लगातार दूसरे विश्व कप में फ्रांस से हारना किसी भी टीम के मनोबल को तोड़ सकता था। लेकिन मोरक्को के कोच मोहम्मद ओआहबी गुरुवार रात बोस्टन के गिलेट स्टेडियम से टूटे नहीं, बल्कि और अधिक दृढ़ निश्चय के साथ निकले।
दूसरे हाफ में 60वें मिनट में किलियन एमबापे और छह मिनट बाद उस्मान डेम्बेले के गोलों की बदौलत फ्रांस ने 2-0 से जीत दर्ज की। यह वही स्कोरलाइन थी जो क़तर में हुए 2022 विश्व कप सेमीफाइनल में रही थी — वही प्रतिद्वंद्वी, वही परिणाम और वही पीड़ा।
लेकिन ओआहबी, जिन्होंने 2025 में मोरक्को की अंडर-20 टीम को अंडर-20 विश्व कप खिताब दिलाया था और बाद में सीनियर टीम की बागडोर संभाली, हार को स्वीकार कर आगे बढ़ने के मूड में नहीं थे। 2030 विश्व कप की मेजबानी पुर्तगाल और स्पेन के साथ मिलकर करने जा रहे मोरक्को के कोच ने अपने इरादे साफ शब्दों में जाहिर किए।
उन्होंने कहा, “आज यह स्पष्ट है कि फ्रांस हमसे मजबूत था। लेकिन हम आगे बढ़ सकते हैं, सुधार कर सकते हैं और शायद चार साल बाद उन्हें बाहर कर दें।”
संदेश बिल्कुल साफ था — कहानी यहीं खत्म नहीं हुई है।
ओआहबी ने फ्रांस की प्रशंसा करते हुए स्वीकार किया कि उनके पास मैदान के हर हिस्से में बेहतरीन खिलाड़ी हैं। उन्होंने कहा, “फ्रांस गेंद के साथ बेहद अच्छा खेलता है, उन्होंने हमें कई समस्याएं दीं। वे पिछले दो फाइनल में रहे हैं, उनके पास बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं जो मेहनत करने और दौड़ने को तैयार रहते हैं, और यही फर्क पैदा करता है। उनके पास विश्व कप जीतने के लिए सभी गुण हैं।”
हालांकि बातचीत जल्द ही मोरक्को के भविष्य पर केंद्रित हो गई। ओआहबी ने अपनी टीम के युवाओं, मोरक्को फुटबॉल महासंघ की मजबूती और राजा के समर्थन को वास्तविक उम्मीद की वजह बताया। उन्होंने कहा, “हमारे पास बहुत से युवा खिलाड़ी हैं, प्रतिभा का बड़ा भंडार है। हमारे युवा खिलाड़ी आगे और विकसित होंगे, और हमारे पास एक ऐसी टीम है जो भविष्य में खिताब जीत सकती है।”
मोरक्को ने लगातार दो विश्व कप में क्वार्टर फाइनल तक पहुंचकर इतिहास रचा, ऐसा करने वाला पहला अफ्रीकी देश बना। हालांकि दोनों बार उन्हें फ्रांस ने बाहर किया। 2030 में, जब वे अपने घरेलू मैदान पर उतरेंगे, उनका लक्ष्य इस कहानी को पूरी तरह बदलने का होगा।