Sunny Deol And Aksahye Khanna Ikka 5 Weak Points: सनी देओल और अक्षय खन्ना, ये दो ऐसे नाम हैं जिन्हें एक साथ स्क्रीन पर देखना किसी भी फिल्म पगलू के लिए किसी ट्रीट से कम नहीं है. ‘बॉर्डर’ और ‘आप की खातिर’ जैसी फिल्मों में साथ नजर आ चुके इन दोनों एक्टिंग के पावरहाउस की नई फिल्म ‘इक्का’ सीधे नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो चुकी है. जब इस थ्रिलर फिल्म का ऐलान हुआ था, तभी से फैंस के बीच भारी बज़ था कि दो एक्टर ओटीटी पर धमाका करने वाले हैं. लेकिन फिल्म देखने के बाद दर्शकों के हाथ मनोरंजन से ज्यादा निराशा लगी है.
सनी देओल का वो जाना-पहचाना एंग्री यंग मैन वाला स्वैग और अक्षय खन्ना की एक्टिंग भी इस डूबती नैया को पार नहीं लगा पाई. फिल्म में वो दम था कि ये साल की सबसे बड़ी ओटीटी ब्लॉकबस्टर बन सकती थी, लेकिन कुछ ऐसी कमियां रहीं जिन्होंने पूरे खेल को बिगाड़ कर रख दिया. अगर मेकर्स ने इन 5 बड़े मोर्चों पर थोड़ा और फोकस किया होता, तो आज ‘इक्का’ की कहानी कुछ और ही होती,
1. कमजोर और प्रेडिक्टेबल कहानीकिसी भी सस्पेंस-थ्रिलर फिल्म की जान होती है उसकी कहानी. लेकिन ‘इक्का’ की सबसे कमजोर कड़ी इसकी स्क्रिप्ट ही साबित हुई. फिल्म की कहानी इतनी पुरानी और घिसी-पिटी लगती है कि दर्शक पहले आधे घंटे में ही अंदाजा लगा लेते हैं कि आगे क्या होने वाला है. जब थ्रिलर फिल्म में कोई बड़ा ट्विस्ट या सरप्राइज ही न बचे, तो दर्शकों की दिलचस्पी खत्म होने लगती है. मेकर्स अगर प्लॉट को थोड़ा और उलझाते और नए जमाने का टच देते, तो कहानी में धार आ सकती थी.
2. सनी देओल के ‘मास’ एलिमेंट को मिस करनासनी देओल को उनके फैन्स पर्दे पर धाकड़ एक्शन और दमदार डायलॉग डिलीवरी के लिए पसंद करते हैं. ‘इक्का’ में उनके किरदार को काफी सीरियस बनाने की कोशिश की गई है, जो कि अच्छी बात है, लेकिन उनके उस ‘लार्जर देन लाइफ’ वाले अंदाज को पूरी तरह से किनारे कर दिया गया, जिसका फैंस इंतजार कर रहे थे. फिल्म में उनके पास ऐसे मोमेंट्स बहुत कम हैं, जहां वो अपने खास अंदाज में महफिल लूट सकें. उनके किरदार का ग्राफ काफी सपाट नजर आता है.
3. दोनों स्टार्स के बीच टकराव (फेस-ऑफ) की कमीजब आपके पास सनी देओल और अक्षय खन्ना जैसे दो कमाल के एक्टर्स हों, तब दर्शक उनके बीच एक जोरदार दिमागी या फिजिकल मुकाबला देखना चाहते हैं. फिल्म में कई ऐसे मौके थे, जहां दोनों के बीच एक जबरदस्त ‘बिल्ली और चूहे’ का खेल दिखाया जा सकता था, लेकिन मेकर्स ने इस सुनहरे मौके को हाथ से जाने दिया. दोनों के बीच के सीन्स में वो टशन, कशमकश और तनाव महसूस ही नहीं होते, जो इस तरह की फिल्मों की यूएसपी होती है.
4. धीमी रफ्तार और बोरिंग स्क्रीनप्लेएक थ्रिलर फिल्म की रफ्तार इतनी तेज होनी चाहिए कि दर्शक को पलक झपकाने का भी मौका न मिले. मगर ‘इक्का’ का स्क्रीनप्ले बेहद सुस्त है. पहले हाफ में कहानी बहुत धीमी गति से आगे बढ़ती है और किरदारों को एस्टेब्लिश करने में ही जरूरत से ज्यादा वक्त ले लिया जाता है. सेकेंड हाफ में जब कहानी रफ्तार पकड़ने की कोशिश करती है, तब तक काफी देर हो चुकी होती है. क्रिस्प एडिटिंग की कमी साफ खलती है. कई सीन्स को आसानी से ट्रिम किया जा सकता था.
5. कमजोर विजुअल्स और फीका बैकग्राउंड स्कोरआजकल ओटीटी पर इंटरनेशनल लेवल का कंटेंट मौजूद है. इसलिए दर्शक तकनीकी रूप से भी बेहतरीन सिनेमा देखना पसंद करते हैं. ‘इक्का’ का बैकग्राउंड म्यूजिक सीन्स में वो रोमांच और डर पैदा करने में नाकाम रहता है, जो एक थ्रिलर के लिए जरूरी है. इसके साथ ही फिल्म की सिनेमैटोग्राफी और विजुअल्स भी काफी ठंडे हैं. एक बड़े बजट की फिल्म होने के बावजूद इसमें वो ग्रैंडनेस या डार्क थ्रिलर वाली फील गायब दिखती है.
ये भी पढ़ें-
फिर जेल जाएंगे एक्टर राजपाल यादव? चेक बाउंस मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने बरकरार रखी सजा
4000 करोड़ी रामायण के दो ट्रेलर लॉन्च होंगे? दिल्ली के बाद यहां भी कर ली सबसे धांसू तैयारी
कुल मिलाकर कहें तो ‘इक्का’ एक ऐसा मौका था, जिसे मेकर्स ने अपनी ढीली लिखावट और कमजोर विजुअल्स की वजह से गंवा दिया. सनी देओल और अक्षय खन्ना ने अपनी तरफ से पूरी ईमानदारी से काम किया है, लेकिन जब बुनियाद ही कमजोर हो तो इमारत का ढहना तय है. अगर आप इन दोनों स्टार्स के जबरा फैन हैं, तो इसे एक बार के लिए देख सकते हैं, लेकिन एक मास्टरपीस थ्रिलर की उम्मीद लेकर बैठेंगे तो मायूसी ही हाथ लगेगी.