Saif Ali Khan Omkara: विलियम शेक्सपियर के मशहूर नाटक को जब उत्तर प्रदेश की बीहड़ जमीन और बंदूकों की आवाज के बीच ढाला गया, तो एक ऐसा किरदार पैदा हुआ जिसने हिंदी सिनेमा के सारे विलेन्स की छुट्टी कर दी. हम बात कर रहे हैं फिल्म ‘ओमकारा’ के उस किरदार की, जिसे आज भी दुनिया ‘लंगड़ा त्यागी’ के नाम से जानती है. साल 2006 में आई विशाल भारद्वाज की फिल्म ‘ओमकारा’ भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन फिल्मों में से एक मानी जाती है.
विलियम शेक्सपियर के नाटक ‘ओथेलो’ पर आधारित इस फिल्म में सैफ अली खान ने ‘लंगड़ा त्यागी’ का जो किरदार निभाया था, उसने उनके पूरे करियर की दिशा ही बदल दी. ‘दिल चाहता है’ और ‘हम तुम’ जैसी फिल्मों से फीमेल फैन्स के दिलों पर राज करने वाले सैफ ने जब लंगड़ा त्यागी बनकर स्क्रीन पर एंट्री ली, तो दर्शक उन्हें पहचान तक नहीं पाए थे. आज जान लेते हैं कि इस आइकॉनिक विलेन के अनोखे गेटअप और बोलचाल के लिए सैफ ने कितनी कड़ी मेहनत की थी.
दरअसल, इस फिल्म और किरदार से जुड़ा एक बेहद दिलचस्प फैक्ट ये भी है कि विशाल भारद्वाज इस रोल के लिए पहले आमिर खान को कास्ट करना चाहते थे. आमिर खुद भी इस किरदार को करने के लिए काफी उत्सुक थे, लेकिन कुछ डेट्स और बिजी शेड्यूल के चलते बात नहीं बन पाई. उसके बाद विशाल भारद्वाज ने सैफ अली खान पर भरोसा जताया. जब सैफ को ये रोल ऑफर हुआ, तब कई लोगों ने उन्हें मना किया था कि एक विलेन का रोल उनके करियर को नुकसान पहुंचा सकता है, लेकिन सैफ ने इस चुनौती को स्वीकार किया.
एक पैर को पतला और बेजान दिखाने के पीछे का क्या था राज?फिल्म में लंगड़ा त्यागी का एक पैर काम नहीं करता है, जिसकी वजह से वह लंगड़ाकर चलता था. स्क्रीन पर उनके एक पैर को दूसरे पैर के मुकाबले कमजोर और पतला दिखाने के लिए मेकर्स ने किसी वीएफएक्स (VFX) का सहारा नहीं लिया, बल्कि ये कमाल कॉस्ट्यूम डिजाइनिंग और सैफ की कड़ी मेहनत थी.
कॉस्ट्यूम का दिमाग: सैफ को जो खाकी और ढीले-ढाले देसी कुर्ते-पायजामे पहनाए गए थे, उन्हें इस तरह से अल्टर और डिजाइन किया गया था कि जब वो चलते थे, तो उनका एक पैर झुका हुआ और काफी कमजोर नजर आता था.
महीनों की प्रैक्टिस: सैफ ने खुद अपने इंटरव्यू में बताया था कि एक पैर को पतला और बेजान दिखाने के लिए उन्होंने अपनी चाल पर हफ्तों काम किया था. वो अपने एक पैर पर पूरा वजन डालते थे और दूसरे पैर को सिर्फ घसीटते हुए आगे बढ़ाते थे. इस फिजिकल बैलेंस की वजह से स्क्रीन पर उनका एक पैर पूरी तरह से कमजोर और पतला दिखाई दिया.
लुक के लिए कटवाए बाल, दांत किए पीलेसैफ को इस लुक में ढालने के लिए फिल्म के सेट पर घंटों का समय लगता था. विशाल भारद्वाज चाहते थे कि सैफ कहीं से भी पटौदी के नवाब न लगें. इसके लिए सैफ के घने बालों को बेहद छोटे और भद्दे तरीके से कटवाया गया था. उनके चेहरे पर हमेशा धूल-मिट्टी और पसीने का लुक दिया जाता था. सबसे बड़ी बात, उनके दांतों पर एक खास तरह का पीला और गंदा पेंट (Nicotine Stain) लगाया जाता था, ताकि लगे कि वो सालों से तंबाकू चबा रहे हैं. इस लुक को देखकर खुद सैफ की मां शर्मिला टैगोर भी एक बार के लिए हैरान रह गई थीं.
ऐसे सीखी खड़ी बोलीसैफ अली खान की परवरिश और पढ़ाई-लिखाई विदेश में हुई है, जिसके कारण उनकी हिंदी में हमेशा एक अंग्रेजी लहजा सुनाई देता है. ऐसे में पश्चिमी उत्तर प्रदेश (मेरठ-हापुड़ बेल्ट) की ठेठ खड़ी बोली को अपने अंदाज में ढालना सैफ के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी. विशाल भारद्वाज ने सैफ के लिए एक लोकल डिक्शन और लैंग्वेज ट्रेनर (ट्यूटर) रखा था. सैफ रोजाना घंटों उस ट्रेनर के साथ बैठकर शब्दों के सही उच्चारण और टोन की प्रैक्टिस करते थे.
सैफ ने शूटिंग शुरू होने से महीनों पहले अपनी आम जिंदगी में भी अंग्रेजी बोलना काफी कम कर दिया था. वो सेट पर और सेट के बाहर भी उसी यूपी वाले लहजे में बात करते थे ताकि ये बोली उनके स्वभाव में आ जाए.
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विशाल भारद्वाज के कड़े निर्देशन और सैफ अली खान की मेहनत का नतीजा था कि जब ‘ओमकारा’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो मुख्य हीरो से ज्यादा चर्चा लंगड़ा त्यागी की हुई. इस किरदार के लिए उन्हें फिल्मफेयर की तरफ से बेस्ट विलेन का अवॉर्ड भी मिला. इस एक किरदार ने बॉलीवुड में सैफ अली खान को एक बेहद वर्सेटाइल एक्टर के तौर पर नई पहचान दिलाई.