ये कहना गलत नहीं होगा कि AI लोगों की नौकरी का काल बनकर आया है, अब तक हजारों लोग Artifical Intelligence के कारण नौकरी गंवा चुके हैं. कई बड़ी कंपनियां एआई में भारी निवेश कर बड़े पैमाने पर कर्मचारियों को कंपनी से बाहर का रास्ता दिखा रही हैं. अब तो आलम कुछ यूं है कि छंटनी के लिए किसे टारगेट किया जाएगा, ये भी एआई ही बता रहा है. हाल ही में इंस्टाग्राम और फेसबुक की पैरेंट कंपनी मेटा से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, कंपनी पर इस बात का आरोप है कि कंपनी ने बीमार कर्मचारियों की पहचान करने के लिए एआई का इस्तेमाल किया है और फिर बीमार कर्मचारियों का पता लगने के बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया.
एआई की मदद से कर्मचारियों को किया टारगेटमेटा के 26 कर्मचारियों के एक ग्रुप ने कंपनी पर केस किया है, उनका दावा है कि कंपनी ने छंटनी के लिए लोगों को चुनने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया और ज्यादातर उन लोगों को टारगेट किया जो मेडिकल, पैरेंटल या फैमिली लीव पर थे.
ये उन 8000 कर्मचारियों में से हैं, जो मेटा के वर्कफोर्स का लगभग 10 परसेंट हैं, जिन्हें मई में नौकरी से निकाला गया है. कैलिफ़ोर्निया के ओकलैंड में फेडरल कोर्ट में फाइल किए गए केस में दावा किया गया है कि कंपनी ने यह तय करने के लिए कि किसे नौकरी से निकाला जाएगा, दूसरे तरीकों के साथ-साथ इंटरनल AI सिस्टम, कीस्ट्रोक और एक्टिविटी-मॉनिटरिंग डेटा, AI टोकन-यूसेज डैशबोर्ड और एल्गोरिदम से मदद वाली परफॉर्मेंस रैंकिंग का इस्तेमाल किया है.
एआई की वजह से उन लोगों की लिस्ट तैयार की गई जो बीमारी की वजह से लीव पर थे या फिर किसी डिसएबिलिटी (disability) के कारण जिन कर्मचारियों का आउटपुट कम हो गया था. कर्मचारियों द्वारा दायर किए केस में ये भी कहा गया है कि मेटा ने कर्मचारियों के स्कोर को ध्यान में रखते हुए प्रोटेक्टेड लीव का हिसाब नहीं रखा और कानून के हिसाब से जरूरी इंडिविजुअलाइज़्ड, लीव और अकोमोडेशन न्यूट्रल रिव्यू के लिए सिस्टम को पॉज नहीं किया. इसके अलावा ये भी बताया गया है कि 26 कर्मचारियों में से हर एक ने प्रोटेक्टेड लीव ली और डिसेबिलिटी के लिए सही अकोमोडेशन का अनुरोध किया था. हालांकि उन्हें उनके लेऑफ़ के बारे में बता दिया गया है, फिर भी सभी 26 कर्मचारी 22 जुलाई तक काम करते रहेंगे.
कर्मचारियों का कहना है कि कुछ ने गर्भावस्था तो कुछ ने पैरेंटल लीव ली थी, इस दौरान उन्होंने काम नहीं किया होगा और इस प्रकार उनका आउटपुट कम हो गया था. इसके अलावा कुछ लोगों ने मेडिकल लीव ली तो एक कर्मचारी ने गंभीर स्वास्थ्य स्थिति (सीरियस हेल्थ कंडीशन) और विकलांगता (disability) का खुलासा किया. मैनेजर ने छुट्टी मांगने पर चेतावनी दी थी कि ऐसा करने से छंटनी के लिए उनके नाम का चयन हो जाएगा, मेटा ने कर्मचारी की विकलांगता के लिए कोई आवास की पेशकश नहीं की.
क्या है मेटा का कहना?मेटा ने एक बयान में कहा कि दावों में कोई दम नहीं है और वह तथ्यों पर आधारित नहीं हैं. वर्कफोर्स मैनेजमेंट और ऑर्गेनाइजेशनल फैसले लोग लेते हैं, AI नहीं. लगभग आधे केस करने वालों ने देखभाल या प्रेग्नेंसी से जुड़े कारणों से छुट्टी ली थी. आठ महिलाएं हैं जिन्होंने मैटरनिटी या प्रेग्नेंसी से जुड़ी छुट्टी ली थी, चार पुरुष हैं जिन्होंने पेरेंटल लीव ली थी और एक महिला है जिसने परिवार के किसी सदस्य की देखभाल के लिए और बाद में शोक (bereavement) की छुट्टी ली थी.
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