अमेरिका के जिस सांसद की मौत का जश्न मना रहा ईरान, वो करा रहे थे सऊदी अरब और इजराइल की डील
TV9 Bharatvarsh July 13, 2026 03:43 PM

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने अपनी मौत से कुछ हफ़्ते पहले इज़राइल और सऊदी अरब के बीच ऐतिहासिक नॉर्मलाइजेशन की डील कराने के लिए एक नई पहल पर काम किया था. एक्सियोस की रिपोर्ट के मुताबिक, ग्राहम जो रिपब्लिकन पार्टी के एक अनुभवी नेता और इजराइल के बड़े समर्थक थे. कई सालों से सऊदी-इजराइल रिश्तों को नॉर्मल बनाने की दिशा में काम कर रहे थे, जिसमें बाइडेन प्रशासन का समय भी शामिल है. उनका मानना था कि ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजराइल अभियान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए ऐसी डील कराने का मौका बना दिया है.

खबरों के अनुसार, सीनेटर चाहते थे कि इजराइल में अक्टूबर के आखिर में होने वाले चुनावों और अमेरिका में मिडटर्म चुनावों के बाद एक जोरदार डिप्लोमैटिक कोशिश शुरू की जाए, ताकि जनवरी में नई अमेरिकी कांग्रेस के शपथ लेने से पहले डील हो सके. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ग्राहम ने हाल ही में ट्रंप से आग्रह किया था कि अगर पहल शुरू होने से पहले डिप्लोमेसी के ज़रिए संकट का हल नहीं निकलता है, तो होर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के लिए एक छोटा लेकिन ज़बरदस्त मिलिट्री ऑपरेशन चलाने की मंज़ूरी दी जाए.

मई में ही शुरू की थी चर्चा

रिपोर्ट के अनुसार, मई के मध्य में ग्राहम ने ट्रंप के साथ इस आइडिया पर चर्चा शुरू की और उनसे कहा कि ईरान युद्ध के “अगले दिन” इसी पर फोकस किया जाना चाहिए. एक्सियोस के मुताबिक, उस बातचीत के एक हफ्ते बाद ही मई में एक कॉन्फ्रेंस कॉल के दौरान ट्रंप ने कई अरब और मुस्लिम देशों के नेताओं से इजराइल के साथ रिश्ते बनाने की अपील की थी, बशर्ते ईरान के साथ कोई समझौता हो जाए. रिपोर्ट में आगे बताया गया है कि हाल के हफ्तो में ग्राहम ने ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकारों जैसे जेरेड कुशनर के साथ-साथ प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के करीबी सहयोगी रॉन डर्मर, वॉशिंगटन में सऊदी राजदूत रीमा बिंत बंदर अल सऊद और सऊदी विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान के साथ भी इस पहल पर चर्चा की थी. उन्होंने अगस्त में इजराइल और सऊदी अरब दोनों का दौरा करने की योजना बनाई थी ताकि किसी बड़ी सफलता की संभावना का आकलन किया जा सके और संभवतः सितंबर में डील की दिशा में काम शुरू किया जा सके.

साथ ही उनकी योजना ट्रंप और उनकी टीम के साथ मिलकर काम करने की थी ताकि चुनाव से पहले नेतन्याहू और इज़राइल के अन्य नेताओं को यह साफ़ किया जा सके कि वॉशिंगटन की यही उम्मीद है. सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले भी इज़राइल के साथ रिश्ते नॉर्मल करने की इच्छा जता चुके हैं, लेकिन रियाद लगातार इस बात पर जोर देता रहा है कि किसी भी डील में फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना की दिशा में एक ऐसा रास्ता शामिल होना चाहिए जिसे बदला न जा सके और जो तय टाइमलाइन के साथ हो. नेतन्याहू के मौजूदा गठबंधन ने इस शर्त को ठुकरा दिया है. ऐसे में इज़राइल की अगली सरकार से इस तरह का वादा हासिल करना बड़ी चुनौती होगी, खासकर तब जब वॉशिंगटन गठबंधन को लेकर चल रही बातचीत के दौरान उस पर दबाव बनाना चाहता हो.

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