प्रकृति संरक्षण की मिसाल बना बिश्नोई समाज, स्वामी चिदानन्द ने शुरू किया पौधारोपण अभियान
Tarunmitra July 10, 2026 11:43 PM

  • स्वामी चिदानन्द के 75वें वर्ष में प्रवेश पर 75 हजार पौधों के रोपण का महाअभियान प्रारम्भ

जोधपुर, राजस्थान। प्रकृति संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और जीवों के प्रति करुणा का अद्भुत संगम हुआ जब परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के अध्यक्ष परमार्थ पीठाधीश्वर, स्वामी चिदानन्द सरस्वती के पावन सान्निध्य में राजस्थान की पावन धरती पर बिश्नोई समाज ने पौधारोपण कर एक विराट पर्यावरणीय जन-अभियान का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर स्वामी जी के 75वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में 75 हजार पौधे लगाने का संकल्प लिया गया तथा अभियान के प्रथम पौधे का रोपण स्वामी के करकमलों द्वारा सम्पन्न हुआ।

इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि वृक्ष केवल प्रकृति की धरोहर नहीं, बल्कि हमारी आने वाली पीढ़ियों का जीवन हैं। आज विश्व जलवायु परिवर्तन, बढ़ते तापमान, जल संकट और जैव विविधता के क्षरण जैसी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। इन चुनौतियों का सबसे सरल, प्रभावी और स्थायी समाधान वृक्षारोपण तथा वृक्षों का संरक्षण है। उन्होंने कहा कि पौधा लगाना महत्वपूर्ण है, किन्तु उससे भी अधिक आवश्यक है उसकी वर्षों तक उसी प्रकार देखभाल करना, जैसे परिवार के किसी सदस्य की की जाती है।

स्वामी जी ने बिश्नोई समाज की पर्यावरणीय चेतना की सराहना करते हुए कहा कि बिश्नोई समाज केवल वृक्ष नहीं लगाता, बल्कि प्रकृति के साथ जीने की संस्कृति का संरक्षण करता है। सदियों पूर्व गुरु जम्भेश्वर जी द्वारा स्थापित जीवन मूल्यों ने प्रकृति संरक्षण, जीव दया और पर्यावरणीय संतुलन का ऐसा आदर्श प्रस्तुत किया, जिसे आज आधुनिक पर्यावरण विज्ञान भी अनुकरणीय मानता है। विशेष रूप से खेजड़ी (शमी) सहित अनेक वृक्षों का संरक्षण, उनका रोपण तथा वर्षों तक उनका पालन-पोषण बिश्नोई समाज की अद्वितीय पहचान है।

उन्होंने कहा कि बिश्नोई समाज हिरण, चिंकारा, काला हिरण, नीलगाय, मोर, खरगोश तथा असंख्य पक्षियों को अपने परिवार का सदस्य मानकर उनकी सेवा करते हैं। घायल एवं बीमार वन्यजीवों का उपचार, उनके लिए भोजन एवं जल की व्यवस्था तथा भीषण गर्मी में पक्षियों और पशुओं के लिए जल पात्र रखना उनकी संस्कृति का अभिन्न अंग है। वास्तव में बिश्नोई समाज ने मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व का जो आदर्श प्रस्तुत किया है, वही भारत की सनातन संस्कृति का वास्तविक स्वरूप है।

इस प्रेरणादायी अवसर पर फगलू राम के 100वें जन्मदिवस को भी प्रकृति समर्पण के रूप में मनाया गया। उनकी धर्मपत्नी तुलसी देवी जी और चारों सुपुत्र सुखराम बनोई, जगदीश बनोई, सहराम जी तथा पूना राम बनोई ने अपने पैतृक गाँव में पौधारोपण कर अपने पिता का हरित जन्मदिवस मनाया। उन्होंने अपने आसपास के गाँवों में एक हजार से अधिक खेजड़ी सहित अन्य पौधों का रोपण करेंगे तथा स्वामी चिदानन्द सरस्वती के 75वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में 75 हजार वृक्ष लगाने के महाअभियान में सक्रिय सहभागिता निभाने का संकल्प लिया।

इस अभियान के प्रथम चरण में स्वामी जी के पावन सान्निध्य में 11,000 और 11,00 पौधों का रोपण कर इस अभियान का शुभारम्भ कियाा। यह भी घोषणा की गई कि यह अभियान सम्पूर्ण मानसून अवधि में निरन्तर चलता रहेगा तथा हजारों पौधों को रोपित कर उनके संरक्षण का संकल्प भी लिया। इस उत्कृष्ट कार्य के लिये स्वामी ने सभी को धन्यवाद देते हुये कहा कि इसी तरह सभी जुटे रहे और धरती के पर्यावरण को हरित व समृद्ध बनाये रखने में योगदान प्रदान करे।

कार्यक्रम के दौरान वातावरण संकल्पों की ऊर्जा से गुंजायमान हो उठा। अनेक श्रद्धालुओं, समाजसेवियों, युवाओं एवं उपस्थित जनसमूह ने एक पौधे से लेकर 11 हजार, 21 हजार तथा 51 हजार पौधे लगाने के संकल्प लिए। यह केवल पौधारोपण का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि प्रकृति के प्रति उत्तरदायित्व, पर्यावरणीय चेतना और भावी पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का सामूहिक संकल्प बन गया।

इस अवसर पर विनीत माथुर (न्यायाधीश, राजस्थान उच्च न्यायालय, जोधपुर), घनश्याम सोनी (निदेशक, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो, जोधपुर) सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों एवं गणमान्य नागरिकों की गरिमामयी उपस्थिति रही।

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