मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग में चीन को टक्कर देगा भारत! सरकार ने खोला ₹62,500 करोड़ का खजाना
TV9 Bharatvarsh July 15, 2026 09:43 PM

केंद्र सरकार ने बुधवार को मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को मंजूरी दे दी. इस योजना पर 62,500 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे और इसे पांच साल तक लागू किया जाएगा. केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि इस योजना के तहत कंपनियों को भारत में स्थानीय स्तर पर पुर्जों की खरीद (डोमेस्टिक सोर्सिंग), डिजाइन और रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) के आधार पर प्रोत्साहन (इंसेंटिव) दिया जाएगा. इसके अलावा, स्मार्टफोन निर्यात बढ़ाने के लिए भी अलग से प्रोत्साहन मिलेगा.

39 लाख करोड़ रुपये के उत्पादन का लक्ष्य

सरकार का लक्ष्य है कि इस योजना की अवधि में 39 लाख करोड़ रुपये मूल्य के मोबाइल फोन का उत्पादन हो. इससे पहले लागू प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत करीब 22 लाख करोड़ रुपये का उत्पादन हुआ था.

15 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल निर्यात का लक्ष्य

नई योजना के तहत सरकार ने 15 लाख करोड़ रुपये के मोबाइल फोन निर्यात का लक्ष्य रखा है. पिछले PLI कार्यक्रम के दौरान भारत से 7.5 लाख करोड़ रुपये के स्मार्टफोन का निर्यात हुआ था. आज स्मार्टफोन भारत के सबसे बड़े निर्यात उत्पादों में शामिल हो चुके हैं.

20 दिन में जारी होगी अधिसूचना

अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इस योजना की अधिसूचना (Notification) अगले 20 दिनों में जारी कर दी जाएगी. सरकार का अनुमान है कि इस योजना से 60,000 प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. इसके अलावा, इससे जुड़े अन्य उद्योगों में भी रोजगार के नए अवसर बनेंगे.

भारतीय ब्रांड को वैश्विक पहचान दिलाने पर जोर

सरकार का उद्देश्य ऐसा भारतीय मोबाइल ब्रांड तैयार करना है, जो वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सके. यह योजना रिसर्च, इनोवेशन, पेटेंट और नई तकनीकों को बढ़ावा देकर भारत को तकनीकी रूप से अधिक आत्मनिर्भर बनाने में भी मदद करेगी.

उद्योग की थी प्रमुख मांग

मोबाइल फोन बनाने वाली प्रमुख कंपनियां जैसे Dixon Technologies, Foxconn और Tata Electronics लंबे समय से 2020 में शुरू हुई PLI योजना को आगे बढ़ाने की मांग कर रही थीं. नई MPMS योजना को उसी दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

पिछली PLI योजना के शानदार नतीजे

सरकार के मुताबिक, पिछली PLI योजना के तहत 19,090 करोड़ रुपये का इंसेंटिव दिया गया. वहीं, सरकार को स्मार्टफोन उद्योग से 25,000 करोड़ रुपये का प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) और 3 लाख करोड़ रुपये का GST मिला.

इस योजना के तहत 20,587 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जो तय लक्ष्य से तीन गुना अधिक था. योजना के दौरान 11.61 लाख करोड़ रुपये मूल्य के स्मार्टफोन का उत्पादन हुआ, जो लक्ष्य से 142% ज्यादा था. वहीं, 6.43 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हुआ, जो तय लक्ष्य से 132% अधिक रहा.

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