The Odyssey की पौराणिक कहानी क्या है… क्रिस्टोफर नोलन ने सिनेमाई पर्दे पर कैसे रचा जादुई संसार?
TV9 Bharatvarsh July 17, 2026 06:43 PM

क्रिस्टोफर नोलन की यह फिल्म होमर के ग्रीक महाकाव्य ‘द ओडिसी’ पर आधारित है. इसमें ट्रोजन वॉर को दिखाया गया है. यह ग्रीक माइथोलॉजी का सबसे चर्चित युद्ध है, जैसे कि हम महाभारत या सम्राट अशोक के कलिंग युद्ध को जानते हैं. इथाका के महान योद्धा राजा ओडीसियस वह युद्ध तो जीत जाते हैं लेकिन उनकी घर वापसी बहुत आसान नहीं होती. फिल्म की कहानी में घर वापसी की इसी भयावहता का विस्तार से वर्णन है. ओडीसियस ने घर लौटने में कितनी कठिनाइयां झेलीं और इस यात्रा में राक्षस से लेकर दैव तक से किस तरह से सामना किया- ये सब कुछ दिखाया गया है.

करीब तीन हजार साल पहले की ये कहानी इतनी भर नहीं है. इसका बहुत ही भावुक और जज्बाती पक्ष भी है. कहानी की शुरुआत में ट्रॉय के पतन को दिखाया जाता है. लंबे युद्ध में विजयी होने के बाद ओडीसियस को अपने घर इथाका लौटना है. उसे दस साल से भी ज्यादा का समय लग जाता है. घर वापसी की उसकी लड़ाई, ट्रोजन वॉर की दुश्वारियों से कम नहीं होती. रास्ते में वह दुश्मनों को परास्त करते जातं हैं लेकिन इस क्रम में उसके अपने साथी भी खोते जा रहे हैं.

वीर गाथा में भावुक कथा

द ओडिसी जैसी वीर गाथा का सबसे भावुक किसी को भी द्रवित कर देता है. जब ओडीसियस युद्ध के बाद घर लौट रहा है, तभी दूसरी तरफ इथाका में उसकी पत्नी और बेटे उनसे युद्ध में जूझ रहे थे जो कि उनके साम्राज्य पर कब्जा करना चाहते थे. इसके बाद आखिरकार क्या होता है- ओडीसियस कैसे और कब इथाका लौटते हैं, पत्नी और बेटे को मदद पहुंचाते हैं- ये सबकुछ होमर के महाकाव्य में दर्ज है और इस फिल्म में भी.

लेकिन इस दौरान ओडीसियस और उसके पत्नी-बेटे के दर्द और संघर्ष से कहानी बहुत ही भावुक हो जाती है. कुल मिलाकर कहें तो कहानी में जितनी जांबाजी दिखाई गई है, उतनी ही संवेदनशीलता भी. यही वजह है कि द ओडिसी सालों साल से लोगों के दिल के करीब है.फिल्म में मैट डेमन, टॉम हॉलैंड, ऐनी हैथवे, ज़ेंडाया, लुपिता न्योंगो, रॉबर्ट पैटिन्सन, चार्लीज़ थेरॉन, जॉन बर्न्थॉल, हिमेश पटेल, जॉन लेगुइज़ामो और सामंथा मॉर्टन जैसे कई कलाकार हैं.

दुनिया भर में लोकप्रिय कहानी

आपको बताएं कि क्रिस्टोफर नोलन की द ओडिसी कई वजहों से लंबे समय से चर्चा में थी. पहली वजह तो ये कि फिल्म की कहानी होमर के महाकाव्य पर आधारित है, जिसकी पूरी दुनिया में लोकप्रियता है. हजारों साल पहले की इस पौराणिक कहानी को नोलन ने पर्दे पर कैसे उतारा, यह देखने की जिज्ञासा सबके भीतर थी. अब दर्शकों की जो प्रतिक्रिया सामने आई है, उससे लगता है कि फिल्म ने जादू जगा दिया है.

दूसरी वजह फिल्म का तकनीक पक्ष भी है. क्रिस्टोफर नोलन का मानना है कि पर्दे पर एक विख्यात जांबाज किरदार की शूरवीरता और उसका संघर्ष वाजिब दिखे और युद्ध का असर नजर से जिगर तक सटीक तरह से पहुंचे, इसके लिए आईमैक्स तकनीक ही सर्वोपरि होगा. हालांकि ये बहस का विषय हो सकता है कि भारत जैसे तीसरी दुनिया के कई देशों में आईमैक्स थिएटर्स की भारी कमी है.

आईमैक्स तकनीक ने जगाता जादू

खैर! द ओडिसी को टूडी में देखें या आईमैक्स पर्दे पर- फिल्म की पौराणिक कहानी और राजा ओडिसियस की घर वापसी की कठिन और लंबी यात्रा का मर्म सबके सामने है.

द ओडिसी को 70mm IMAX में शूट किया गया है. यह बहुत ही प्रभावशाली विजुअल एक्सपीरियंस देने वाला तकनीक है. मेकिंग की खासियत ये है कि फिल्म नॉन लिनियर स्केल पर चलती है, इसकी वजह से दर्शक कहानी के हरेक घटनाक्रम से जुड़े रहते हैं. दर्शकों का ध्यान नहीं भटकता. फिल्म में होयटे वैन होयटेमा की सिनेमटोग्राफी और लुडविग गोरान्सन का बैकग्राउंड स्कोर शानदार है.

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