मुंबई के जुहू बीच पर कचरे के ढेर की तस्वीरें और वीडियो वायरल होने के बाद बॉम्बे हाईकोर्ट ने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है. कोर्ट ने सवाल किया कि देश की सबसे समृद्ध नगर निगम होने के बावजूद मुंबई देश के सबसे स्वच्छ शहरों में क्यों शामिल नहीं है. हाईकोर्ट ने बीएमसी से शहर की सफाई व्यवस्था सुधारने के लिए ठोस और समयबद्ध कार्ययोजना पेश करने को कहा है.
हाल ही में जुहू बीच पर समुद्र से बहकर आए प्लास्टिक और अन्य कचरे के बड़े-बड़े ढेर सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे. इसके बाद बीएमसी ने दावा किया कि पिछले 10 दिनों में जुहू बीच से लगभग 1,800 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया है.
बीच पर रोजाना करीब 350 मीट्रिक टन कचरानिगम के अनुसार, भारी बारिश और ऊंची ज्वार (हाई टाइड) के कारण नालों और जलमार्गों से बहकर कचरा समुद्र में पहुंचा और फिर वापस तट पर आ गया. फिलहाल रोजाना करीब 350 मीट्रिक टन कचरा बीच पर पहुंच रहा है, जबकि सामान्य दिनों में यह मात्रा लगभग 60 मीट्रिक टन रहती है.
इंदौर शहर का दिया उदाहरणसफाई व्यवस्था को लेकर सुनवाई के दौरान बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा कि यदि इंदौर जैसे शहर स्वच्छता में लगातार देश में शीर्ष स्थान हासिल कर सकते हैं, तो पर्याप्त संसाधनों वाली मुंबई के लिए भी ऐसा करना मुश्किल नहीं है. कोर्ट ने बीएमसी आयुक्त को निर्देश दिया कि सार्वजनिक स्थानों, सड़कों और फुटपाथों पर कचरा जमा होने के लिए संबंधित वार्ड अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए और लापरवाही पर सख्त कार्रवाई की जाए.
सफाई अभियान चलाना पर्याप्त नहींहाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल सफाई अभियान चलाना पर्याप्त नहीं है. कचरे को समुद्र और नालों तक पहुंचने से रोकने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित करनी होगी. पर्यावरण विशेषज्ञों का भी कहना है कि जब तक नालों, खाड़ियों और समुद्र में प्लास्टिक एवं ठोस कचरा जाने से नहीं रोका जाएगा, तब तक हर हाई टाइड के बाद यही स्थिति दोहराई जाती रहेगी.
शोरी पेडणेकर ने बनाया था वीडियोदो दिन पहले बीएमसी में नेता प्रतिपक्ष किशोरी पेडणेकर ने अल सुबह जुहू बीच पर जाकर समुद्र चौपाटी पर बड़ी संख्या मैं कचरे को दिखाते हुए वीडियो बनाया था जो काफी वायरल हुआ था. पिछले 10 दिनों से समुद्र किनारे कचरे के वीडियो फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे है.