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भोपाल स्थित राज्य संग्रहालय में रखी गई लाल बलुआ पत्थर से बनी इस दुर्लभ प्रतिमा की डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और हाई-रिजॉल्यूशन 3D मैपिंग के जरिए पुरातत्व विशेषज्ञों ने इसके छिपे हुए प्रतीकों को समझा। करीब 900 साल से चली आ रही पहचान अब बदल गई है। पुरातत्व विशेषज्ञों के मुताबिक इस प्रतिमा की सबसे बड़ी पहचान वह चीज बनी जो इसमें मौजूद नहीं थी। आमतौर पर मां सरस्वती की प्रतिमाओं में वीणा प्रमुख रूप से दिखाई देती है, लेकिन इस मूर्ति में वीणा नहीं है।
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पुरातत्वविदों के मुताबिक चार भुजाओं वाली यह देवी ललितासन मुद्रा में विराजमान हैं और उनके हाथों में माला, कमल और वेद दिखाई देते हैं। प्रतिमा के पास बारीकी से उकेरा गया हंस (राजहंस) भी मौजूद है, जो पवित्र ज्ञान और आध्यात्मिक विवेक का प्रतीक माना जाता है। आकाशीय पुष्प अर्पित करने वाले देवदूत जैसे चित्र भी देवी की दिव्यता को दर्शाते हैं।