रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार (11 जुलाई) को बताया कि मिडिल ईस्ट जंग के दौरान भारतीय नेवी ने युद्धग्रस्त क्षेत्र से 18 मर्चेंट वेसल को सुरक्षित तरीके से एस्कॉर्ट किया, जिनमें करीब 9000 करोड़ का सामान लदा था. भारतीय तकनीक और खासकर मिसाइलों को जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि INS महेन्द्रगिरी में हमारी BrahMos surface-to-surface missile fit हो सकती है, जो दुनिया की सबसे तेज और सबसे घातक क्रूज मिसाइल (cruise missiles) में से एक है.
राजनाथ सिंह ने बताया कि इसमें मल्टीफंक्शन रडार के साथ-साथ (Long Range Surface-to-Air Missiles) लंबी दूरी की जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल का भी कॉम्बिनेशन है, जो आकाश से आने वाले किसी भी खतरे को दूर से ही पहचानकर नष्ट करने में पूरी तरह सक्षम है. इसमें स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर है. एक टॉरपीडो लॉन्चर हैं. इसके अलावा इंटीग्रेटेड एंटी-सबमरीन डिफेंस सिस्टम है, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सूट भी है और क्लोज़-इन वेपन सिस्टम है. ये तमाम चीजें इसे महेन्द्रगिरी पर्वत के समान ही अभेद और मजबूत बनाती हैं.
ईरान जंग में दिखी नेवी की असल ताकत
रक्षा मंत्री के कार्यालय की तरफ से रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए पोस्ट में कहा गया कि हाल की घटनाओं ने भी एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि एक सक्षम और जिम्मेदार नौसेना किसी भी राष्ट्र के लिए कितनी आवश्यक होती है. वेस्ट एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद इंडियन नेवी (Indian Navy) ने ऑपरेशन ऊर्जा सुरक्षा के माध्यम से 9,000 करोड़ रूपए से अधिक मूल्य के आवश्यक कॉर्गो को लेकर चल रहे 18 मर्चेंट वेसल को सुरक्षित एस्कॉर्ट किया.
हाल की घटनाओं ने भी एक बार फिर यह सिद्ध किया है कि एक सक्षम और responsive Navy किसी भी राष्ट्र के लिए कितनी आवश्यक होती है। West एशिया में conflict शुरू होने के बाद, Indian Navy ने Operation ऊर्जा सुरक्षा के माध्यम से, 9,000 करोड़ रूपए से अधिक मूल्य के आवश्यक cargo को लेकर चल…
— रक्षा मंत्री कार्यालय/ RMO India (@DefenceMinIndia) July 11, 2026
शिप खरीदना लंबी अवधि का निवेश- राजनाथ
बयान में आगे कहा गया कि हमारी नेवी केवल एक लड़ाकू फोर्स नहीं बल्कि भारत के इकोनॉमिक इंटरेस्ट की भी एक मजबूत संरक्षक बनकर उभरी है. हर शिप के साथ हमारा इको सिस्टम और मैच्योर होता जा रहा है और अधिक कुशल होता जा रहा है और अधिक विश्वसनीय होता जा रहा है. हर नया जहाज भारत के समुद्री भविष्य में किया गया लंबी अवधि का निवेश भी होता है.
(इनपुट- नीरज राजपूत)