Ashadha Pradosh Vrat 2026: आषाढ़ के पहले प्रदोष व्रत पर भोलेनाथ को लगाएं ये महाभोग, पूरी होगी हर मनोकामना!
TV9 Bharatvarsh July 11, 2026 11:42 AM

Ravi Pradosh Vrat 2026: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है. यह दिन देवों के देव महादेव को समर्पित होता है. मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से इस दिन व्रत रखता है और भगवान शिव की आराधना करता है, उसके जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं. इस बार आषाढ़ मास का पहला प्रदोष व्रत बेहद खास संयोग लेकर आ रहा है. यह व्रत रविवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे ‘रवि प्रदोष व्रत’ कहा जाएगा. रवि प्रदोष व्रत रखने से न सिर्फ भोलेनाथ की कृपा मिलती है, बल्कि सूर्य देव के आशीर्वाद से आरोग्य और समाज में मान-सम्मान की भी प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं इस खास दिन भोलेनाथ को किन-किन चीजों का भोग लगाना चाहिए.

आषाढ़ रवि प्रदोष व्रत 2026 शुभ मुहूर्त

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 12 जुलाई 2026 को सुबह 2 बजकर 04 मिनट पर शुरू होगी और 13 जुलाई को रात 10 बजकर 29 मिनट पर समाप्त होगी. प्रदोष व्रत में भगवान शिव की पूजा प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के समय की जाती है. इसलिए इस वर्ष आषाढ़ का रवि प्रदोष व्रत 12 जुलाई 2026, रविवार को रखा जाएगा.

भोलेनाथ को कौन-सा महाभोग लगाएं?

प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव को खीर का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है. दूध, चावल और चीनी से बनी खीर शिवजी को बहुत प्रिय मानी जाती है. मान्यता है कि खीर का भोग लगाने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और धन-धान्य की वृद्धि होती है. इसके अलावा मखाने की खीर भी भगवान शिव को अर्पित की जा सकती है. भोग लगाने के बाद इसे प्रसाद के रूप में परिवार के सभी सदस्यों में बांटना शुभ माना जाता है.

इन चीजों का भी करें अर्पण

प्रदोष व्रत की पूजा में भगवान शिव को भोग के साथ कुछ विशेष पूजन सामग्री भी जरूर अर्पित करनी चाहिए. शिवलिंग पर गंगाजल, कच्चा दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से अभिषेक करें. इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, भांग, सफेद चंदन, सफेद फूल, अक्षत और मौसमी फल अर्पित करें. माना जाता है कि इन चीजों से भगवान शिव जल्दी खुश होते हैं.

ऐसे करें प्रदोष व्रत की पूजा

प्रदोष व्रत के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर व्रत का संकल्प लें. पूरे दिन सात्विक जीवनशैली अपनाएं और भगवान शिव का ध्यान करते रहें. प्रदोष काल में शिवलिंग का विधि-विधान से अभिषेक करें. इसके बाद बेलपत्र, फूल और भोग अर्पित करें. पूजा के दौरान ओम नमः शिवाय मंत्र का जाप करें और शिव चालीसा या शिव आरती का पाठ करें. आखिर में भगवान शिव और माता पार्वती से परिवार की सुख-समृद्धि और मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करें.

प्रदोष व्रत का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रवि प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है. माना जाता है कि इस दिन शिवजी को प्रिय भोग अर्पित करने और पूरे विधि-विधान से पूजा करने पर विवाह, संतान, स्वास्थ्य, करियर, धन और पारिवारिक सुख से जुड़ी मनोकामनाएं पूरी हो सकती हैं. इसी वजह से प्रदोष व्रत को भगवान शिव की आराधना के सबसे फलदायी व्रतों में से एक माना गया है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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