बिहार में तेजी से बढ़ते शहरीकरण के बीच राज्य सरकार शहरों का नक्शा बदलने की तैयारी में है. तेजी से बढ़ते शहरीकरण को देखते हुए राज्य सरकार नगर निकायों के बड़े पुनर्गठन की तैयारी में जुट गई है. इसका असर सिर्फ शहरों की सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि लाखों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, सरकारी सुविधाओं और विकास योजनाओं पर भी पड़ेगा. आने वाले समय में कई नगर पंचायतों और नगर परिषदों का दर्जा बदल सकता है. कुछ नगर परिषद नगर निगम बन सकते हैं, जबकि कई नगर पंचायतों को नगर परिषद का दर्जा मिल सकता है. इसके लिए नगर विकास एवं आवास विभाग ने सभी जिलों से प्रस्ताव मांगे हैं.
सरकार का कहना है कि जिन शहरों की आबादी, क्षेत्रफल और शहरी विकास तेजी से बढ़ा है, उन्हें मौजूदा व्यवस्था के बजाय नई जरूरतों के हिसाब से विकसित किया जाएगा. हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि कितने नए नगर निगम बनाए जाएंगे, लेकिन एक अनुमानित आंकड़ा सामने आया है. अंतिम फैसला 2027 की जनगणना पूरी होने के बाद लिया जाएगा. इस पूरी कवायद का मकसद सिर्फ प्रशासनिक बदलाव नहीं, बल्कि शहरों को बेहतर सड़क, पानी, सीवर, सफाई, स्ट्रीट लाइट और दूसरी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना भी है. ऐसे में आने वाले सालों में बिहार के कई शहरों की पहचान बदल सकती है.
जनगणना के बाद होगा तयनगर विकास एवं आवास मंत्री नीतीश मिश्रा ने कहा है कि सरकार नगर निकायों के पुनर्गठन, क्षेत्र विस्तार और अपग्रेडेशन की दिशा में काम कर रही है. सभी जिला पदाधिकारियों को स्थानीय जरूरतों और शहरी विकास को ध्यान में रखते हुए औचित्यपूर्ण प्रस्ताव भेजने को कहा गया है. सरकार ने स्पष्ट किया है कि 31 मार्च 2027 को जनगणना का काम पूरा होने के बाद नए नगर निकायों के गठन और क्षेत्र विस्तार पर नियमानुसार कार्रवाई होगी.
इसके साथ ही तेजी से विकसित हो रही नगर पंचायतों को नगर परिषद और कुछ नगर परिषदों को नगर निगम बनाने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा. फिलहाल राज्य में 19 नगर निगम, 89 नगर परिषद और 156 नगर पंचायत हैं. माना जा रहा है कि अगर प्रस्तावों को मंजूरी मिलती है तो बिहार के शहरी प्रशासन में अब तक का सबसे बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.
एक नजर में पूरी योजना-पिछले कुछ सालों में बिहार के कई शहरों और कस्बों का तेजी से विस्तार हुआ है. शहरों के आसपास के गांव भी अब शहरी स्वरूप लेने लगे हैं. आबादी बढ़ने के साथ सड़क, पानी, सीवर, सफाई, स्ट्रीट लाइट, सार्वजनिक परिवहन और स्वास्थ्य सेवाओं जैसी सुविधाओं की मांग भी बढ़ी है. लेकिन कई जगह पुराने नगर निकायों की सीमाएं और प्रशासनिक व्यवस्था आज की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त नहीं हैं. ऐसे में सरकार नए हालात के अनुसार नगर निकायों का पुनर्गठन करना चाहती है.
इस फैसले से क्या बदल सकता है?अगर सरकार की योजना लागू होती है, तो कई नगर पंचायतों का दर्जा बढ़कर नगर परिषद हो सकता है. इसी तरह, तेजी से विकसित हो रहे कुछ नगर परिषदों को नगर निगम बनाया जा सकता है. इसके अलावा, कई शहरों की सीमाएं बढ़ाई जा सकती हैं ताकि आसपास के विकसित हो चुके इलाकों को भी शहरी प्रशासन के दायरे में लाया जा सके. इससे इन क्षेत्रों को शहरी विकास योजनाओं का लाभ मिलने की संभावना बढ़ेगी.
कौन बन सकते हैं नए नगर निगम? (Michael Nguyen/NurPhoto via Getty Images)
कौन-कौन बन सकते हैं नगर निगम?अभी सरकार ने किसी भी शहर के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं की है. लेकिन, नगर निगम बनाने के लिए आबादी का मानक 3 लाख से ज्यादा का है. जिसको देखते हुए स्थानीय प्रशासन और शहरी विकास से जुड़ी चर्चाओं में दानापुर, खगरिया, जमालपुर, औरंगाबाद, डेहरी, हाजीपुर, सिवान और किशनगंज को संभावित नगर निगम के रूप में देखा जा रहा है. दरअसल, इन सभी नगर परिषदों की जनसंख्या साल 2011 की जनगणना रिपोर्ट से देखें, तो 1 लाख से ज्यादा है. इन शहरों में आबादी, व्यापारिक गतिविधियां और शहरी विस्तार तेजी से बढ़ा है. हालांकि, इन नामों पर अंतिम फैसला सरकार की जांच, जनगणना के आंकड़ों और अधिसूचना जारी होने के बाद ही होगा.
नगर निगम कैसे बनता है?किसी शहर को सीधे नगर निगम का दर्जा नहीं मिल जाता. राज्य सरकार सबसे पहले उस शहर की आबादी, जनसंख्या घनत्व, राजस्व, शहरी क्षेत्र का विस्तार, व्यापारिक गतिविधियां और बुनियादी सुविधाओं की जरूरत का आकलन करती है. जिला प्रशासन अपनी रिपोर्ट भेजता है, फिर नगर विकास विभाग प्रस्ताव की जांच करता है. इसके बाद सरकार अधिसूचना जारी करती है और तभी किसी नगर परिषद को नगर निगम का दर्जा मिलता है. इस बार भी यही प्रक्रिया अपनाई जाएगी.
नगर निगम बनने से क्या फायदा होगा?नगर निगम बनने के बाद किसी शहर को विकास योजनाओं के लिए अधिक बजट मिलने की संभावना बढ़ जाती है. इससे सड़क, पेयजल, सीवर, कचरा प्रबंधन, स्ट्रीट लाइट, पार्क, सार्वजनिक परिवहन और डिजिटल नागरिक सेवाओं में सुधार हो सकता है. इसके अलावा शहरों की बेहतर प्लानिंग, भवन निर्माण की निगरानी और सफाई व्यवस्था भी अधिक व्यवस्थित हो सकती है. नगर निगम बनने से केंद्र और राज्य सरकार की कई शहरी योजनाओं का लाभ भी आसानी से मिल सकता है. हालांकि, इसके साथ होल्डिंग टैक्स और अन्य शहरी नियम भी लागू हो सकते हैं.
अभी बिहार में कितने नगर निगम हैं?फिलहाल बिहार में 19 नगर निगम हैं. सरकार ने अभी यह नहीं बताया है कि कितने नए नगर निगम बनाए जाएंगे. पहले सभी जिलों से प्रस्ताव लिए जाएंगे और फिर जनगणना के आंकड़ों व अन्य मानकों के आधार पर निर्णय लिया जाएगा. इसलिए अभी नए नगर निगमों की संख्या तय नहीं हुई है.