दिलजीत दोसांझ की फिल्म ‘सतलुज’ काफी विवादों में घिरी हुई है. इस फिल्म को काफी मुश्किलों के बाद हाल ही में जी5 पर रिलीज किया गया था लेकिन स्ट्रीमिंग के दो दिन बाद ही इसे ओटीटी प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया. वहीं अब तमाम सेलेब्स इस फिल्म के सपोर्ट में आगे आ रहे हैं. गुल पनाग से लेकर अनुराग कश्यप तक ने ‘सतलुज’ को दिखाए जाने का समर्थन किया है.
'सतलुज' विवाद पर गुल पनाग ने किया रिएक्ट
बता दें कि एक्ट्रेस गुल पनाग ने जी5 से 'सतलुज' को हटाए जाने पर हुए विवाद पर अपनी राय रखी है, उन्होंने कहा कि भारत को अपने अतीत के दर्दनाक पलों की कहानियां सुनाना बंद नहीं करना चाहिए. गुल पनाग ने अपने ऑफिशियल एक्स अकाउंट पर एक पोस्ट में लिखा, "मैं पंजाब में उग्रवाद के उस खौफनाक दौर में बड़ी हुई हूं. मुझे याद है कि अखबारों की हेडलाइंस में बसों को रोकने और बेगुनाह यात्रियों को बाहर निकालकर मार डालने की खबरें आती थीं. मुझे यह भी याद है कि कैसे मेरे गांव के नौजवानों को पकड़ लिया जाता था, हिरासत में रखा जाता था और उन पर जुल्म ढाए जाते थे, जबकि उनका उस आंदोलन से कोई लेना-देना नहीं था."
गुल पनाग ने आगे लिखा, "उन्हीं यादों की वजह से मुझे नहीं लगता कि हमें अपने इतिहास के मुश्किल अध्यायों से इतना असहज हो जाना चाहिए कि हम उनके बारे में कहानियां सुनाना ही बंद कर दें."
I grew up in Punjab during the brutal years of militancy. I remember reading newspaper headlines about buses being stopped and innocent passengers being pulled out and killed. I also remember accounts of young men being picked up, detained and tortured, despite having nothing to…
— Gul Panag (@GulPanag) July 7, 2026
गुल पनाग ने अपनी एक और पोस्ट में लिखा है, "फिल्म इतिहास की कोई टेक्स्ट बुक नहीं होती. यह एक नज़रिए और एक लेंस से कहानी कहती है. इस पर बहस करें, इसकी आलोचना करें, इसका विरोध करें, लेकिन इसे बैन करना हमेशा नुकसानदेह ही होता है. और यह न सोचें कि पंजाब ने अलगाववाद को जो मुश्किल से नकारा है, वह इतना कमज़ोर है कि कोई फिल्म उसे पलट देगी!!"
A film isn’t a history textbook. It tells a story through one lens and one perspective. Debate it. Critique it. Counter it. Banning it is always counter productive.
— Gul Panag (@GulPanag) July 7, 2026
But don’t assume Punjab’s hard-won rejection of separatism is so fragile that a film can reverse it!! https://t.co/eZYSF5EHQm
अनुराग कश्यप ने भी किया 'सतलुज' को सपोर्ट
अनुराग कश्यप ने सबसे पहले अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक मैसेज रीपोस्ट किया, जिसमें लिखा था, "किसी चीज पर बैन लगाने की बात यह है कि आप जितना ज्यादा बैन लगाते हैं, लोग उसे उतना ही ज्यादा देखना चाहते हैं. मैं तो ये फिल्म देखने का प्लान भी नहीं बना रहा था, लेकिन अब मुझे यह देखनी ही होगी ताकि समझ सकूं कि इसे बैन क्यों किया गया." बाद में उन्होंने 'सतलुज' को प्रमोट करते हुए एक और इंस्टाग्राम स्टोरी शेयर की और लोगों से फ़िल्म देखने की अपील की, भले ही इसके लिए उन्हें पायरेटेड कॉपी का सहारा लेना पड़े. फिल्ममेकर ने लिखा, "प्लीज सब लोग देखो, पायरेट करो पर देखो."

'सतलुज' विवाद के बीच केंद्र सरकार ने बनाई रिव्यू कमेटी
दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर चल रहे विवाद के बीच, केंद्र सरकार ने फिल्म की समीक्षा करने का फैसला किया है. 'वैरायटी इंडिया' के मुताबिक, सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी इस फिल्म के कंटेंट की जांच के लिए एक हाई लेवल इंटर डिपार्टमेंटल कमेटी (IDC) का गठन किया है.
बता दें कि 'सतलुज' पंजाब के मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के लापता होने की घटना पर आधारित है. यह फ़िल्म 1990 के दशक में पंजाब पुलिस द्वारा की गई एक्स्ट्रा जुडिशियल किलिंग्स और लोगों को जबरन गायब करने की घटनाओं को दिखाती है. अब कमेटी फिल्म के कंटेंट की जांच करेगी और फिर केंद्र सरकार को अपनी सिफारिशें सौंपेगी.
‘सतलुज’ सिनेमाघरों में क्यों रिलीज नहीं हुई?
भारत में इसे सिनेमाघरों में रिलीज न करने की वजह सेंसरशिप थी. प्रोडक्शन हाउस आरएसवीपी ने 2022 के आखिर में फिल्म को सर्टिफ़िकेशन के लिए भारत के सेंट्रल बोर्ड ऑफ़ फ़िल्म सर्टिफ़िकेशन (सीबीएफसी) के पास भेजा था. छह महीने चली इस प्रक्रिया के बाद, फिल्म में 21 कट लगाने और इसका नाम 'गल्लूघारा' से बदलकर 'पंजाब '95' करने का निर्देश दिया गया. इसके बाद प्रोडक्शन हाउस ने बॉम्बे हाई कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी. उसी दौरान, 2023 टोरंटो इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में होने वाले फिल्म के तय गाला प्रीमियर से भी इसे हटा लिया गया.
हाई कोर्ट की सुनवाई के बाद, फिल्म को सीबीएफसी की रिवाइजिंग कमिटी के पास वापस भेजा गया। इस बार, जरूरी कट की संख्या 21 से बढ़कर 127 हो गई. मेकर्स का आरोप था कि बोर्ड ने इस बायोग्राफ़िकल ड्रामा के मुख्य किरदार का नाम बदलने के लिए भी कहा था. जब उन्होंने ये बदलाव करने से इनकार कर दिया, तो फ़िल्म की रिलीज में सालों तक देरी होती रही.
दो दिन बाद ही ओटीटी से हटाया गया
'सतलुज' को आखिरकार तीन साल बाद चुपचाप 3 जुलाई को जी5 पर अनकट वर्जन में रिलीज किया गया था. हालांकि, यह फिल्म स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म पर ज्यादा समय तक नहीं टिक पाई और रिलीज के 48 घंटों के भीतर ही इसे हटा दिया गया. इसके बाद इंस्टा र शेयर की गई एक स्टेटमेंट में जी5 ने फिल्म पर दर्शकों की प्रतिक्रिया के लिए उनका शुक्रिया अदा किया.
इसमें लिखा है, "रिलीज के बाद से 'सतलुज' को जो प्रतिक्रिया मिली है, वह वाकई जबरदस्त रही है, हम हर उस दर्शक के बहुत आभारी हैं जिन्होंने इस फिल्म को सब्सक्राइब किया, देखा और इसे सराहा. आपका प्यार और समर्थन हमारे लिए और उन सभी लोगों के लिए बहुत मायने रखता है जिन्होंने इस कहानी को साकार किया." जी5 ने आगे अपने बयान में लिखा है, "मौजूदा हालात को देखते हुए, 'सतलुज' फिल्म अगले आदेश तक भारत में उपलब्ध नहीं होगी. हम सही प्रोसेस अपनाकर और हर उचित तरीका आजमाकर जल्द से जल्द इस फ़िल्म को अपने दर्शकों तक वापस लाने के लिए कमिटेड हैं."
'सतलुज' में दिलजीत के साथ अर्जुन रामपाल, सुविंदर विक्की और गीतिका विद्या ओहलयान ने अहम रोल प्ले किया है.