मानसून सत्र अभी शुरू भी नहीं हुआ, लेकिन संसद के बाहर सियासी पारा चढ़ गया है. सत्ता पक्ष ने शुक्रवार को संसद के अंदर की पूरी रणनीति पर मंथन किया. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के ऑफिस में हुई बैठक में फ्लोर मैनेजमेंट से लेकर बड़े संविधान संशोधन विधेयकों तक पर चर्चा हुई और इस बार सरकार की नजर सिर्फ बिलों की लंबी लिस्ट पर नहीं बल्कि उन मुद्दों पर है, जो सीधे देश की राजनीति का गणित बदल सकते हैं. इसमें परिसीमन से लेकर महिला आरक्षण बिल, एक देश एक चुनाव बिल और पीएम-सीएम को कुर्सी से हटाने वाला बिल शामिल हैं यानी इस बार मानसून सत्र में बिल कम और सियासी बवाल ज्यादा दिखने वाला है.
दरअसल, 20 जुलाई से संसद का मानसून सत्र शुरू होगा, लेकिन संसद के बाहर ही सत्ता पक्ष ने अपना होमवर्क शुरू कर दिया है. राजनाथ सिंह के दफ्तर में हुई अहम बैठक में विदेश मंत्री एस जयशंकर, दोनों सदनों के चीफ व्हिप, सहयोगी दलों के ललन सिंह और राम मोहन नायडू, बीजेपी के जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और किरेन रिजिजू समेत बड़े नेता मौजूद रहे. इसका मतलब साफ है कि संसद में इस बार सिर्फ हंगामा मैनेज नहीं करना है बल्कि बिल भी मैनेज करने हैं और नंबर भी. हालांकि सरकार के मंत्री अभी चुप हैं, लेकिन सत्ता पक्ष के सांसद कह रहे हैं कि अप्रैल में इस बिल के विरोध की वजह से टीएमसी और डीएमके अपने अपने राज्यों में चुनाव हार चुकी हैं, इसलिए विपक्ष को संभल जाना चाहिए.
लोकसभा की सीटों का बदलेगा गणितसत्ता पक्ष के एजेंडे में सबसे ऊपर है परिसीमन और उसके साथ महिला आरक्षण बिल यानी लोकसभा की सीटों का गणित बदलेगा और महिलाओं के आरक्षण का रास्ता खुलेगा. उधर, 130वें संविधान संशोधन का मामला भी विपक्ष के रडार पर है, जिसमें जेल में 30 दिन से ज्यादा रहे तो प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और मंत्री की कुर्सी जाएगी. हालांकि इसकी रिपोर्ट को जेपीसी शुक्रवार को अडॉप्ट करने वाली थी, लेकिन सत्ता पक्ष की तरफ से ही इसका विरोध हो गया, लिहाजा इसे टाल दिया गया है.
सरकारी सूत्र बताते हैं कि इस सत्र में सरकार की ये प्रायोरिटी नहीं है यानी इस बार संसद में बहस सिर्फ ये नहीं होगी कि सरकार कौन चलाएगा, बहस ये भी होगी कि सरकार जेल से चलेगी या नहीं. पिछले सत्र में परिसीमन के मुद्दे पर सरकार को दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा नहीं मिला था, लेकिन अब लोकसभा का गणित बदल चुका है, एनडीए के पास करीब 298 सांसद हैं.
टीएमसी के 20 बागी और उद्धव गुट के 6 सांसदों को जोड़कर आंकड़ा 324 तक पहुंच चुका है. इसके अलावा डीएमके के 22 और शरद पवार गुट की NCP के 8 सांसदों पर भी नजर है. समीकरण बना तो आंकड़ा 354 तक पहुंच सकता है यानी अब सरकार की नजर सिर्फ विपक्ष पर नहीं, कुछ ऐसे सांसदों पर भी है, जो आज विपक्ष में हैं, लेकिन कल का गणित बदल सकते हैं. हालाकि कांग्रेस को उम्मीद है कि डीएमके अभी भी विपक्ष का साथ देगा.
विपक्ष ने मुद्दों की पूरी लिस्ट कर ली तैयारकांग्रेस संसदीय दल की बैठक में परिसीमन बिल का विरोध करने का फैसला हुआ है. बेरोजगारी से लेकर महंगाई, NEET पेपर लीक, FCRA संशोधन और खाद्य सुरक्षा कानून में बदलाव तक, विपक्ष ने मुद्दों की पूरी लिस्ट तैयार कर ली है और जयराम रमेश ने सर्वदलीय बैठक को लेकर भी सरकार पर निशाना साध दिया. विपक्ष का कहना है कि बैठक में नेता बहुत होंगे, लेकिन सुनने वाले कम और फैसला वही होगा जो सरकार चाहेगी.
एक देश, एक चुनाव और 130वें संविधान संशोधन को लेकर भी विपक्ष लामबंदी कर रहा है. हालांकि परिसीमन पर INDIA गठबंधन की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं है. NCP शरद पवार गुट की सुप्रिया सुले 50 फीसदी सीट बढ़ाने वाले फॉर्मूले की बात कर चुकी हैं यानी विपक्षी एकता की परीक्षा भी संसद के अंदर होगी और सत्ता पक्ष के नंबर गेम की भी. इस बार संसद में बिलों की गिनती कम नहीं होगी, लेकिन असली हिसाब वोटों का होगा. 19 जुलाई की सर्वदलीय बैठक के बाद तस्वीर और साफ होगी, क्योंकि मानसून सत्र में सवाल सिर्फ ये नहीं होगा कि कौन सा बिल पास होगा, सवाल ये भी होगा कि किसके पास नंबर हैं और किसके पास सिर्फ नारे.
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