Bharatpur Shiksha Mitra Abhiyan: समाज में बदलाव की शुरुआत अक्सर एक छोटे से प्रयास से होती है. राजस्थान के भरतपुर में ऐसा ही एक प्रेरणादायक प्रयास शिक्षा मित्र अभियान’ आज सैकड़ों जरूरतमंद बच्चों के भविष्य को नई दिशा दे रहा है. करीब 7 साल पहले शुरू हुआ यह अभियान अब एक सामाजिक आंदोलन बना चुका है. जिसकी बदौलत आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सैकड़ों बच्चे अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं.
अभियान की शुरुआत समाजसेवी गिरधारी लाल गुप्ता की उस सोच से हुई, जिसमें उनका मानना था कि कई प्रतिभाशाली छात्र केवल आर्थिक तंगी के कारण पढ़ाई बीच में छोड़ देते हैं. ऐसे बच्चों की शिक्षा का जिम्मा समाज को मिलकर उठाना चाहिए. इसी उद्देश्य से शुरू हुए अभियान में शुरुआत में केवल पांच बच्चों की स्कूल फीस जमा कराई गई थी, लेकिन आज यह कारवां 100 से अधिक सहयोगियों के साथ आगे बढ़ रहा है.
पीएचडी और MBBS की पढ़ाई कर रहे छात्रपिछले सात वर्षों में 353 से अधिक स्टूडेंट्स की स्कूल फीस भरकर उन्हें शिक्षा से जोड़ा गया है. इस अभियान का असर अब साफ दिखाई देने लगा है. जिन बच्चों की कभी फीस भरने में मदद की गई थी, उनमें से कई आज उच्च शिक्षा हासिल कर रहे हैं. अभियान के सहयोग से एक छात्रा केंद्रीय विश्वविद्यालय से पीएचडी कर रही हैं, जबकि एक छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई कर डॉक्टर बनने की तैयारी में है. इसके अलावा चार छात्राएं पीएचडी और 10 से अधिक छात्र विभिन्न प्रोफेशनल कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं.
क्या है ‘शिक्षा मित्र अभियान’?शिक्षा मित्र अभियान केवल फीस भरने तक सीमित नहीं है. इसके तहत जरूरतमंद स्टूडेंट्स को ड्रेस, कॉपियां, स्लेट, पेंसिल, रबर, रूलर और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जाती है. सात वर्षों में 5000 से अधिक स्टूडेंट्स को शैक्षणिक सामग्री बांटी जा चुकी है, जिसमें लगभग 10 हजार कॉपियां, 1200 स्लेट और 6 हजार से अधिक पेंसिल, रबर व रूलर शामिल हैं.
स्कूलों को भी उपलब्ध कराया जाता है संसाधनइसके अलावा अभियान के माध्यम से कई सरकारी और ग्रामीण विद्यालयों को भी आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं. अब तक स्कूलों में 8 वाटर कूलर, 7 अलमारियां और 55 स्टूल-कुर्सियां अभियान की ओर से दी जा चुकी हैं. 7 साल पहले 5 बच्चों से शुरू हुआ ‘शिक्षा मित्र अभियान’ आज सैकड़ों गरीब परिवारों और बच्चों के लिए उम्मीद की किरण बन चुका है.
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