रशियन महिला को लगा 'इंडिया का झटका', बोलीं- भारत के इन 5 नियमों ने मुझे चक्कर में डाल दिया!
TV9 Bharatvarsh July 15, 2026 07:44 PM

सोशल मीडिया पर आए दिन विदेशी व्लॉगर्स के भारत के अनुभवों से जुड़े वीडियो वायरल होते रहते हैं. लेकिन इन दिनों एक रूसी महिला का वीडियो इंटरनेट पर तहलका मचा रहा है. भारत में रह रहीं अनास्तासिया शारोवा (Anastasia Sharova) ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया है, जिसमें उन्होंने भारत और रूस के बीच के उन 5 बड़े ‘सांस्कृतिक झटकों’ (Cultural Shocks) का जिक्र किया है, जिनकी वजह से शुरुआत में वो बड़ी मुसीबत में पड़ गई थीं.

अनास्तासिया का कहना है कि भारत में सड़क के नियमों से लेकर बातचीत के तरीके तक सब कुछ रूस से बिल्कुल अलग है. आइए जानते हैं कि भारत की वो कौन सी 5 बातें हैं, जिन्होंने विदेशी मैम का सिर चकरा दिया.

हेडलाइट फ्लैश करना: अनास्तासिया के मुताबिक, सड़क पर गाड़ी चलाते समय होने वाले इशारों का मतलब भारत में बिल्कुल बदल जाता है. रूस में अगर कोई ड्राइवर अपनी गाड़ी की हेडलाइट फ्लैश करता है, तो इसका मतलब है- कृपया पहले आप चले जाइए. लेकिन भारत में इसका मतलब ठीक उल्टा है. यहां डीपर चमकाने का मतलब होता है- रास्ते से हट जाओ, मैं नहीं रुकने वाला.

होटल में ठहरना: भारतीय मेहमाननवाजी पूरी दुनिया में मशहूर है, और यही बात अनास्तासिया के लिए एक शॉक जैसी थी. उन्होंने बताया कि भारत में अगर आप किसी ऐसे शहर में जाते हैं जहां आपके दोस्त या रिश्तेदार रहते हैं, और आप उनके घर न रुककर होटल में ठहरते हैं, तो इसे एक गंभीर सामाजिक अपराध की तरह देखा जाता है. लोग नाराज हो जाते हैं कि आपने उन्हें सेवा का मौका क्यों नहीं दिया.

टेक्स्ट मैसेज की जगह सीधे कॉल: अनास्तासिया को सबसे ज्यादा चिढ़ शुरुआत में इस बात से हुई कि भारत में लोग मैसेज टाइप करने के बजाय सीधे फोन कॉल करना पसंद करते हैं. उन्होंने बताया, चाहे प्रोफेशनल काम हो या पर्सनल, यहां लोग मामले को तुरंत सुलझाने के लिए सीधे कॉल घुमा देते हैं. शुरू-शुरू में मुझे इस आदत से काफी परेशानी और चिढ़ होती थी.

भारत में ‘हां’ का मतलब हमेशा ‘हां’ नहीं होता! रूस में अगर कोई कहता है ‘हां’ मैं यह कर सकता हूं, तो इसका मतलब है कि वह उस काम को पक्का करेगा. लेकिन अनास्तासिया ने भारत में सीखा कि यहां कई बार लोग सामने वाले का दिल रखने या सिर्फ शिष्टाचार के नाते ‘हां’ कह देते हैं, जिसका मतलब हमेशा काम पूरा होना नहीं होता.

बड़ों को नाम से बुलाना: रूस और भारत में बड़ों को सम्मान देने का तरीका बिल्कुल जुदा है. रूस में अगर आप किसी बड़े व्यक्ति को उसके पहले नाम से नहीं बुलाते, तो इसे अपमान माना जाता है. वहीं भारत में इसके ठीक उलट किसी बड़े बुज़ुर्ग या टीचर को उनके नाम से पुकारना बदतमीजी और घोर अपमान समझा जाता है. यहां सर, मैम या जी लगाना जरूरी है.

सोशल मीडिया पर छिड़ गई बहस

अनास्तासिया का यह वीडियो इंटरनेट पर आते ही छा गया है. कमेंट सेक्शन में लोग अपनी-अपनी राय रख रहे हैं. एक यूजर ने लिखा, सभी बातें 100% सच हैं. हालांकि फोन कॉल और मैसेज वाली बात हर इंसान की अपनी पसंद पर निर्भर करती है.

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