Ashadha Amavasya 2026: सनातन धर्म में अमावस्या तिथि को खास महत्व दिया गया है. ये तिथि स्नान-दान और पूजा-पाठ के साथ-साथ पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है. ये तिथि पितरों को ही समर्पित की गई है. धार्मिक मान्यता है कि इस दिन पितृ कर्म, दान-पुण्य और विशेष उपायों को करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है. आषाढ़ माह की अमावस्या आने वाली है. इसे आषाढ़ी अमावस्या भी कहा जाता है.
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस साल आषाढ़ माह की अमावस्या 14 जुलाई को मंगलवार के दिन मनाई जाएगी. शास्त्रों में मंगलवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को भौमवती अमावस्या बताया गया है, इसलिए आषाढ़ की इस अमावस्या को भौमवती अमावस्या भी कहा जा रहा है. आइए जानते हैं कि आषाढ़ या कहें कि भौमवती अमावस्या पर पितरों की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहने वाला है? साथ ही पितृ पूजा की विधि भी जानते हैं.
आषाढ़ अमावस्या 2026 पर पितरों की पूजा का मुहूर्तआषाढ़ अमावस्या के दिन अभिजीत मुहूर्त पितरों की पूजा के लिए सर्वोत्तम रहेगा. इस दिन अभिजीत मुहूर्त दोपहर को 12 बजे शुरू हो जाएगा और 12 बजकर 55 मिनट तक रहने वाला है. इस समय आप पितरों की पूजा व तर्पण करें. इस दिन संध्या काल की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम को 07 बजकर 21 मिनट पर शुरू होगा. पूजा का ये शुभ मुहूर्त रात को 08 बजकर 22 मिनट तक रहेगा.
वहीं इस दिन स्नान-दान ब्रह्म मुहूर्त में ही करना शुभ रहेगा. इस दिन स्नान-दान का शुभ मुहूर्त सुबह 04 बजकर 11 मिनट पर शुरू होगा और ये 04 बजकर 52 मिनट तक रहेगा.
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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.