बिहार में मोबाइल चोरी का कॉर्पोरेट मॉडल! 9000 सैलरी, टारगेट और इंसेंटिव के साथ चलता था ये पूरा गैंग
TV9 Bharatvarsh July 16, 2026 08:43 PM

Patna News: बिहार में बढ़ती मोबाइल छिनतई और चोरी की घटनाओं के बीच पटना पुलिस ने एक ऐसे संगठित अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसका खुलासा सुनकर पुलिस अधिकारी भी हैरान रह गए. इस गिरोह में मोबाइल चुराने के लिए बाकायदा ‘कर्मचारी’ रखे जाते थे, जिन्हें हर महीने 9 हजार रुपए वेतन दिया जाता था और टारगेट दिया जाता था कि कम से कम 30 मोबाइल चोरी करने ही हैं. टारगेट से ज्यादा मोबाइल उड़ाने पर अलग से इंसेंटिव भी मिलता था.

पटना पुलिस ने फतुहा के नदी थाना क्षेत्र स्थित बांसतल गांव में छापेमारी कर इस हाईटेक मोबाइल चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया. कार्रवाई के दौरान पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है. इनके कब्जे से 28 महंगे स्मार्टफोन, जिनमें एक आईफोन भी शामिल है और एक चोरी की मोटरसाइकिल बरामद की गई है.

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बेडरूम बना रखा था चोरी के मोबाइलों का गोदाम

पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि बांसतल गांव निवासी राहुल कुमार चोरी के मोबाइलों की खरीद-बिक्री का कारोबार करता है. सूचना के आधार पर जब पुलिस टीम उसके घर पहुंची और बेडरूम की तलाशी ली तो वहां का नजारा देखकर अधिकारी भी दंग रह गए.

कमरे से अलग-अलग कंपनियों के कुल 28 एंड्रॉयड स्मार्टफोन और एक कीमती आईफोन बरामद हुआ. जब पुलिस ने मोबाइलों के बिल और वैध दस्तावेज मांगे तो राहुल और उसके साथ मौजूद लोग कोई कागजात नहीं दिखा सके. इसके बाद पुलिस ने राहुल कुमार और उसके भाई सन्नी कुमार को गिरफ्तार कर लिया.

दूसरे कमरे से मिले सैलरी वाले चोर

तलाशी के दौरान पुलिस को घर के दूसरे कमरे में दो युवक छिपे हुए मिले. पूछताछ में दोनों ने खुद को राहुल का स्टाफ बताया. जब पुलिस ने उनके काम के बारे में पूछा तो अधिकारियों के होश उड़ गए. दोनों युवकों की पहचान झारखंड के साहेबगंज निवासी अजहर अंसारी और नूरआलम अंसारी के रूप में हुई. उन्होंने पुलिस को बताया कि वे राहुल के यहां 9 हजार रुपए महीने की तनख्वाह पर काम करते हैं. उनका काम रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड और भीड़भाड़ वाले बाजारों में लोगों की जेब से मोबाइल उड़ाना था.

सूत्रों के अनुसार गिरोह ने अपने कर्मचारियों के लिए मासिक टारगेट भी तय कर रखा था. हर चोर को महीने में कम से कम 30 मोबाइल चोरी करने होते थे. टारगेट पूरा नहीं होने पर फटकार और पूरा होने पर वेतन, जबकि ज्यादा मोबाइल चोरी करने पर बोनस दिया जाता था.

बिहार से चोरी, झारखंड में बिक्री

पुलिस जांच में सामने आया है कि पटना, फतुहा और आसपास के इलाकों से चोरी किए गए मोबाइलों को झारखंड के साहेबगंज भेजा जाता था. वहां इन्हें औने-पौने दामों में बेच दिया जाता था, ताकि बिहार पुलिस की पकड़ से बचा जा सके. पूछताछ में यह भी पता चला कि गिरोह के सदस्य चोरी के मोबाइलों को तेजी से खपाने के लिए राज्य की सीमा पार कर देते थे. इससे मोबाइल ट्रैकिंग और बरामदगी की संभावना भी कम हो जाती थी.

साइबर अपराध से भी जुड़ सकता है कनेक्शन

जांच एजेंसियों के अनुसार, झारखंड का साहेबगंज इलाका लंबे समय से साइबर अपराधियों की गतिविधियों को लेकर चर्चा में रहा है. आशंका जताई जा रही है कि चोरी के कुछ मोबाइलों का इस्तेमाल साइबर ठगी, बैंक खातों की जानकारी निकालने और ऑनलाइन फ्रॉड में भी किया जाता होगा.

जानकारों के मुताबिक, अपराधी चोरी के मोबाइल से बैंकिंग ऐप, यूपीआई और अन्य संवेदनशील जानकारियां हासिल कर खाताधारकों को चूना लगाते हैं. वहीं अच्छी स्थिति वाले मोबाइलों को नेपाल और बांग्लादेश जैसे सीमावर्ती बाजारों तक पहुंचाने की भी आशंका जताई जा रही है.

फतुहा एसडीपीओ-1 अवधेश कुमार ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है. गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है. पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं. चोरी के मोबाइल किन-किन राज्यों में बेचे जाते थे.

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