Health Insurance Policy: आज के समय में किसी भी गंभीर बीमारियों का इलाज लाखों रुपये तक पहुंच जाता है. ऐसे में ज्यादातर लोग अपनी आर्थिक सुरक्षा के लिए हेल्थ इंश्योरेंस लेते हैं. हालांकि, जरूरत पड़ने पर कई दफा यह पता चलता है कि पॉलिसी में बीमारी पूरी तरह कवर ही नहीं है या उस पर कई तरह की शर्तें लागू की गई है.
ऐसे में अगर आप भी हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते हैं, तो आपके लिए यह बेहद जरूरी है कि आप हेल्थ इंश्योरेंस की कवरेज को अच्छी तरह समझें. साथ ही एक बार आप यह भी जांच लें कि आपकी पॉलिसी गंभीर बीमारियों को कवर करती है या नहीं. अगर आपके पास पॉलिसी की सही जानकारी है, तो इलाज के समय आप आर्थिक परेशानी से बच सकते हैं.
गंभीर बीमारी का कवर क्यों है जरूरी?
ज्यादातर हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसियां अस्पताल में भर्ती होने के खर्च को कवर करती हैं, लेकिन हर योजना में गंभीर बीमारियों का दायरा अलग भी हो सकता है. कई बीमा कंपनियां क्रिटिकल इलनेस कवर या राइडर भी देती हैं, जिसमें कैंसर, स्ट्रोक, हार्ट अटैक, किडनी फेलियर, अंग प्रत्यारोपण जैसी गंभीर बीमारी का पता चलने पर आपको एकमुश्त रकम दी जाती है. ऐसे में आपके लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि आपकी पॉलिसी में ऐसा लाभ शामिल है या नहीं.
वेटिंग पीरियड और शर्तों को समझें
हेल्थ इंश्योरेंस खरीदते ही आपको सभी बीमारियों का फायदा नहीं मिलता. कई पॉलिसियों में कुछ बीमारियों के लिए वेटिंग पीरियड तय होता है, जबकि कुछ बीमारियां या पहले से मौजूद मेडिकल कंडीशन पर अलग से शर्तें होती है. ऐसे में आप पॉलिसी में शामिल एक्सक्लूजन को ध्यान से पढ़ें, ताकि आपको बाद में क्लेम रिजेक्ट होने जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े.
क्या आपकी पॉलिसी काफी है?
समय के साथ-साथ इलाज का खर्च भी लगातार बढ़ते जा रहा है. ऐसे में अगर आपने कई साल पहले हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी खरीदी है, तो वह आज के इलाज के खर्च के लिए काफी नहीं हो सकती है. इसलिए जरूरी है कि अपनी हेल्थ इंश्योरेंस की समय-समय पर छानबीन करें. साथ ही जरूरत पड़ने पर बीमा राशि बढ़ाने या बेहतर कवरेज वाली पॉलिसी चुनने के बारे में भी सोचें, ताकि इससे भविष्य में आने वाले बड़े इलाजों का आर्थिक बोझ काफी हद तक कम किया जा सकें.