Kark Sankranti 2026: सनातन धर्म में सूर्य देव के संक्रांति पर्व का विशेष महत्व है. इस पर्व का संबंध सूर्य देव के राशि परिवर्तन से होता है. जब भी सूर्य एक राशि से दूसरी राशि में प्रवेश करते हैं, तो संक्रांति का पर्व मनाया जाता है. आज सूर्य देव रात को 11 बजकर 45 मिनट पर चंद्रमा की कर्क राशि में प्रवेश करेंगे. यही संक्रांति का क्षण होगा. ऐसे में आज कर्क संक्रांति का पावन पर्व मनाया जा रहा है. शास्त्रों में कर्क संक्रांति का महत्व सूर्य देव की अन्य संक्रांतियों से अधिक होता है.
कर्क संक्रांति वो दिन माना जाता है, जब सूर्य उत्तर से दक्षिणी गोलार्ध की ओर झुकते हैं और ‘दक्षिणायन’ शुरू होता है. जिस तरह से सूर्य देव के मकर राशि में ‘उत्तरायण’ की शुरुआत होती है, जिसे देवताओं का दिन कहा जाता है, ठीक उसी तरह से सूर्य देव के कर्क राशि में प्रवेश करने पर ‘दक्षिणायन’ शुरू होता है. इसे देवताओं का रात्रि काल कहा जाता है. कर्क संक्रांति से दिन घटने और रातें बढ़ने लगती हैं. ऐसे में आइए जानते हैं कर्क संक्रांति का शुभ मुहूर्त और सूर्य देव की पूजा का समय. साथ ही जानते हैं सूर्य देव की पूजा की विधि.
कर्क संक्रांति 2026 का पुण्य और महा पुण्य कालये भी पढ़ें: Kapaal Kriya: क्यों बेहद जरूरी मानी जाती है कपाल क्रिया? जिसके बिना अधूरी रह जाती है आत्मा की अंतिम यात्रा!
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. टीवी9 भारतवर्ष इसकी पुष्टि नहीं करता है.