नकली बीजों का काला कारोबार! मराठवाड़ा-विदर्भ में 5 हजार किसानों ने की शिकायत, बोने के बाद नहीं उगी फसल
TV9 Bharatvarsh July 15, 2026 11:43 PM

Maharashtra News: महाराष्ट्र के मराठवाड़ा और विदर्भ में नकली और घटिया बीजों ने हजारों किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है. किसानों ने महंगे दामों पर ब्रांडेड कंपनियों के नाम से सोयाबीन और अन्य फसलों के बीज खरीदे, कर्ज लेकर खेतों की जुताई, बुवाई और सिंचाई कराई, लेकिन 15 से 20 दिन बीत जाने के बाद भी खेतों में अंकुर तक नहीं फूटे. अब तक पांच हजार से अधिक किसान पुलिस, कृषि विभाग और प्रशासन के पास शिकायत दर्ज करा चुके हैं. सरकार ने जांच के आदेश दिए हैं और कई बीज कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है.

नकली बीजों ने उजाड़े किसानों के सपने

मराठवाड़ा के लातूर, धाराशिव, बीड, परभणी, नांदेड़ समेत विदर्भ के कई जिलों से किसानों की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं. किसानों का आरोप है कि ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बेचे गए बीज या तो नकली थे या उनकी गुणवत्ता बेहद खराब थी. परिणाम यह हुआ कि बुवाई के कई दिनों बाद भी खेतों में फसल नहीं उगी. शुरुआत में लातूर जिले में करीब 120 किसानों ने शिकायत दर्ज कराई थी, लेकिन देखते ही देखते यह संख्या बढ़कर 468 से अधिक हो गई. पूरे मराठवाड़ा और विदर्भ में अब तक पांच हजार से ज्यादा शिकायतें सामने आ चुकी हैं.

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कर्ज लेकर की खेती, अब दोबारा बुवाई की मजबूरी

सोयाबीन उत्पादन के लिए प्रसिद्ध मराठवाड़ा में अधिकांश किसान खरीफ सीजन में इसी फसल पर निर्भर रहते हैं. इस बार किसानों ने बैंक और साहूकारों से कर्ज लेकर बीज, खाद, जुताई, सिंचाई और मजदूरी पर हजारों रुपए खर्च किए, लेकिन बीज अंकुरित नहीं होने से पूरी फसल चौपट हो गई. अब किसानों के सामने दोबारा बुवाई करने की मजबूरी है, जिसके लिए उन्हें फिर से बीज, खाद और मजदूरी पर खर्च करना पड़ेगा. पहले से कर्ज में डूबे किसानों की आर्थिक स्थिति और खराब हो गई है.

सरकार ने दिए सख्त कार्रवाई के संकेत

मामले ने तूल पकड़ने के बाद महाराष्ट्र सरकार भी हरकत में आ गई है. कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि सरकार को कई बीज कंपनियों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं. दोषी कंपनियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने कहा कि संबंधित कंपनियों का पंचनामा कराया जा रहा है. जांच पूरी होने के बाद उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होगी. वहीं विभागीय संयुक्त कृषि निदेशक महेश कुमार तीर्थकर ने बताया कि चार से पांच बीज कंपनियों के खिलाफ जांच शुरू कर दी गई है. बीजों के नमूने परीक्षण के लिए भेजे गए हैं. रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी.

राजनीति भी गर्म, नेताओं ने सरकार को घेरा

नकली बीजों का मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी पकड़ चुका है. पूर्व सांसद नवनीत राणा प्रभावित किसानों के खेतों में पहुंचीं. उन्होंने दोषी कंपनियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कर उन्हें ब्लैकलिस्ट करने की मांग की. वहीं विधायक और किसान नेता बच्चू कडू ने कृषि अधिकारियों से फोन पर बात करते हुए किसानों को तत्काल दोबारा बुवाई के लिए बीज उपलब्ध कराने की मांग की. उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों को समय पर राहत नहीं मिली तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा. उधर, सांसद ओमराजे निंबालकर ने भी सरकार से दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और किसानों को पूरा मुआवजा देने की मांग की.

हर साल कैसे बिक जाते हैं नकली बीज?

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, मानसून शुरू होने से पहले नकली बीजों का कारोबार सबसे अधिक सक्रिय हो जाता है. कुछ लोग नामी कंपनियों जैसी पैकिंग तैयार कर बाजार में नकली बीज बेच देते हैं. कई मामलों में बिना प्रमाणित बीजों को ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बेचा जाता है, जबकि कुछ बीजों का अंकुरण प्रतिशत बेहद कम होता है.

विशेषज्ञ किसानों को सलाह देते हैं कि वे केवल अधिकृत विक्रेताओं से ही बीज खरीदें, हमेशा पक्का बिल लें और पैकेट पर बैच नंबर, वैधता, प्रमाणन और अंकुरण प्रतिशत जरूर जांचें. यदि बीज अंकुरित नहीं होते हैं तो तुरंत कृषि विभाग में शिकायत कर खेत का पंचनामा कराएं.

यवतमाल में बीज कंपनी पर FIR

इसी बीच यवतमाल जिले के बाभुलगांव पुलिस थाने में बूस्टर प्लांट जेनेटिक्स कंपनी के खिलाफ किसानों से कथित धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया है. जिलाधिकारी के निर्देश पर तालुका कृषि अधिकारी की शिकायत के आधार पर कंपनी के खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), आवश्यक वस्तु अधिनियम और बीज अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत FIR दर्ज की गई है. किसानों का आरोप है कि कंपनी द्वारा बेचे गए सोयाबीन के बीज अंकुरित ही नहीं हुए, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा.

सबसे बड़ा सवाल- किसानों का नुकसान कौन भरेगा?

सरकार जांच और कार्रवाई का भरोसा दे रही है, लेकिन किसानों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि पहली बुवाई, जुताई, सिंचाई और मजदूरी में हुए नुकसान की भरपाई कौन करेगा? दोबारा बुवाई के लिए पैसा कहां से आएगा? किसान दोषी कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, एफआईआर, लाइसेंस रद्द करने, तत्काल मुआवजा और मुफ्त बीज उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं. फिलहाल जांच जारी है, लेकिन यह मामला केवल नकली बीजों का नहीं, बल्कि किसानों के भरोसे, कृषि व्यवस्था और खाद्य सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन चुका है.

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