Ashadha Amavasya 2026: 13 या 14 जुलाई? जानें आषाढ़ अमावस्या की सही तारीख और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
TV9 Bharatvarsh July 11, 2026 01:43 PM

Ashadha Amavasya 2026 Date: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि को पूजा-पाठ, स्नान, दान और पितरों के तर्पण के लिए बेहद शुभ माना जाता है. हर महीने आने वाली अमावस्या का अपना अलग महत्व होता है, लेकिन आषाढ़ अमावस्या को विशेष रूप से पितरों की शांति, पुण्य प्राप्ति और सुख-समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान, जरूरतमंदों को दान और विधि-विधान से पूजा करने का विशेष महत्व बताया गया है. साल 2026 में आषाढ़ अमावस्या की तारीख को लेकर कई लोगों के मन में भ्रम है कि यह 13 जुलाई को मनाई जाएगी या 14 जुलाई को. इसकी वजह अमावस्या तिथि का दो दिनों तक रहना है. आइए जानते हैं कि पंचांग के अनुसार सही तिथि, स्नान-दान का शुभ समय और पूजा विधि के बारे में.

कब है आषाढ़ अमावस्या 2026?

पंचांग के अनुसार, आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि 13 जुलाई 2026, सोमवार को शाम 6 बजकर 49 मिनट पर शुरू होगी और 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर 3 बजकर 12 मिनट पर समाप्त होगी. हिंदू धर्म में अधिकांश व्रत, पर्व और अमावस्या का निर्णय उदया तिथि के आधार पर किया जाता है. चूंकि 14 जुलाई को सूर्योदय के समय अमावस्या तिथि रहेगी, इसलिए आषाढ़ अमावस्या 14 जुलाई 2026, मंगलवार को मनाई जाएगी. इसी दिन स्नान, दान, पितृ तर्पण, श्राद्ध और पूजा-पाठ करना शुभ रहेगा.

स्नान-दान का शुभ मुहूर्त

आषाढ़ अमावस्या के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना सबसे शुभ माना जाता है. यदि किसी पवित्र नदी में स्नान संभव न हो तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है. सूर्योदय के बाद से लेकर दोपहर तक का समय दान, तर्पण और पूजा के लिए शुभ माना गया है. इस दौरान तिल, काला उड़द, चावल, कपड़े, अन्न और दक्षिणा का दान करने से विशेष पुण्य मिलने की मान्यता है.

आषाढ़ अमावस्या की पूजा विधि

आषाढ़ अमावस्या के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े धारण करें. इसके बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और घर के पूजा स्थल में भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और शनिदेव की पूजा करें. यदि हो सके तो पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं. पितरों के निमित्त तिल मिश्रित जल से तर्पण करें और उनकी शांति के लिए प्रार्थना करें. इसके बाद जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, फल का दान करें.

इस दिन क्या करें?

आषाढ़ अमावस्या पर पितरों को याद करें, तर्पण करें और गरीब एवं जरूरतमंद लोगों की सहायता करें. धार्मिक ग्रंथों का पाठ, भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप और पीपल के वृक्ष की पूजा करना भी शुभ माना जाता है. यदि हो सके तो किसी गौशाला में चारा या भोजन का दान करें.

आषाढ़ अमावस्या पर दान का महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या पर किया गया दान कई गुना पुण्यदायी माना जाता है. विशेष रूप से तिल, अन्न, वस्त्र, छाता, जल से भरा पात्र और दक्षिणा का दान शुभ माना गया है. मान्यता है कि इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख, शांति तथा समृद्धि बनी रहती है.

आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है. इस दिन तर्पण और श्राद्ध करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है. मान्यता है कि जिन लोगों की कुंडली में पितृ दोष हो, वे इस दिन विधि-विधान से तर्पण करें तो उन्हें लाभ मिल सकता है. इसके अलावा आषाढ़ अमावस्या पर माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि का वास होता है. वहीं शनिदेव की पूजा और काले तिल का दान करने से शनि संबंधी कष्टों में भी राहत मिलने की मान्यता है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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