Raksha Bandhan 2026: क्या है भद्रा काल और इसमें राखी बांधना क्यों माना जाता है अशुभ? दूर करें अपनी उलझन
TV9 Bharatvarsh July 15, 2026 04:43 PM

Raksha Bandhan 2026 Date: द्रिक पंचांग के अनुसार, भाई-बहन के अटूट प्रेम का प्रतीक रक्षाबंधन का त्योहार इस साल 28 अगस्त, दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा. इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करेंगी. हालांकि, हर साल की तरह इस बार भी त्योहार की तारीख आते ही लोगों के मन में भद्रा काल को लेकर उलझनें शुरू हो गई हैं.
अक्सर कहा जाता है कि भद्रा काल में राखी नहीं बांधनी चाहिए. लेकिन आखिर यह भद्रा काल है क्या और इसमें शुभ कार्य करना क्यों वर्जित माना जाता है? आइए जानते हैं इस बारे में धार्मिक मान्यताएं कहती हैं.

क्या होता है भद्रा काल?

पंचांग में भद्रा को एक विशेष काल माना जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भद्रा, सूर्य देव और छाया की पुत्री तथा भगवान शनिदेव की बहन मानी जाती हैं. पंचांग में जब भद्रा का वास पृथ्वी लोक पर होता है, तब उस समय को शुभ कार्यों के लिए उचित नहीं माना जाता. मान्यता है कि इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञ और रक्षाबंधन जैसे मांगलिक कार्य करने से बचना चाहिए. हालांकि पूजा-पाठ, जप, तप और भगवान की आराधना पर इसका कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं माना जाता.

कब है रक्षाबंधन 2026?

पंचांग के अनुसार,, श्रावण पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त 2026 को सुबह 09 बजकर 09 मिनट पर होगी. वहीं पूर्णिमा तिथि का समापन 28 अगस्त 2026 को सुबह 09 बजकर 48 मिनट पर होगा. हिंदू धर्म में अधिकांश त्योहारों का निर्धारण उदया तिथि के आधार पर किया जाता है. इसलिए रक्षाबंधन का पर्व 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा.

भद्रा काल में राखी बांधना क्यों माना जाता है अशुभ?

धार्मिक मान्यता के अनुसार भद्रा का स्वभाव काफी उग्र बताया गया है. कहा जाता है कि ब्रह्माजी ने उन्हें यह वरदान दिया था कि जो भी व्यक्ति भद्रा काल में शुभ कार्य करेगा, उसे उस कार्य का पूरा फल नहीं मिलेगा. इसी कारण से इस समय शुभ संस्कार और मांगलिक कार्य टालने की परंपरा बनी. रक्षाबंधन भी एक शुभ और मंगलमय पर्व है, इसलिए बहनें भद्रा समाप्त होने के बाद ही अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं. ऐसा करने से रक्षा सूत्र का पूरा शुभ फल मिलने की मान्यता है.

रावण से जुड़ी पौराणिक कथा

भद्रा काल में राखी न बांधने के पीछे एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा भी सुनाई जाती है. मान्यता है कि लंका के राजा रावण की बहन शूर्पणखा ने उसे भद्रा काल में ही रक्षा सूत्र बांधा था. इसके बाद रावण का विनाश हुआ और उसकी लंका भी नष्ट हो गई. यही कारण है कि रक्षाबंधन पर भद्रा काल से बचने की परंपरा चली आ रही है. हालांकि यह कथा धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और इसे आस्था के रूप में देखा जाता है.

क्या हर भद्रा अशुभ होती है?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार ऐसा नहीं है कि हर भद्रा पूरी तरह अशुभ होती है. भद्रा का प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करता है कि उसका वास किस लोक में है. जब भद्रा पृथ्वी लोक में होती है, तब शुभ कार्यों से बचने की सलाह दी जाती है. वहीं यदि भद्रा स्वर्ग लोक या पाताल लोक में हो, तो उसका प्रभाव अलग माना जाता है. इसी वजह से हर साल पंचांग देखकर भद्रा का समय और उसका वास जानना जरूरी माना जाता है.

भद्रा समाप्त होने के बाद ही बांधें राखी

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार रक्षाबंधन पर हमेशा शुभ मुहूर्त और भद्रा समाप्त होने के बाद ही राखी बांधनी चाहिए. इससे पर्व का धार्मिक महत्व बना रहता है और शुभ फल की प्राप्ति होती है.

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Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.

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