पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर में हुए जघन्य स्कूली छात्रा बलात्कार और हत्याकांड के मुख्य आरोपी प्रभाष मंडल के पुलिस एनकाउंटर मामले ने एक नया और बेहद संवेदनशील मोड़ ले लिया है। मंगलवार आधी रात को सुर्जापुर के दलदली इलाके में हुए इस कथित एनकाउंटर की कमान अब राज्य की शीर्ष जांच एजेंसी सीआईडी (CID) को सौंप दी गई है। मानवाधिकार गाइडलाइंस और कानूनी प्रक्रियाओं के तहत इस मामले में न्यायिक जांच पहले ही शुरू की जा चुकी है। अब सीआईडी की टीम ग्राउंड जीरो पर पहुंचकर फॉरेंसिक मैपिंग और बैलिस्टिक साक्ष्यों के जरिए इस पूरे एनकाउंटर की प्रामाणिकता की कड़ाई से पड़ताल करने में जुट गई है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सनसनीखेज खुलासा: पीठ की तरफ से बेहद करीब से मारी गईं दोनों गोलियांपुलिस और फॉरेंसिक सूत्रों से मिली प्रभाष मंडल की पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने इस मुठभेड़ की पूरी तस्वीर को साफ कर दिया है। डॉक्टरों के शुरुआती निष्कर्षों के अनुसार, भागने की कोशिश के दौरान प्रभाष को बहुत ही नजदीक से दो गोलियां मारी गई थीं। ये दोनों गोलियां उसकी पीठ की तरफ से शरीर के भीतर प्रवेश कर गईं और सामने के हिस्से से आर-पार निकल गईं। डॉक्टरों को आरोपी के शरीर के भीतर किसी भी गोली या धातु का टुकड़ा फंसा हुआ नहीं मिला है। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, एक गोली प्रभाष के दाहिने फेफड़े को पूरी तरह से चीरती हुई बाहर निकल गई, जबकि दूसरी गोली ने उसकी दाहिनी किडनी को बुरी तरह क्षतिग्रस्त करते हुए शरीर को पार कर दिया, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
आधी रात को क्यों हुआ क्राइम सीन रीक्रिएशन? पुलिस अधिकारियों ने सीआईडी के सामने दी ये दलीलविपक्ष और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं द्वारा रात के समय आरोपी को घटना स्थल पर ले जाने को लेकर उठाए जा रहे सवालों पर बारुईपुर पुलिस प्रशासन ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि वे दिन के उजाले में प्रभाष को सुर्जापुर के उस संवेदनशील इलाके में ले जाने का जोखिम नहीं उठा सकते थे। वहां की स्थानीय जनता में 12 साल की मासूम बच्ची की हत्या को लेकर भारी आक्रोश था और कानून-व्यवस्था बिगड़ने या उग्र भीड़ द्वारा आरोपी की मॉब लिंचिंग (पीट-पीटकर हत्या) करने का भारी खतरा मंडरा रहा था। चूंकि यह जघन्य अपराध भी रात के घने अंधेरे में ही अंजाम दिया गया था, इसलिए जांच टीम आरोपी की वास्तविक गतिविधियों और भागने के रास्तों को बिल्कुल सटीक ढंग से समझने के लिए उसे रात करीब 12:45 बजे वहां लेकर गई थी।
सर्विस रिवॉल्वर छीनकर चलाई थी गोली; आत्मरक्षा के दावों की कसौटी पर छह पुलिसकर्मियों के बयानघटनाक्रम के अनुसार, कैनिंग पुलिस सर्कल के प्रभारी रोनी सरकार जब वारदात वाली जगह पर आरोपी के बिल्कुल नजदीक खड़े थे, तभी प्रभाष ने बिजली की तेजी से उनकी कमर में लगी सर्विस रिवॉल्वर छीन ली और फायरिंग करते हुए दलदली रास्ते की तरफ भागने लगा। उसने पुलिस टीम पर एक राउंड फायर भी किया। इसके बाद अपनी और साथी पुलिसकर्मियों की जान बचाने के लिए बारुईपुर थाने के पीसी इनचार्ज सब-इंस्पेक्टर अर्घ्य मंडल ने अपनी रिवॉल्वर से जवाबी फायरिंग की। सीआईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि उनका मुख्य उद्देश्य यह स्थापित करना है कि क्या पुलिस की यह जवाबी कार्रवाई वास्तव में आत्मरक्षा के दायरे में अनिवार्य थी। इस ऑपरेशन में शामिल सभी छह पुलिसकर्मियों को सीआईडी टीम के सामने पेश होकर अपना आधिकारिक बयान दर्ज कराना होगा, हालांकि अभी किसी भी पुलिसकर्मी को सस्पेंड नहीं किया गया है।
बैलिस्टिक जांच शुरू और चौथा आरोपी कबीर मोल्ला 20 जुलाई तक पुलिस रिमांड परसीआईडी की फॉरेंसिक और डिटेक्टिव विंग ने गुरुवार सुबह ही सुर्जापुर में एनकाउंटर वाले दलदली मैदान का दौरा कर पूरे दृश्य की थ्री-डी मैपिंग पूरी कर ली है। घटनास्थल से बरामद किए गए खाली खोखे, पुलिसकर्मियों के सर्विस वेपन और बैलिस्टिक साक्ष्यों को जांच प्रयोगशाला में भेज दिया गया है। दूसरी ओर, इस जघन्य सामूहिक बलात्कार कांड के चौथे वांछित आरोपी कबीर मोल्ला को पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए बारुईपुर की स्थानीय अदालत में पेश किया। विशेष लोक अभियोजक बिभास चटर्जी ने कोर्ट में अकाट्य दलीलें पेश करते हुए साबित किया कि कबीर मोल्ला भी आनंद सरदार और दिवाकर सरदार की तरह ही इस घिनौने कृत्य में बराबर का भागीदार था। अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कबीर मोल्ला को 20 जुलाई 2026 तक के लिए पुलिस कस्टडी में भेज दिया है।