नौसेना का नया विजन, जहाज निर्माण के दायरे से आगे निकलेगा एचएसएल, उप प्रमुख ने की समीक्षा
TV9 Bharatvarsh July 09, 2026 11:43 PM

भारतीय नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल तरुण सोबती ने 6 जुलाई को एचएसएल की विशाखापत्तनम फैसिलिटी का दौरा किया. यहां चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर रियर एडमिरल चंद्रशेखरन रघुराम (रिटायर्ड) ने उन्हें यार्ड की हालिया प्रोजेक्ट्स, क्षमता बढ़ाने के काम और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के बारे में जानकारी दी. इसके बाद अपने संबोधन में डीसीएनएस ने एचएसएल के लिए ऐसा विजन रखा, जो किसी जहाज के सिर्फ बनकर निकलने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसके पूरे ऑपरेशनल लाइफसाइकल तक साथ रहने की बात करता है. उन्होंने कहा कि नौसेना “एचएसएल के साथ सिर्फ एक शिपबिल्डिंग यार्ड नहीं, बल्कि एक स्ट्रैटेजिक पार्टनर के तौर पर काम करना चाहती है.” उन्होंने साफ किया कि इसमें पूरा लाइफसाइकल सपोर्ट, अपग्रेड और मिड-लाइफ अपग्रेड भी शामिल होना चाहिए.

कई मामलों में एचएसएल पहले से ही ऐसा काम कर रही है. रक्षा मंत्रालय के इस पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग ने नौसेना की किलो-क्लास पनडुब्बियों, जिनमें आईएनएस सिंधुकीर्ति, आईएनएस वेला और आईएनएस वगली शामिल हैं, का बड़ा ओवरहॉल और मॉडर्नाइजेशन किया है. फिलहाल आईएनएस सिंधुकीर्ति के मिड-लाइफ मॉडर्नाइजेशन पर काम चल रहा है. एचएसएल ने म्यांमार को सौंपे जाने से पहले आईएनएस सिंधुवीर का भी रिफिट किया था. यह ऐसे लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस का उदाहरण है, जिसे रक्षा मंत्रालय अब एक बार के कॉन्ट्रैक्ट की जगह स्थायी व्यवस्था के तौर पर लागू करना चाहता है.

पनडुब्बी बनाने की तैयारी

भारत के घरेलू पनडुब्बी इंडस्ट्री बेस को मजबूत करने और विदेशी शिपयार्ड पर निर्भरता कम करने की दिशा में एचएसएल अब सिर्फ रिपेयर और मॉडर्नाइजेशन तक सीमित नहीं रहेगा. वह मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के साथ मिलकर पनडुब्बी बनाने की तैयारी कर रहा है. अगर यह समझौता होता है, तो एचएसएल एक सामान्य जहाज निर्माता से आगे बढ़कर नई बिजनेस और टेक्निकल भूमिका निभाएगा. यह मॉडल दुनिया की कई नौसेनाओं के शिपयार्ड जैसा होगा, जहां जहाजों के लॉन्ग-टर्म मेंटेनेंस और सपोर्ट पर ज्यादा फोकस रहता है.

हालांकि, वाइस एडमिरल सोबती ने कहा कि यह नई जिम्मेदारी किसी बड़े रिस्क की शुरुआत नहीं, बल्कि पहले से बने भरोसे का विस्तार है. उन्होंने एचएसएल को “काफी लंबे समय से भारतीय नौसेना का भरोसेमंद पार्टनर” बताया और कहा कि जैसे-जैसे भारत का समुद्री सेक्टर आगे बढ़ेगा, एचएसएल उसकी ग्रोथ का भी अहम हिस्सा रहेगा. उन्होंने यह भी साफ किया कि नई भूमिका मिलने के बावजूद बेसिक उम्मीदें नहीं बदलेंगी. उन्होंने कहा, “क्वालिटी और समय पर काम पूरा करना सबसे ज्यादा जरूरी है.” उनका कहना था कि जिम्मेदारियां बढ़ने के बाद भी काम की परफॉर्मेंस ही सबसे बड़ा पैमाना रहेगी.

उन्होंने आगे कहा कि एचएसएल इस लाइफसाइकल सपोर्ट मॉडल को कितनी अच्छी तरह लागू कर पाएगा, यह उसके कर्मचारियों के अनुभव और संख्या पर निर्भर करेगा. डीसीएनएस ने कहा, “सबसे महत्वपूर्ण पहलू लोगों का एक्सपीरियंस है.” उन्होंने भरोसा जताया कि एचएसएल ने इस दिशा में अच्छा अनुभव हासिल किया है और आगे भी लगातार बेहतर करेगा. मिनी रत्न कैटेगरी-I पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग होने के कारण एचएसएल के बोर्ड के पास कैपिटल एक्सपेंडिचर और टेक्नोलॉजी पार्टनरशिप से जुड़े फैसले तेजी से लेने की फाइनेंशियल आजादी है. इसके लिए हर बार सरकार से पहले मंजूरी लेने की जरूरत नहीं होती. अगर नौसेना अपनी इस योजना को आगे बढ़ाती है, तो एचएसएल को सिर्फ नए जहाज बनाने के ऑर्डर पर निर्भर रहने के बजाय मेंटेनेंस और अपग्रेड कॉन्ट्रैक्ट्स से लगातार और लॉन्ग-टर्म रेवेन्यू मिलने की संभावना भी बढ़ेगी.

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