की शाम करीब सात बजे भाजपा नेता कार्तिक त्रिपाठी, पुत्र रामबाबू त्रिपाठी, और उसके तीन अज्ञात साथियों ने उसके साथ छेड़छाड़, अभद्र व्यवहार और अश्लील हरकतें कीं.
क्या-क्या हैं आरोप?शिकायत में आरोप लगाया गया है कि आरोपी लाल रंग की ब्रेजा कार से उसे जबरन ले जाने का प्रयास कर रहे थे. विरोध करने और शोर मचाने पर आरोपियों ने कार से कुचलकर हत्या का प्रयास किया, लेकिन आसपास मौजूद लोगों के हस्तक्षेप के कारण वे मौके से भाग निकले.
शिकायतकर्ता का कहना है कि उसने तत्काल 1090 पर सूचना दी, जिसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन आरोपियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. बाद में 28 फरवरी को जब वह थाना एट शिकायत दर्ज कराने पहुंची, तब भी उसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई.
वीडियो बनाने पर महिला को पीटने का आरोपप्रार्थना पत्र में आरोप लगाया गया है कि उस समय थाना एट के तत्कालीन एसएचओ पंकज पांडेय अपने सरकारी आवास पर मुख्य आरोपी भाजपा नेता कार्तिक त्रिपाठी को संरक्षण देकर बैठे थे. महिला का आरोप है कि जब उसने वीडियो बनाने का प्रयास किया तो एसएचओ, एसआई अभिषेक पोरवाल तथा दो अन्य पुलिसकर्मियों ने उसके साथ मारपीट की, थप्पड़ मारे, अभद्र भाषा का प्रयोग किया, मोबाइल फोन छीन लिया तथा दूसरे मोबाइल को फेंकने का प्रयास किया.
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पुलिसकर्मियों ने कार्रवाई करने के बजाय समझौते का दबाव बनाया और उल्टी कार्रवाई करने की धमकी दी.
शिकायतकर्ता के अनुसार, उसने पुलिस अधीक्षक, पुलिस महानिरीक्षक, पुलिस महानिदेशक, मुख्यमंत्री, राज्यपाल, राज्य महिला आयोग, राज्य मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री सहित विभिन्न अधिकारियों को पंजीकृत डाक से शिकायतें भेजीं. साथ ही सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत थाना परिसर के सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और उसकी प्रमाणित प्रति उपलब्ध कराने का भी अनुरोध किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.
कार्रवाई नहीं होने पर पहुंची कोर्टइसके बाद महिला ने मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में धारा 173(4) बीएनएसएस के तहत प्रार्थना पत्र दाखिल किया. न्यायालय ने मामले का प्रथम दृष्टया संज्ञान लेते हुए एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. आदेश के अनुपालन में एट थाने में एफआईआर संख्या 89/2026 दर्ज की गई.
मुकदमे में भाजपा नेता कार्तिक त्रिपाठी, तत्कालीन एसएचओ पंकज पांडेय, एसआई अभिषेक पोरवाल, दो अज्ञात पुलिसकर्मी तथा कार्तिक त्रिपाठी के तीन अज्ञात साथियों को नामजद किया गया है. एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की संबंधित धाराओं में दर्ज कर पुलिस ने विवेचना शुरू कर दी है.